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बहरामपुर से कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी रुझानों में लगातार पीछे, पता है आगे कौन?

Adhir Ranjan Chowdhury Result 2026: ऐतिहासिक रूप से West Bengal की Baharampur सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है. 1951 के पहले चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की थी. हालांकि, समय के साथ यह सीट अलग-अलग दलों के बीच बदलती रही. अब इस पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला चल रहा है.

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कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी. (PTI)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के रुझान सामने आने लगे हैं. बहरामपुर सीट से एक अहम अपडेट मिल रहा है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के अनुसार, कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी इस सीट पर पीछे चल रहे हैं. शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा बढ़त बनाए हुए दिख रहे हैं. वो अधीर रंजन चौधरी से 5700 वोटों से आगे हैं. बहरामपुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नारु गोपाल मुखर्जी तीसरे नंबर पर हैं.

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बहरामपुर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में है. यह विधानसभा बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. अधीर रंजन चौधरी का इस क्षेत्र से पुराना राजनीतिक संबंध रहा है. वे 2019 में इसी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे, लेकिन 2024 के आम चुनाव में उन्हें तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

बहरामपुर विधानसभा: 2021 का नतीजा

अगर पिछले चुनावों की बात करें, तो 2021 का विधानसभा चुनाव इस सीट के लिए खास रहा. उस समय पहली बार यहां BJP ने जीत हासिल की थी. सुब्रत मैत्रा ने 89,340 वोट हासिल कर TMC के नारु गोपाल मुखर्जी को हराया था. कांग्रेस के उम्मीदवार और उस समय के विधायक मनोज चक्रवर्ती तीसरे स्थान पर रहे थे, जिससे इस सीट पर कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती दिखी.

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बहरामपुर विधानसभा: 2016 का रिजल्ट

2016 के चुनाव में तस्वीर बिल्कुल अलग थी. उस समय कांग्रेस के मनोज चक्रवर्ती ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी. उन्हें 69.20 फीसदी वोट शेयर के साथ 1,27,762 वोट मिले थे. उन्होंने TMC की डॉ. सुजाता बनर्जी को बड़े अंतर से हराया था, जिन्हें 35,489 वोट मिले थे. BJP उम्मीदवार माला बनर्जी को उस चुनाव में केवल 18,805 वोट ही मिल सके थे.

कभी कांग्रेस का मजबूत किला था

ऐतिहासिक रूप से बहरामपुर सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है. 1951 के पहले चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत हासिल की थी. हालांकि, समय के साथ यह सीट अलग-अलग दलों के बीच बदलती रही. 1962 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने यहां जीत दर्ज की थी.

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बाद के सालों में कांग्रेस, CPI और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के बीच यह सीट घूमती रही. 2006 में मनोज चक्रवर्ती ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी और बाद में 2011 और 2016 में कांग्रेस के टिकट पर इस सीट को बरकरार रखा.

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