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होर्मुज खुलने से कच्चे तेल की कीमतें गिरेंगी, भारत में पेट्रोल-डीजल कब सस्ते होंगे?

भारत विदेशों से कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाता है. चूंकि, भारत विदेशों से करीब 85 पर्सेंट कच्चा तेल खरीदता है. ऐसे में होर्मुज में किसी भी प्रकार की रुकावट देश के आयात बिल को बढ़ा सकती है. रुपये को कमजोर कर सकती है. महंगाई बढ़ा सकती है.

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कच्चे तेल के दाम करीब 4 % गिरे हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने बाद समझौता होने की संभावना है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री रास्ता फिर से खुल सकता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है।
  • होर्मुज रास्ता फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है, और भारत अपनी अधिकांश कच्ची तेल की जरूरतें इसी रास्ते से पूरी करता है।
  • रास्ता खुलने से तेल सप्लाई में सुधार होगा जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा, लेकिन पेट्रोल-डीजल कीमतों में तत्काल पर्याप्त कटौती की संभावना कम है।

करीब 4 महीने बाद अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने वाला है. इसके बाद माना जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल सकता है. इस रूट के खुलने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने लगी है. लेकिन भारतीयों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे पेट्रोल, डीजल और LPG सिलेंडर सस्ते होंगे. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में इन सवालों के जबाव तलाशने की कोशिश की गई है.

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भारत के लिए होर्मुज क्यों मायने रखता है?

होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है. यह भारत ही नहीं कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत मायने रखता है. दुनिया का करीब 20 पर्सेंट तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं.

भारत विदेशों से कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से मंगाता है. चूंकि, भारत विदेशों से करीब 85 पर्सेंट कच्चा तेल खरीदता है. ऐसे में होर्मुज में किसी भी प्रकार की रुकावट देश के आयात बिल को बढ़ा सकती है. रुपये को कमजोर कर सकती है. महंगाई बढ़ा सकती है.

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अगर ये रास्ता फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की सप्लाई फिर से पटरी पर लौटेगी और तेल के दाम काबू में रहेंगे. कच्चे तेल के दाम कम होने से भारत को काफी फायदा होगा क्योंकि उसे सामान खरीदने के लिए पहले के मुकाबले कम पैसे खर्च करने होंगे. इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होगा.

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क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें गिरेंगी?

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि आपके आस-पड़ोस वाले पेट्रोल पंपों पर कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी. इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने इंडिया टुडे से कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ठीकठाक कटौती तभी होने की संभावना है, जब कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहें. 15 जून, 2026 को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 83-84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था.

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मनोरंजन शर्मा ने आगे कहा कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) अभी अपने पुराने घाटे की भरपाई कर रही हैं. काफी समय तक इन कंपनियों ने तेल के दाम नहीं बढ़ाए थे, जबकि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम काफी उछल गए थे. उन्होंने कहा, "ईंधन की रिटेल कीमतों में पर्याप्त कटौती के लिए कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक कम बने रहने की जरूरत है."

मनोरंजन शर्मा का कहना है कि अगर हाल-फिलहाल कच्चे तेल के दाम नीचे आते हैं तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 2-4 रुपये प्रति लीटर तक की सीमित कटौती हो सकती है. हाल मेंपेट्रोल और डीजल के दाम करीब 8 रुपये प्रति लीटर बढ़े हैं.

क्या LPG सिलेंडर की कीमत गिरेगी?

पेट्रोल और डीजल की तरह LPG के दामों में भी मामूली कमी होने की उम्मीद है. इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा कि सरकार ने समय-समय पर LPG की कीमतों में कटौती की है और सब्सिडी के जरिये परिवारों को पहले ही आर्थिक मदद दे रही है. इसके तहत प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 200 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शामिल है. सरकार हर साल पात्र परिवारों को कुछ घरेलू सिलेंडरों के लिए सब्सिडी देती है.

मनोरंजन शर्मा ने कहा, “LPG की कीमतों में किसी भी तरह की कटौती इस बात पर निर्भर होगी कि इंटरनेशनल मार्केट में गैस के दाम कैसे रहते हैं, साथ ही केंद्र सरकार किसे इस छूट का लाभ देना चाहती है. अगर दुनिया में LPG और कच्चे तेल की कीमतें कम बनी रहती हैं, तो सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम हो सकता है.”

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रुपये और शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के शेयर बाजारों और रुपये को भी फायदा हो सकता है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत से बड़ी तादाद में विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला है. मनोरंजन शर्मा के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की तरफ से 2 लाख करोड़ से ज्यादा की निकालने से रुपया कमजोर हुआ है.

होर्मुज का फिर से खुलना और अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का कम होना भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. खासकर इसलिए क्योंकि इससे तेल की सप्लाई को लेकर जारी दिक्कतें कम होंगी. लेकिन आम लोगों को पेट्रोल-डीजल में तत्काल या भारी कमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

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