राजनीति क्या है. पता नहीं. ऐसा लगता है जो समझ न आये और मौके को भुना ले जाए, वही राजनीति है. राजनीति में इस्तेमाल बहुत मायने रखता है. कब, कहां और किसका इस्तेमाल करना है. ये सामंजस्य बहुत उलटफेर कर देता है. ऐसा ही उलटफेर यूपी विधानसभा चुनावों में देखे जाने की उम्मीद की जा रही है. यूपी की सियासत में बड़ा बदलाव दो औरतें लाने वाली हैं ऐसा सोर्स कह रहे हैं. ये दो औरतें हैं अखिलेश यादव की बीवी डिंपल यादव और राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी. खबर है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी इन दोनों शख्सियतों के सहारे गठबंधन की डोर बंध गई है. लेकिन अभी कोई ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है. सूत्रों के हवाले से ही खबर है कि गठबंधन को लेकर अखिलेश खेमे के साथ कांग्रेस की गुरुवार को मीटिंग हुई. शुक्रवार को यानी आज भी बैठक बुलाई गई है. जिसमें ये तय किया जाना है कि कांग्रेस के साथ सीट का बंटवारा किया जा सके. ऐसा होने पर डिंपल और प्रियंका ही स्टार प्रचारक होंगी. जिनके जरिए बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने की कोशिश होगी. इलाहबाद कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटी हसीब अहमद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर अपलोड किया है, उम्मीद की जा रही है गठबंधन का ऐलान होते ही इस तरह के पोस्टर और भी देखने को मिल सकते हैं. प्रियंका दीदी के तौर पर और डिंपल यादव भाभी के तौर पर लोगों के दिल में जगह बना चुकी हैं.
स्टार प्रचारक बनने वाली डिंपल यादव साल 2009 में एक सीरियस कैंडिडेट के तौर पर नहीं स्वीकारी गईं थीं. और फिरोजाबाद में हुए उप चुनाव में मौजूदा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर से हार गईं थीं. और जब 2012 में चुनाव हुए तो उन्होंने जीत दर्ज की. सबसे ज्यादा मजबूती से तब उभरी जब उन्होंने मोदी लहर में कन्नौज से साल 2014 में जीत दर्ज की और एमपी बन गईं.
शुरुआत में डिंपल यादव पार्टी की अंदरूनी गतिविधियों से दूर ही रहती थीं. लेकिन अब पार्टी के लोग डिंपल को एक स्टार प्रचारक के तौर पर मैदान में उतारना चाहते हैं. अगर डिंपल और प्रियंका एक साथ मंच साझा करती हैं तो यकीनन ये यूपी में नई सियासत जन्म लेने वाली बात होगी. दोनों की छवि लोगों को लुभाने की कुव्वत इसलिए रखती है, क्योंकि बार बार प्रियंका गांधी को ज़िम्मेदारी दिए जाने के नारे बुलंद होते रहे हैं. और सपा कार्यकर्ता भी 'विकास की चाबी, डिंपल भाभी' का नारा लगाते रहे हैं. डिंपल यादव ने साल 2014 में जब लोकसभा में नारी सशक्तिकरण पर बोला तो सभी का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया था. उनकी महिलाओं में अच्छी खासी पकड़ बन गई है, क्योंकि वो लगातार महिलाओं के कार्यक्रमों में शिरकत करती रहती हैं. उनका ज्यादा फोकस वीमेन वेल्फेयर से जुड़े कार्यक्रमों पर रहता है. अखिलेश की इमेज को चमकाने के लिए वो सोशल मीडिया खुद देखती हैं.
'ये अच्छा बदलाव है'
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मेहनगर (आज़मगढ़) से सपा विधायक बृजलाल सोनकर कहते हैं, 'हम दोनों को इ साथ देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं. डिंपल अपने व्यवहार और रहन सहन से ग्रामीण और शहरी दोनों जगह की औरतों को आकर्षित करती हैं. वह ट्रेडिशनल वैल्यू को बनाए रखती हैं, और औरतों से जुड़े मसलों को संसद में उठाती हैं.'
सोनकर पुरुषत्व प्रभाव की बात को स्वीकार करते हुए कहते हैं, 'ये अच्छा बदलाव है. मैं 65 साल का हूं और मैं अपनी बेटी और पोते के लिए अपनी जगह छोड़ने के लिए तैयार हूं कि वो ज़िम्मेदारी उठाएं. डिंपल इसके लिए सक्षम हैं. वो पार्टी के लिए वोटर को आकर्षित कर सकती हैं. हमारी मां या दादी इस तरह की भूमिका निभाने के बारे में सोचा भी नहीं होगा. लेकिन अब वक्त बदल रहा है.'
अखिलेश यादव पाले में रहने वाले एमएलसी उदयवीर सिंह कहते हैं 'ये बहुत अहम चुनाव हैं और डिंपल यादव सीएम अखिलेश के लिए एक बेहतर सहयोगी साबित होंगी. दोनों की एक आइडियल जोड़ी है. जिनके साथ न कोई विवाद जुड़ा है और न कोई पर्सनल इगो है. हम उन्हें चुनाव में ज्यादा से ज्यादा देखना चाहते हैं. दूसरी तरफ प्रियंका गांधी हैं. कांग्रेस के अकेले चुनाव लडऩे की बजाए अखिलेश की अगुवाई में सपा से गठबंधन करने की बात प्रियंका के ही दिमाग की उपज बताई जा रही है. प्रियंका के इशारे पर ही पार्टी के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पिछले दिनों अखिलेश, शिवपाल और मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की थी. अभी तक प्रियंका गांधी फैमिली के लिए प्रचार करती रही हैं. अमेठी और रायबरेली के बाहर भी राजनीति में उतरने की मांग लगातार हो रही है. https://www.youtube.com/watch?v=-SNYbzFvWdQ https://www.youtube.com/watch?v=-G_2LRUDCGM