हंसराज अहीर ने खुद बताया है कि उनकी आमदनी का स्रोत उनकी सैलरी और खेती है.आजतक की रिपोर्टर विद्या और राजुरकर की रिपोर्ट बताती है कि और किसानों का तो पता नहीं, लेकिन किसान सांसद हंसराज अहीर की आमदनी में 2014 की तुलना में गिरावट आई है. हंसराज अहीर ने 2014 में जब नामांकन किया था तो एक एफिडेविट दिया था. इस एफिडेविट में इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की भी डिटेल थी. इसमें लिखा था कि उनकी आमदनी के दो स्रोत हैं. पहला है सांसद की महीने की तनख्वाह और दूसरी है खेती. दोनों को मिलाकर वित्त वर्ष 2012-13 की उनकी कुल आमदनी है - 5,75, 130 रुपये.

हंसराज अहीर ने 2019 लोकसभा के लिए भी नामांकन किया है. इस दौरान भी उन्होंने एफिडेविट दिया है और इस एफिडेविट में भी इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की डिटेल है. इसमें वित्त वर्ष 2018-19 की उनकी आमदनी है-5,05, 430 रुपये. यानी कि उनकी आमदनी में 69,700 रुपये की गिरावट आई है. मतलब ये कि पिछले पांच साल में उनकी आमदनी में 69,700 रुपये की कमी हुई है. खुद देखिए कैसे घटती-बढ़ती रही है हंसराज अहीर की आमदनी-

ये मंत्री हंसराज अहीर के एफिडेविट का हिस्सा है. इसमें उन्होंने अपने पांच साल की कमाई का ब्योरा दिया है. ये ब्योरा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दिया गया है.
हंसराज अहीर के परिवार की आमदनी क्या है?
हंसराज अहीर की पत्नी एक हाउस वाइफ हैं,, लिहाजा उनकी कोई आमदनी नहीं है. ऐसा खुद हंसराज अहीर ने एफिडेविट में बताया है. इसके अलावा उनका एक बेटा है श्यामलाल और बेटी है संजीवनी. इन दोनों की भी कोई आमदनी नहीं है. मतलब आमदनी में कमी सिर्फ और सिर्फ हंसराज अहीर की ही हुई है. इसके बारे में हंसराज अहीर का कहना है-
''मैं अपने खेत में हल्दी की खेती करता था. शायद मुझे वक्त न मिला हो या फिर मैंने खेती ही कम की हो, इसलिए आमदनी कम हुई है. मैं एक संयुक्त परिवार में रहता हूं, जिसमें मेरे अलावा मेरे भाई या बेटे खेती करते हैं.''

आमदनी कम होने की वजह के बारे में हंसराज अहीर ने खुद ही बता दिया है.
अपनी आमदनी घटने के बारे में हंसराज अहीर कहते हैं-
''लोग राजनीति करते हैं, ताकि उनकी आमदनी बढ़े, लेकिन मैंने ईमानदारी से काम किया है. मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है. मैं ये साबित कर दूंगा कि किसानों की आमदनी बढ़ रही है. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें धूल खा रही थीं. हमने उन्हें बाहर निकाला और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया. 2022 तक निश्चित तौर पर किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी. ''लेकिन सच ये है कि सांसद की तनख्वाह के अलावा खेती से आमदनी करने वाले हंसराज अहीर की आमदनी कम हुई है. तभी तो पहले शिवसेना और अब कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे सुरेश धानोरकर कहते हैं-
''बीजेपी किसानों की आमदनी बढ़ाने में फेल रही है. लोग तो इस बात को कहते रहे हैं, लेकिन अब तो बीजेपी के सांसद और मंत्री का एफिडेविट भी यही बात कह रहा है. उनकी खुद की आमदनी कम हो गई है, तो अब वो कैसे कहेंगे कि किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी.''खैर, चुनाव हैं. चुनाव में ऐसे बहुत से मुद्दे आएंगे. नेता एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाएंगे, छींटाकशी करेंगे और चुनाव खत्म होने तक एक दूसरे से गुत्थमगुत्था होते रहेंगे.
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