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राहुल के एक ऐलान से भाजपा ने अपनी स्टडी में माना 30 सीटों का नुकसान!

इस स्टडी ने भाजपा नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
न्याय योजना कांग्रेस के लिए गेमचेंजर हो न हो, भाजपा ने माना है कि इससे उसकी सिरदर्दी बढ़ गई है. इंडिया टुडे में श्वेता पुंज की रिपोर्ट
के मुताबिक बीजेपी ने कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना (NYAY) से कम से कम 30 सीटों का नुकसान माना है. ये बात भाजपा के एक इंटरनल ऐनालिसिस में सामने आई है. इस स्टडी ने भाजपा नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है. कांग्रेस ने न्याय स्कीम के तहत देश के 5 करोड़ गरीब परिवारों को 6,000 रुपए महीना देने का वादा किया है.
पार्टी का क्या अनुमान है? इंडिया टुडे के मुताबिक बालाकोट की एयर स्ट्राइक के बाद देश भर में राष्ट्रवाद उफान पर था. उस वक्त पार्टी को अनुमान था कि वो आसानी से 230 से 240 सीटें जीत जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को देश के चौकीदार के तौर पर पेश किया. पूरा देश एकजुट उनके पीछे नजर आ रहा था. मगर धीरे-धीरे राष्ट्रवाद की ये लहर कमजोर पड़ती दिख रही है. पार्टी को उम्मीद थी कि ये लहर इतनी जल्दी खत्म नहीं होगी. कम से कम वोटिंग के दौर तक रहेगी. मगर अब इसमें बदलाव नजर आ रहा है.
भाजपा राहुल गांधी की योजना का तोड़ निकालने का प्रयास कर रही है. सांकेतिक तस्वीर.
भाजपा राहुल गांधी की योजना का तोड़ निकालने का प्रयास कर रही है. सांकेतिक तस्वीर.

कांग्रेस की योजना ने क्यों बढ़ाई टेंशन? भाजपा के एक नेता ने बताया कि चुनाव प्रचार शुरू होने के कुछ वक्त बाद ही कांग्रेस पार्टी ने न्याय का ऐलान करके चुनाव की दिशा मोड़ने की कोशिश की है और इसमें वो कुछ कामयाब होती दिख रही है. साल के 72,000 मिलने के वादे से उसे फायदा हो सकता है. कांग्रेस के कार्यकर्ता लोगों को ये संदेश दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी गरीबों को साल के 6,000 दे रहे हैं. और सत्ता में आने के बाद राहुल 6,000 रुपये महीना देंगे. भाजपा के विश्लेषण में ये बात सामने आई है कि जिन राज्यों में ग्रामीण आबादी ज्यादा बेहाल है, वहां इसका ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. ऐसे राज्यों में छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर है. इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे सूबों में ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी की आमदनी घटी है. लोग गरीबी से परेशान हैं. हालात यूपी के भी बहुत अच्छे नहीं हैं. पर उत्तर प्रदेश इन दूसरे सूबों की तरह नहीं हैं. पार्टी का अनुमान है कि यूपी में वोटर जाति देखकर ज्यादा वोट देता है. ऐसे में उसे वहां की ज्यादा चिंता नहीं है. मगर बाकी सूबों में ऐसा नहीं होता. इसलिए भाजपा के कई नेता टेंशन में हैं.
कैसे समर्थन मिलता रहा है भाजपा को? इन राज्यों में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने करीब-करीब क्लीन स्वीप किया था. 2014 के चुनाव में यूपी में भाजपा ने 80 में से 71, राजस्थान की सभी 25, और झारखंड की 14 में से 12 सीटें झटक ली थीं. भाजपा ने मध्य प्रदेश की 29 में से 27 और छत्तीसगढ़ की सभी 11 सीटें हासिल कर ली थीं. भाजपा का ये विश्लेषण कहता है कि राहुल की इस योजना के बाद पार्टी के लिए ये प्रदर्शन दोहरा पाना काफी मुश्किल होगा. भाजपा के लिए इसकी काट निकालना जरूरी है. वैसे पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि भाजपा इसका तोड़ निकालने का प्रयास कर रही है. इस बात का ऐलान पार्टी के घोषणा पत्र में हो सकता है. घोषणा पत्र में देरी की एक ये वजह भी है. अभी तक पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी नहीं किया है. भाजपा के एक नेता के मुताबिक, 'ये तो वोटर्स को तय करना है. वो वोट किसे देना चाहते हैं, उनको, जिन्होंने उन्हें गैस सिलेंडर, शौचालय और घर दिए या फिर उन्हें जो 6,000 रुपए साल का देने का सिर्फ वादा कर रहे हैं.'


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