मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली थी और निवेशकों को करीब 7 लाख करोड़ का भारी नुकसान हुआ था. गिरावट का सिलसिला मंगलवार (29 सितंबर) को भी जारी है. खुलते ही बाजार औंधे मुंह गिर गया. सेंसेक्स ने 600 प्वाइंट्स का गोता लगाया है. शुरुआती कारोबार में प्रमुख भारतीय शेयर सूचकांक लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं. निफ्टी (Nifty 50) में भी गिरावट है और 200 अंक से ज्यादा टूटकर 22,600 के नीचे आ गया है.
Share Market में गिरावट का दौर जारी, खुलते ही औंधे मुंह गिरा बाजार, Sensex 600 प्वाइंट्स लुढ़का
Share Market News: शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. हफ्ते के दूसरे दिन भी यह सिलसिला जारी रहा. खुलते ही सेंसेक्स ने 600 प्वाइंट्स का गोता लगाया. Sensex-Nifty में इस गिरावट के चलते निवेशकों के इस सप्ताह 8.81 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं.

मार्केट में आई इस भारी गिरावट की वजह से निवेशकों में हड़कंप मच गया है. एक्सपर्ट्स की राय है कि बाजार में आए इस भूचाल के पीछे वैश्विक परिस्थितियों के साथ ही घरेलू मार्केट में डिमांड की कमी समेत कई बड़ी वजहें हैं. मार्केट मंगलवार को भी रेड जोन में खुला और शुरुआती गिरावट का दौर 10.30 बजे तक जारी रहा. बाजार खुलने के बाद अगले 2 घंटों में भी दोनों इंडेक्स के टूटने की रफ्तार जारी रही.
सोमवार को लाल निशान पर बंद हुए थे सेंसेक्स-निफ्टीसोमवार को बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1124 अंक टूटकर 72,771 पर और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty) 260 अंकों की गिरावट के साथ 22,780 के लेवल पर बंद हुआ था. मंगलवार (29 सितंबर) को सेंसेक्स ने 72,633 पर कारोबार की शुरुआत की. कुछ ही मिनटों में गिरावट तेज हो गई और महज 5 मिनट में सेंसेक्स 600 अंक नीचे फिसल गया.
एक्सपर्ट्स की राय है कि शेयर बाजार क्रैश होने के पीछे सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की बढ़ती कीमतें हैं. पूरी दुनिया के बाजार में इस वक्त कच्चे तेल की कीमतों की वजह से दबाव बन रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है. अभी तक ईरान और अमेरिका के बीच समझौता नहीं हो सका है. इस वजह से पिछले 7 महीने से होर्मुज के रास्ते होने वाले तेल सप्लाई पर असर पड़ा है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर एयरलाइंस से लेकर कृषि और रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत तक पड़ रहा है. पूरे देश में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर है, जिससे बाजार में बिकवाली जोर पकड़ रही है.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक ग्लोबल स्तर पर जियो-पॉलिटिकल तनाव और मिडिल ईस्ट संकट का समाधान नहीं होता है, तब तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं होंगी. तेल की कीमतों में अस्थिरता की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर बना रह सकता है.
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भारतीय बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की दूरी भी शेयर मार्केट में आए भूचाल की एक बड़ी वजह है. विदेशी निवेशकों के भारत से मोहभंग की वजह से मार्केट में भारी बिकवाली देखने को मिल रही है. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सत्र में FIIs ने भारतीय बाजारों से भारी बिकवाली की है. विदेशी निवेशकों ने 3,693.93 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. विदेशी निवेशकों के लगातार पैसे निकालने से घरेलू शेयर बाजार में सेंटिमेंट कमजोर हुआ है.
इसके अलावा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेजी और दुनिया भर के अन्य एशियाई बाजारों में आए गिरावट से भारतीय शेयर बाजार प्रभावित हुए हैं. ग्लोबल मार्केट से मिल रहे इन कमजोर संकेतों की वजह से निवेशकों में असमंजस का माहौल है. इसकी वजह से चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है.
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