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नोटबंदी के बाद अलग तरह से अपना जन्मदिन मना रही हैं मायावती

नोटों की माला नहीं तो फिर इस बार क्या है, जानिए

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फोटो - thelallantop
आज मायावती का बर्थडे है. आम तौर पर अपने जन्मदिन पर नोटो की माला में लिपटी नज़र आने वाली मायावती. बड्डे पर नोटों की माला खूब चर्चा में रही है. लेकिन आज एक किताब के साथ दिख रही हैं. ‘ब्लू बुक’ नाम की किताब में मायावती के सियासी संघर्षों की दास्तान है.
यूपी की सियासत में ये चुनाव मायावती के लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है. माना जा रहा है कि पुराने ढर्रे पर पार्टी मैनेजमेंट करने वाली मायावती को नोटबंदी के चलते खासी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा. बसपा के ज़्यादातर वोटर्स और पार्टी कार्यकर्ता उस पृष्ठभूमि से आते हैं जहां डिजिटल साक्षरता काफी कम है. 2014 में एक भी सीट न मिलने के कारण पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग का तोड़ निकाल लेने की बात भी हो रही है. इस बार मायावती का दांव अपने परंपरागत वोटर्स के साथ मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ना है. इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलेगी ये तो वक्त ही बताएगा. मगर बिना किसी पृष्ठभूमि के हिंदुस्तान की सियासत में खुद को फिनोमिना बना लेना निश्चित रूप से बहनजी की बड़ी सफलता है. साथ ही उन्हें इस बात का श्रेय भी मिलना चाहिए कि जबरन ही सही, मगर उन्होंने सावित्री बाई फुले और ज्योतिबा फुले जैसे नामों को हिंदुस्तान के समाज में स्वीकृति दिलवाई.
नीचे दी गई तस्वीरों में आप उनके सियासी सफर का मजमून भांप सकते हैं.
बचपन के दिन
बचपन के दिन

शुरुआत में मायावती और कांसीराम ने सायकिल पर लंबी यात्राएं की हैं
शुरुआत में मायावती और कांसीराम ने सायकिल पर लंबी यात्राएं की हैं

 
शुरुआती दिनों में भव्यता से दूर मायावती की रैली.
शुरुआती दिनों में भव्यता से दूर मायावती की रैली.

 
सत्ता के शिखर पर बहनजी
सत्ता के शिखर पर बहनजी

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