____________________________________________________________जो पुल बनाएंगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएंगे। सेनाएं हो जाएंगी पार मारे जाएंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएंगे - अज्ञेय
सबसे पहले 3 पॉइंट में वोटर के मन की बात :
1. सहारनपुर में दुकान पर ऐसे पोस्टर चस्पा हैं कि वोटिंग के बाद दो दिन उंगली पर स्याही दिखाइए और 5% की छूट पाइए. (वोटर जागरूकता)
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2. उत्तर प्रदेश की पहली विधानसभा बेहट (जिला सहारनपुर) के दो गांवों ने वोट डालने से इनकार कर दिया है. (वोटर की अतिजागरूकता)
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3. सहारनपुर में एक ही जगह पर कई सालों से तंबू लगाकर रह रहे ‘शाही दवाखाना’ चलाने वालों का वोटरकार्ड नहीं बन रहा. (वोटर बनने का संघर्ष)
अब थोड़ा बड़ा विस्तार में
यूपी की विधानसभा नंबर एक (यहां एक का मतलब अव्वल कतई नहीं है) बेहट. तीन राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा) की सीमा से लगता इलाका. यहां के लगभग मिले हुए दो गांव हुसैन मलकपुर और शाह मलकपुर ने चुनावों का बहिष्कार किया है. करीब 10 हजार की आबादी वाले इन गांवों ने एक पुल न बनने की वजह से ऐसा किया है. क्या पुल न बनने के लिए जिम्मेदार लोगों ने अज्ञेय की कविता पढ़ी होगी?
हम बेहट से हुसैन मलकपुर और शाह मलकपुर की तरफ मुड़ते कि पूरा रास्ता रोके एक ट्रक अड़ा खड़ा था. कुछ पुलिसवाले खड़े थे. ट्रक पर अवैध खनन का बालू लदा था. पकड़े जाने पर ट्रक ड्राइवर उसे वैसे ही छोड़कर भाग गया था. एक-दो लोगों ने तरह-तरह की चाभियां इधर-उधर से लाकर ट्रक में लगाईं और कुछ प्रयोग किए. ट्रक ने किसी तरह पीछे-आगे होकर रास्ता दे दिया.












