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शेयर मार्केट का इतना बुरा हाल क्यों हुआ? 6 लाख करोड़ डूबने की वजह जान लीजिए

Stock Market Crash: शेयर बाजार फिर क्रैश हो गया, Sensex में 900 अंकों की गिरावट आई. Nifty का भी हाल बुरा है. पांच कारणों से लगातार 5वें दिन बाजार को झटका लगा है.

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सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 900 अंक लुढ़क गया (फोटो क्रेडिट: AI/Business Today)

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  • भारतीय शेयर बाजार में 24 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी 50 सूचकांक में क्रमशः 900 से अधिक अंक और 260 अंक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे भारी बिकवाली का माहौल बना।
  • शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि तथा अमेरिकी टैरिफ नीतियां प्रमुख कारण हैं।
  • फिर से जारी अमेरिकी टैरिफ हमलों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के कारण भारतीय बाजारों में दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुक्सान हुआ।

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 24 जुलाई को सुबह के कारोबार में भारी बिकवाली देखी गई. सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में 1% से अधिक की गिरावट आई. आज शुरुआती कारोबार में 900 से अधिक अंकों की गिरावट आई. कारोबार के दौरान यह 75,474 के निचले स्तर पर पहुंच गया. इसी तरह से एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक 260 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ दिन के निचले स्तर 23,606 पर पहुंच गया.

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बाजार में भारी गिरावट क्यों? 

मिंट की एक खबर में भारत के शेयर बाजारों में आज आई भारी गिरावट के 4-5 बड़े कारण बताए गए हैं. आइए जानते हैं .

1-कच्चा तेल उबला

शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह कच्चे तेल में आई जोरदार तेजी है. कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का सितंबर वायदा भाव 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया. ब्रेंट क्रूड जुलाई की शुरुआत से अब तक लगभग 40% ऊपर चढ़ चुका है.

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2-अमेरिका-ईरान में फिर से माहौल गरमाया

शेयर बाजार में चिंता का माहौल है क्योंकि अमेरिका-ईरान संघर्ष के खत्म होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक नया बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं.

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3. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हो रही है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से भारी मात्रा में विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने का खतरा बढ़ रहा है. बेंचमार्क अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड इस महीने अब तक 6.5% बढ़कर 4.711% हो गई है.

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जब अमेरिकी बॉन्ड पर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों के शेयरों से धन निकालकर अपने देश में सुरक्षित साधनों में निवेश करने लगते हैं.

4-ट्रंप का व्यापार युद्ध फिर से शुरू

व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ संबंधी हमला फिर से शुरू हो गया है. पिछले दो हफ्तों में, अमेरिकी प्रशासन ने ब्राजील पर 25%, कनाडा पर 50% और जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ की घोषणा की है.  गुरुवार को, 60 व्यापारिक साझेदारों पर 10% से 12.5% ​​तक टैरिफ की घोषणा की है. अमेरिका ने धारा 301 के तहत कई देशों पर 10% और 12.5% ​​की नई टैरिफ दरों की घोषणा की है . इसमें भारत को कम 10% श्रेणी में रखा गया है.

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5-विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे 

मनीकंट्रोल में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार 23 जुलाई को 2,999.23 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. एफआईआई द्वारा लगातार बिकवाली से घरेलू शेयरों पर दबाव पड़ता है. बाजार की भावना कमजोर होती है और बेंचमार्क सूचकांकों पर दबाव बढ़ता है. 

निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये साफ!

शुक्रवार को शेयर बाजार में आई गिरावट की आंधी से शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. मिंट की रिपोर्ट बताती है कि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग 477 लाख करोड़ रुपये से घटकर 471 लाख करोड़ रुपये हो गया.

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