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सिगरेट पीकर बीमार होने से पहले सरकार ने आपको कंगाल करने की तैयारी कर ली है

सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक तो है ही अब यह पीने वालों के फेफड़ों के साथ साथ उनकी कमाई को भी तेजी से निगलने वाली है. कहा जा रहा है कि जो सिगरेट आज 18 रुपये में बिक रही है वह जल्द ही 70-72 रुपये तक मिलेगी.

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अभी जो एक सिगरेट 18 रुपये में मिलती है उस सिगरेट की कीमत जल्द ही 72 रुपये तक पहुंच सकती है (फोटो क्रेडिट: India Today)

सिगरेट पीना सेहत के लिए हानिकारक तो है ही अब यह पीने वालों के फेफड़ों के साथ साथ उनकी कमाई को भी तेजी से निगलने वाली है. कहा जा रहा है कि जो सिगरेट आज 18 रुपये में बिक रही है वह जल्द ही 70-72 रुपये तक मिलेगी.

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सिगरेट के दाम क्यों बढ़ने की संभावना जताई जा रही है?

सिगरेट के जल्द ही आसमान छूने की बातें इसलिए हो रही हैं कि क्योंकि संसद ने सेंट्रल एक्साइज़ (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है. संसद ने सेंट्रल एक्साइज़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया, जिसमें राज्यसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी और लोकसभा को भेज दिया. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बिल में सिगरेट, सिगार, हुक्का और चबाने वाले तंबाकू सहित कई तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को संशोधित किया गया है. मनीकंट्रोल में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस संशोधन के बाद सिगरेट पर लगने वाला टैक्स बहुत बढ़ जाएगा. अभी 1,000 सिगरेट पर 200 से 735 रुपये टैक्स लगता है, लेकिन अब यह बढ़कर 2,700 से 11,000 रुपये हो जाएगा. लेकिन टैक्स कितना लगेगा, यह सिगरेट की लंबाई और किस्म पर निर्भर करेगा.

सरकार अलग-अलग प्रकार की सिगरेट पर अलग दर से टैक्स लगाती है. इसी तरह से चबाने वाले तंबाकू पर ड्यूटी 25% से बढ़कर 100% हो जाएगी. हुक्का तंबाकू पर 25% से 40% तक बढ़ोतरी होगी, जबकि स्मोकिंग मिक्सचर पर टैक्स 5 गुना तक बढ़कर 60% से 300% तक पहुंच सकता है. मनीकंट्रोल ने अपनी एक खबर में सरकारी अधिकारियों की तरफ से लगाए गए अनुमान के आधार पर लिखा है कि अभी जो एक सिगरेट 18 रुपये में मिलती है उस सिगरेट की कीमत जल्द ही 72 रुपये तक पहुंच सकती है.

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अब तक तंबाकू और सिगरेट वगैरा पर दो तरह से भारी टैक्स लगता था . पहला GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स और दूसरा उसके ऊपर लगा कंपेसेशन सेस (compensation cess) तंबाकू उत्पाद 28% तक GST लगाया जाता था. सरकार तंबाकू और सिगरेट को 'सिन गुड्स'( हानिकारक और नशे से जुड़ी वस्तुओं की श्रेणी) में रखा गया है. इसलिए इन पर शुरू से ही बाकी चीजों की तुलना में कहीं अधिक टैक्स लगाया जाता रहा है . इसके साथ-साथ राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए अलग से सेस भी वसूला जाता था.इन दोनों तरह के टैक्स को मिलाकर तंबाकू पर कुल टैक्स का बोझ बहुत भारी हो जाता था . 

वहीं, 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में सिगरेट, पान मसाला, गुटखा आदि पर 40% GST लगाने का ऐलान किया है. लेकिन अब सेस नहीं लगेगा. बता दें कि 22 सितंबर से बाकी चीजों पर जीएसटी की दरों में बदलाव लागू किया जा चुका है. सिगरेट, पान मसाला, गुटखा, जर्दा, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अभी भी पुराने टैक्स सिस्टम लागू था. सरकार ने कहा था कि यह तब तक जारी रहेगा, जब तक  compensation cess से जुड़ी सारी वित्तीय देनदारियां पूरी तरह चुकती नहीं हो जातीं.
 

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