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घोषणापत्र में ईसाई और पारसी को भूली बीजेपी, फिर ईसाई जोड़ा पारसी रह गया

बीजेपी के मेनिफेस्टो में क्यों निकल रही हैं इतनी गलतियां?

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भारतीय जनता पार्टी ने 8 अप्रैल को अपना मेनिफेस्टो जारी किया था.
2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र 8 अप्रैल को जारी कर दिया. इस संकल्प पत्र में एक बार फिर सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल की बात कही गई है. मेनिफेस्टो में कहा गया है - हम पड़ोसी देशों से प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम पूर्वोत्तर राज्यों से उन सभी वर्गों के लिए मुद्दे को स्पष्ट करने के लिए सभी प्रयास करेंगे, जिन्होंने कानून के बारे में आशंका व्यक्त की है. हम पूर्वोत्तर के लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं. बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टो में लिखा है,
भारत के पड़ोसी देशों से आए सभी हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिख को उन देशों में धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर भारत में नागरिकता दी जाएगी.
Citizenship Amendment Bill english old Citizenship Amendment Bill hindi बीजेपी के घोषणापत्र में यहीं गलती हो गई. ईसाई और पारसी को इसमें शामिल नहीं किया गया. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने मेनिफेस्टो की इस गलती की ओर ध्यान दिलाया. उसके बाद बीजेपी की साइट पर जो मेनिफेस्टो मौजूद है, उसमें ईसाई जोड़ दिया गया, लेकिन पारसी अब भी गायब है. new citizenship bill new Citizenship Amendment Bill hindi new मेनिफेस्टो कमेटी के मेंबर और बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी भूपेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,
यह त्रुटि है. अल्पसंख्यकों को लेकर पार्टी की पॉलिसी में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है. नागरिकता संशोधन विधेयक में कोई बदलाव नहीं किया गया है. लिस्ट में ईसाई को जोड़ने के निर्देश दे दिए गए हैं.
बीजेपी मेनिफेस्टो कमेटी की एक सदस्य और सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा,
ईसाई और पारसी की पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में आबादी बहुत कम है. लेकिन नागरिकता संसोधन विधेयक में भारत से ताल्लुक रखने वाले सभी अल्पसंख्यकों को शामिल किया गया है. बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों देश एक विशेष धर्म के नाम पर बने थे. शुरू में दोनों देशों ने पॉलिसी लेवल पर धर्मनिरपेक्षता को अपनाया. लेकिन कुछ समय बीतने के बाद ही वहां पर अल्पसंख्यकों पर जुल्म किया जाने लगा. इन दोनों देशों में रह रहे अल्पसंख्यक खुद अपने अत्याचार की कहानी बताते हैं.
मीनाक्षी लेखी ने आगे कहा,
भारत के अलावा और देशों ने इन देशों के हिन्दू रिफ्यूजी को अपने यहां शरण दी है, इसका कोई डेटा नहीं है. भारत इनका पिता तुल्य देश है. यह हमारी ड्यूटी है कि इन देशों में रह रहे अल्पसंख्यकों (हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख) को अपने यहां शरण दें. जहां तक धार्मिक अत्याचार का सामने कर रहे ईसाइयों की बात है तो कई देश उन्हें अपने यहां शरण दे रहे हैं. उदाहरण के लिए पाकिस्तानी ईसाई महिलाओं को कनाडा अपने यहां शरण दे रहा है.
क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक बीजेपी ने 2014 के अपने घोषणा पत्र में नागरिकता संशोधन को लेकर कानून बनाने की बात कही थी. नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में लाया गया था, लेकिन पास नहीं हो सका. नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के बाद अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे लोगों को 12 साल की बजाय भारत में छह साल रहने के बाद ही नागरिकता देने का प्रावधान है. ऐसे लोगों के पास कोई उचित दस्तावेज नहीं होने पर भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी. अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग अल्पसंख्यक हैं. नागरिकता विधेयक में संशोधन के बाद धार्मिक अत्याचार की वजह से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान दी जा सकेगी.
BJP के घोषणापत्र और राहुल की तस्वीर इस वजह से ट्रोल हो गई

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