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LIC के शेयरों में गिरावट, OFS में खरीदारी का मौका कब तक? जान लें सारी डिटेल

LIC Shares: भारत की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी के शेयर सस्ते में खरीदने का सुनहरा मौका है. ऑफर फॉर सेल (OFS) 5 अगस्त को रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए खोल दिया गया है. जानें सारी डिटेल...

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भारत में एलआईसी के 30 करोड़ से ज्यादा पॉलिसीधारक हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने 5 अगस्त से खुदरा निवेशकों के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है, जिसमें सरकार अपनी हिस्सेदारी 2.5% से अधिक बेच रही है।
  • सरकार को सेबी के सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों का पालन करते हुए और चालू वित्त वर्ष में 80 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए LIC में अपनी हिस्सेदारी घटानी आवश्यक है।
  • इस OFS से खुदरा निवेशकों को न्यूनतम 372 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर LIC के शेयर खरीदने का मौका मिलेगा, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों को लाभ होने की संभावना है।

भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ऑफर फॉर सेल (OFS) 5 अगस्त को रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए खुल गया है. बीमा कंपनी के शेयरों में आई भारी गिरावट के चलते निवेशकों के लिए सुनहरा मौका है. जानिए ताजा ऑफर क्या है आपको कितने कम में शेयर मिल सकते हैं और बाकी सारी काम की डिटेल.

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क्या होता है OFS? 

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि OFS का फुल फॉर्म ऑफर फॉर सेल होता है. इसमें कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों को बेचते हैं. ओएफएस के जरिये मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी घटाते हैं. एलआईसी सरकारी बीमा कंपनी है . ऐसे में यहां सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही है. 

सरकार क्यों बेच रही हिस्सेदारी ?

मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार ने हिस्सेदारी बेचने की पीछे वजह सेबी की सार्वजनिक शेयरधारिता नियम को बताया है . साथ ही विनिवेश लक्ष्य को हासिल करना है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये 80 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है.

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 LIC ने 4 अगस्त को घोषणा की थी कि सरकार कंपनी में 2.5% शेयरों की हिस्सेदारी बेस ऑफर के रूप में बेचेगी. साथ ही 4% हिस्सेदारी ग्रीन शू विकल्प के रूप में उपलब्ध होगी.  ग्रीन शू विकल्प में जरूरत पड़ने पर ज्यादा हिस्सेदारी बेचने का फैसला होता है. मतलब सरकार अभी 2.5 परसेंट शेयर तो OFS के जरिये बेच ही रही है. अगर जरूरत पड़ी तो 4 परसेंट और बेच सकती है. 

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किस भाव पर मिल रहे शेयर?

इस ओएफएस का फ्लोर प्राइस (न्यूनतम मूल्य)  382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है. न्यूनतम मूल्य का मतलब NSE पर शेयर के पिछले बंद भाव 391.3 रुपये प्रति शेयर से 3% की छूट है. गैर खुदरा निवेशकों के लिए OFS मंगलवार 4 अगस्त अगस्त को खुला और इसमें भारी भागीदारी देखी गई. जितने शेयर बेचने के लिए रखे गए थे उस रकम से तीन गुना से अधिक शेयरों की मांग हुई. 

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अब यह आज यानी 5 अगस्त को खुदरा निवेशकों के लिए खुला है.  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बाजार के जानकार रिटेल इन्वेस्टर्स को इसमें पैसे लगाने की सलाह दे रहे हैं. 

- निवेशक सुबह 9.15 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक देश के दोनों प्रमुख शेयर बाजार मसलन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बांबे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर अलग-अलग OFS विंडो के  से खरीद सकते हैं. 

-ऑफर की कुल राशि का न्यूनतम 10% खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व रखी गई है. खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों के लिए कट-ऑफ मूल्य पर प्रति शेयर 10 रुपये की छूट निर्धारित की गई है.

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क्या आपको LIC के OFS में पैसा लगाना चाहिए?

ब्रोकरेज फर्म रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने ईटी से बातचीत में बताया कि 372 रुपये प्रति शेयर के प्रभावी खुदरा कीमत (10 रुपये प्रति शेयर की खुदरा छूट के बाद) पर उपलब्ध है. यह शेयर बाजार में लिस्टेड प्राइवेट बीमा कंपनियों की तुलना में काफी कम है, जिनका पी/ईवी अनुपात काफी ज्यादा है. उन्होंने यह भी बताया कि एलआईसी ने अपने फंडामेंटल्स को काफी मजबूत किया है.

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि एलआईसी में पैसा लगाने वाले उन निवेशकों को इसमें फायदा मिल सकता है जो लंबी अवधि के लिए इसमें निवेश करेंगे.  चॉइस ब्रोकिंग की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मीना गुप्ता इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहती हैं कि OFS उन निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प है, जो फौरी लाभ के बजाय लंबी अवधि का नजरिया अपनाना चाहिए. 

सरकार की एलआईसी में कितनी हिस्सेदारी ?

कंपनी के शेयरधारिता पैटर्न से जुड़े ताजा आंकड़ों के मुताबिक 30 जून, 2026 तक सरकार के पास एलआईसी की 96.5% हिस्सेदारी थी. इससे एलआईसी सरकार के स्वामित्व वाली सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में से एक बन गई है . 

इसके साथ ही न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से जुड़े सेबी का नियमों का पालन करने के लिए सरकार को अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम करनी होगी. वहीं, 20.92 लाख से अधिक खुदरा शेयरधारकों के पास इस बीमा कंपनी में 1.55% हिस्सेदारी है.

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