वैसे खबर की हेडिंग और फोटो देखकर तो आप समझ ही गए होंगे कि माज़रा क्या है. लेकिन बिना पूरी कहानी जाने पेट का पानी नहीं पचता है. हमारे साथ भी कुछ ऐसी ही दिक्कत है. खबर देखी कि यूपी में एक प्रत्याशी नॉमिनेशन के लिए जा रहे थे. वो भी पूरी बारात के साथ. इसकी तस्वीर देखकर के ही चुल्ल मच गई जानने की. जानकारी जुटाई तो पता चला कि ये पहला मौका नहीं है जब इन्होंने कुछ ऐसा ट्राई किया हो. इससे पहले भी ये ऐसे कारनामे कर चुके हैं.
अब आपको ये सारी बातें सुनने में और तस्वीरें देखने में अटपटा लग रहा होगा. लेकिन सिंगापुर वाले चौबे बाबा की कसम, 100 फीसद सच है. अब रुकिए! कहानी यहीं नहीं खत्म हुई है, इनका पिछला हिसाब लेते जाइये. ये इससे पहले भी कई चुनाव लड़ चुके हैं. 2017 वाले विधानसभा चुनाव के वक्त अर्थी पर लेटकर पर्चा भरने पहुंचे थे. उससे पहले भैंसे पर बैठकर यमदूत वाले स्टाइल में पर्चा भरने पहुंचे थे. यानी कुल मिलाकर मुस्कुराने की पूरी गारंटी देते हैं भाई साहब.

2017 के विधानसभा चुनाव में अर्थी पर लेटकर नामांकन करने पहुंचे थे वैद्यराज किशन. (तस्वीर- फाइल)
अब जब ये बैंड बाजा के साथ अपना नामांकन भरने पहुंचे थे तो पुलिस और प्रशासन ने इन्हें घोड़ी से उतरवा दिया. बारात को भी वापिस लौटवा दिया. कहा कि पर्चा भरना है तो पैदल जाइये. फिर वैद्यराज किशन कलेक्ट्रट तक पैदल ही गए और अपना पर्चा भरकर आए. वैसे प्रशासन में ज़रूर कोई न कोई अक्षय कुमार का फैन रहा होगा जिसने इन्हें घोड़ी से उतारते वक्त मन ही मन 'सिंह इज़ किंग' का वो गाना गाया होगा,
"तैनू घोड़ी किन्ने चढ़ाया............."










