अबू धाबी भारत पर बड़ा दांव लगा रहा है. अबू धाबी के कुछ सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स ने भारत में अपना निवेश बढ़ाया है. इसमें अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), मुबाडाला इन्वेस्टमेंट कंपनी और ADQ वगैरह शामिल हैं. सॉवरेन फंड किसी देश की सरकार के निवेश फंड होते हैं. ये अपनी कमाई को अलग-अलग देशों में निवेश करते हैं.
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अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी समेत वहां के बड़े सॉवरेन फंड्स भारत में खूब पैसा लगा रहे है. इससे रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए कई सेक्टर्स में निवेश के मौके बन रहे हैं. पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारियां काफी मजबूत हुई हैं.

एनडीटीवी प्रॉफिट में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि इन सॉवरेन वेल्थ फंड्स ने भारत के बैंकों, एयरपोर्ट्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ सेक्टर, रिन्यूबल एनर्जी, बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मोटा निवेश किया है. खास बात ये है कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब दुनियाभर के मार्केट लगातार उतार-चढ़ाव झेल रहे हैं. जियो-पॉलिटिकल तनाव, ऊंची ब्याज दरों और धीमी आर्थिक रफ्तार से वैश्विक बाजार जूझ रहे हैं.
सॉवरेन फंड्स का निवेश भारत के लिए बड़ा मौकाअबू धाबी के ये सॉवरेन फंड विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के इनवेस्टमेंट से अलग हैं. आमतौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक किसी भी देश के शेयर बाजार की स्थिति देखकर पैसा लगाते और निकालते हैं.
वहीं, सॉवरेन वेल्थ फंड लंबी अवधि (दशकों) को ध्यान में रखकर निवेश करते हैं. यही कारण है कि मार्केट एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भारत में इन सॉवरेन फंड्स के बढ़ते भरोसे को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
एसेट मैनेजमेंट फर्म क्वेस्ट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में हेड (इक्विटी और पोर्टफोलियो मैनेजर) सौरभ पटवा भी इसे दोहराते हैं. उन्होंने कहा कि अबू धाबी ने भारत में लंबे समय के लिए निवेश किया है. यह इनवेस्टमेंट भारत के लिए काफी मायने रखता है. सौरभ पटवा आगे कहते हैं कि ग्लोबल मार्केट की तुलना में भारत के बाजार कहीं ज्यादा विकल्प देता है. जैसे कि कमोडिटीज या माइनिंग सेक्टर. इससे निवेशकों के लिए प्रॉफिट बनाने के ज्यादा अवसर और विकल्प होते हैं.
उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर बिजनेस जैसे सेक्टर लंबी अवधि के लिए निवेश के का बेहतरीन प्लेटफॉर्म हैं.
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पिछले कुछ साल में लगातार बढ़ा है इनवेस्टमेंटएटम इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के सीईओ भानु विट्टलम कहते हैं कि अबू धाबी के सॉवेरन वेल्थ फंड भारत में छोटे-मोटे निवेश तक सीमित नहीं है. पिछले पांच साल में, एडीआईए, मुबाडाला और एडीक्यू जैसे सॉवरेन फंड्स ने भारत के रिटेल, डिजिटल बिजनेस, रिन्यूबल एनर्जी ने इनवेस्टमेंट किया है. इसके अलावा, एयरपोर्ट्स, हेल्थकेयर, बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर्स में भारी निवेश किया है. साथ ही, आईएचसी और एमिरेट्स एनबीडी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के सरकारी फंड्स ने भी अरबों डॉलर इनवेस्ट किए हैं.
उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों के सॉवरेन फड्स ने कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान भारत में पहले ही 1.7 अरब डॉलर (16,250 करोड़ रुपये) का निवेश कर दिया है . यह पैसा पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान निवेश किए गए 6,694 करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है.
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खुदरा निवेशकों को क्या करना चाहिए?विशेषज्ञों का कहना है कि सॉवरेन वेल्थ फंड्स को स्टॉक टिप्स की तरह नहीं लेना चाहिए. क्वेस्ट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में हेड (इक्विटी और पोर्टफोलियो मैनेजर) सौरभ पटवा का कहना है कि सॉवरेन फंड का मकसद व्यक्तिगत निवेशकों से बहुत अलग होते हैं. ये लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं.
उन्होंने कहा कि रिटेल इन्वेस्टर्स को उन सेक्टर में आंख मूंदकर पैसा नहीं लगाना है जहां सॉवरेन फंड्स पैसा लगा रहे हैं. इसके बजाय निवेशकों को अपने पैसे को अलग-अलग सेक्टर में सोच-समझकर लगाना चाहिए.
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इसी तरह फिनटेक फर्म अलंकित लिमिटेड के एमडी अंकित अग्रवाल का कहना है कि अबू धाबी का भारत में बढ़ता निवेश किसी तात्कालिक मौके का फायदा उठाने के लिए नहीं है. यह भारत की आर्थिक तरक्की पर किसी देश का लंबे अवधि के भरोसे को दिखाता है. वे आगे कहते हैं कि सॉवरेन फंड्स का लगातार भारत में निवेश बढ़ने से शेयर बाजार में कैश बढ़ सकता है. निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है.
वे रिटेल निवेशकों को सलाह देते हैं कि जिस कंपनी में वे निवेश की सोच रहे हैं उस कंपनी की वित्तीय स्थिति, शेयर की कीमत, कंपनी की कमाई की संभावनाएं और कंपनी का मैनेजमेंट कितना भरोसेमंद है इन सब बातों की पड़ताल जरूरी है. उनका मानना है कि निवेश का फैसला सिर्फ यह देखकर नहीं करना चाहिए कि विदेशी निवेशक किस सेक्टर में पैसा लगा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर लंबी अवधि के निवेश के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. लेकिन वे निवेशकों को अच्छे से रिसर्च करके ही पैसा लगाने की सलाह देते हैं.
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