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नक्सली हमले में मारे गए BJP विधायक के परिवार ने जो किया, लोकतंत्र की ताकत वहीं से आती है

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा विधायक मारे गए थे नक्सली हमले में.

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छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में मारे गए भाजपा विधायक भीमा मंडावी का पूरा परिवार वोट डालने पहुंचा. तस्वीर, साभार प्रभात खबर.
बीजेपी के विधायक रहे भीमा मंडावी की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उनके पिता लिंगा मंडावी और पत्नी ओजस्वी परिवार के साथ मतदान केंद्र पहुंच गए. वोट डालने के लिए. या यूं कहें कि उन नक्सलियों को चुनौती देने के लिए जिन्होंने चंद घंटे पहले ही विस्फोट करके भीमा मंडावी और 5 पुलिसकर्मियों की जान ले ली थी. वोट डालने के लिए लाइन में खड़े पिता लिंगा मंडावी की आंखों में आंसू थे. ओजस्वी का गला रूंधा था. दोनों की हालत देखकर बाकी लोगों की भी आंखें भर आईं. मगर परिवार का हौसला देख कतार में खड़ा हर शख्स गमगीन था और हैरत में भी.
कुछ घंटे पहले ही हुआ था अंतिम संस्कार भीमा मंडावी छ्त्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से भाजपा के विधायक थे. 9 अप्रैल को नक्सलियों ने श्यामगिरी में आईईडी विस्फोट करके उनकी हत्या कर दी थी. 10 अप्रैल को शाम पांच बजे भीमा मंडावी का उनके पैतृक गांव गदापाल में अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह भी मौजूद थे. भीमा मंडावी की मौत के बाद से ही उनके गांव समेत आस-पास के कई गांवों में कई घरों में चूल्हे नहीं जले. 10 अप्रैल को पूरा दंतेवाड़ा बंद रहा. पूरे बस्तर लोकसभा क्षेत्र में हर कोई इस वारदात से सकते में दिखाई दिया. लोग अखबारों और टीवी चैनलों के साथ-साथ मोबाइल पर खबरें पढ़ते-देखते और नक्सलियों की निंदा करते रहे. इसकी एक वजह ये भी थी कि भीमा मंडावी इस इलाके में बेहद लोकप्रिय थे. बस्तर के 12 विधानसभा क्षेत्र में अकेले भीमा ही भाजपा से जीते थे.
भीमा मंडावी की अंतिम यात्रा. तस्वीर फेसबुक.
भीमा मंडावी की अंतिम यात्रा. तस्वीर फेसबुक.

...और सुबह परिवार वोट डालने पहुंच गया 10 अप्रैल को देर शाम विधायक का अंतिम संस्कार हुआ. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था. बावजूद इसके 11 अप्रैल के दिन पूरा परिवार वोट देने पहुंचा. लोकतंत्र को मजबूत करने निकले इस परिवार को कतार में खड़े जिस किसी ने भी देखा, उसकी आखें भर आईं. दिवंगत विधायक के पिता और पत्नी के साथ उनके परिवार के 5 सदस्य वोट डालने के लिए गदापाल गांव के पोलिंग बूथ पर पहुंचे. पूरा परिवार श्राद्धकर्म को बीच में रोककर वोट देने पहुंचा. वोट डालकर लौटने के बाद श्राद्ध का कार्यक्रम दोबारा शुरू किया गया. गदापाल में 1100 वोटर हैं. इनमें से 690 लोगों ने 11 अप्रैल को वोट डाले. नक्सलियों ने इलाके में मतदान के बहिष्कार की चेतावनी दी थी. पर गदापाल में बंपर वोटिंग हुई.
ये बड़ी बात है... एक स्थानीय पत्रकार ने बताया कि दंतेवाड़ा ने नक्सलियों को आईना दिखा दिया. श्यागिरि में जहां दंतेवाड़ा विधायक को विस्फोट से उड़ाया गया था, वहां भी जमकर वोटिंग हुई. श्यामगिरी पोलिंग बूथ पर महिलाएं अपने दुधमुहे बच्चों को गोद में लेकर कतार में नजर आईं. पूछने पर बताया कि वे करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंची हैं. युवा और बुजुर्गों ने भी जमकर वोटिंग की. और उम्मीद जताई कि वोट डालने से उनके गांव का भला होगा. भीमा मंडावी के गांव की तस्वीरें खास थीं. भीमा की पत्नी और उनके पिता ने सब कुछ खोकर भी बैलेट पर भरोसा जताया. ये बहुत बड़ी बात है.


वीडियोः  बस्तर में हुए नक्सली हमले में भाजपा विधायक भीमा मांडवी और 5 सुरक्षा कर्मियों की मौत |दी लल्लनटॉप शो| Episode 191

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