मैं कन्हैया कुमार का समर्थक हूं. मैंने अपनी पार्टी में भी इस बात को कहा कि आरजेडी ने बहुत बड़ी गलती की है. मैंने कोशिश की बात करने की. ये सीट सीपीआई को देनी चाहिए. मुझे इस बात की खुशी है कि 8 और 9 को वो (कन्हैया) प्रचार करने भोपाल आ रहा है.
बिहार की सबसे बड़ी पार्टी होते हुए भी राजद इस बार के लोकसभा चुनाव में सबसे कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है. बेगूसराय ऐसा जिला है जहां महागठबंधन के 7 में से 5 विधायक हैं. पूरे भारत में बहुत कम सीटें मिलेंगी जहां मुसलमान भाइयों को रिप्रजेंट किया जा रहा है. पूरे हिन्दुस्तान में बिहार में मुसलमानों को सबसे ज्यादा टिकट दिया जा रहा है. और टिकट देने वाली पार्टी है आरजेडी. हमें हार जीत का फर्क नहीं है. लेकिन सीपीआई, एक जाति और एक जिले की पार्टी बनकर रह गई है. जबकि सीपीआई एम सभी जाति, सभी धर्मों को साथ लेकर चलती है. उनका हर जगह बेस हैं. हमने कई पार्टियों को एकोमोडेट किया. उन्हें सीटें दीं. कई लोग कहते हैं कि आपने बहुत ज्यादा सीटें दे दीं. पिछली बार 2014 में तनवीर हसन मोदी लहर में भी सिर्फ 30-40 हजार वोटों से हारे थे. इतने कम वोटों से हारना कोई मायने नहीं रखता. जो व्यक्ति दूसरे स्थान पर रहा हो, चंद वोटों से हारा हो. जहां से मुसलमानों के प्रतिनिधित्व की बात आएगी तो हम उन्हें टिकट देंगे.हालांकि तेजस्वी यादव ने कहा था कि कन्हैया कुमार से उनकी मुलाकात गया में हुई थी. उसके बाद मुलाकात नहीं हुई. उन्होंने बताया कि बीजेपी के गिरिराज सिंह को हराने में महागठबंधन सक्षम है. और हम जीतेंगे. अब ऐसे में दिग्विजय सिंह का कन्हैया कुमार के लिए बैटिंग करना और खुद को उनका समर्थक महागठंबधन में दरार पैदा कर सकता है.
राहुल गांधी के रावलपिंडी से नामांकन और कन्हैया कुमार पर गिरिराज सिंह के जवाब










