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वारिस को मृत पैरेंट्स के शेयर-म्यूचुअल फंड ट्रांसफर करना हुआ आसान, PAN और वसीयत जरूरी नहीं

सूचीबद्ध कंपनी के लिए फिजिकल होल्डिंग्स की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है. वहीं, डीमैट होल्डिंग्स मसलन शेयर, म्यूचुअल फंड, गोल्ड ईटीएफ वगैरा की लिमिट 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है.

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शेयर और म्यूचुअल फंड वगैरा के हस्तांतरण के दौरान पैन जमा करना जरूरी नहीं होगा (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • SEBI ने शेयर और म्यूचुअल फंड के ट्रांसफर नियमों में बदलाव करते हुए 10,000 रुपये तक के क्लेम के लिए कम दस्तावेज़ीकरण और वसीयतों के प्रोबेट को अनिवार्य नहीं बनाया है।
  • इन बदलावों का कारण वसीयत के प्रोबेट में होने वाली देरी, कागजी कार्रवाई की जटिलता और निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना है ताकि कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं कम हो सकें।
  • नए नियमों के तहत पैन जमा करने की आवश्यकता हटाने और क्लेम राशि सीमा बढ़ाने से कानूनी वारिसों को नुकसान कम होगा तथा शेयर और फंड के हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक त्वरित एवं आसान होगी।

शेयर मार्केट रेगुलेटर SEBI ने सिक्योरिटीज (शेयर और म्युचअल फंड्स वगैरा) के ट्रांसफर से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इससे कानूनी वारिसों के लिए अपने मृत माता-पिता या सगे-संबधियों के शेयर, म्यूचुअल फंड का क्लेम करना आसान हो जाएगा. 

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बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक 19 जून की बोर्ड बैठक में स्वीकृत किए गए इन बदलावों का मकसद कागजी कार्रवाई को कम करना, पैसे बचाना और किसी तरह की रुकावट को कम करना है. नए ढांचे के तहत 10,000 रुपये तक की रकम और शेयर, म्यूचुअल फंड के लिए 30 हजार तक के क्लेम को कम से कम डॉक्यूमेंट्स के साथ प्रोसेस किया जा सकता है.

सूचीबद्ध कंपनी के लिए फिजिकल होल्डिंग्स की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है. वहीं, डीमैट होल्डिंग्स मसलन शेयर, म्यूचुअल फंड, गोल्ड ईटीएफ वगैरा की लिमिट 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है.

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अब पैन की भी जरूरत नहीं है

SEBI ने एक और राहत देते हुए शेयर और म्यूचुअल फंड वगैरा के हस्तांतरण के दौरान पैन (PAN) जमा करने की जरूरत को हटा दिया है. नियामक ने कहा कि डीमैट खाते खोलते समय पैन डिटेल पहले से ही उपलब्ध होते हैं, इसलिए अतिरिक्त जानकारी जमा करना गैर जरूरी है.  

शायद सबसे जरूरी बदलाव वसीयतों के प्रोबेट की अनिवार्यता को खत्म करना है. प्रोबेट कोर्ट की तरफ से जारी किया गया एक कानूनी प्रमाणपत्र है. इससे वसीयत असली और वैध है कि नहीं इस बात का पता चलता है. यह फैसला उत्तराधिकार कानूनों में हाल ही में किए गए संशोधनों के अनुरूप है. इससे लोगों का न सिर्फ समय बचेगा बल्कि कानूनी पचड़ों से भी छुटकारा मिल सकता है. आमतौर पर वसीयत (Will) की कानूनी कार्यवाही में अक्सर कई महीने लग जाते हैं और वारिस महीनों कोर्ट के चक्कर काटते हैं.

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कागजी कार्रवाई आसान हुई

SEBI ने डॉक्यूमेंटेशन से संबंधित कई बदलाव भी किए हैं. अभी की तरह अलग-अलग शपथपत्र और नॉन ऑब्जेशन सर्टिफिकेट (NOC) की जगह पर अब कंबाइंड एफिडेबिट -कम -एनओसी (combined affidavit-cum-NOC) का इस्तेमाल किया जाएगा. मृत्यु प्रमाण पत्रों की मूल या सत्यापित प्रतियों के अलावा, क्यूआर कोड वाली प्रतियां भी अब स्वीकार की जाएंगी. इससे सत्यापन आसान हो जाएगा. 

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