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सालभर में 10% गिरा रुपया, इन भारतीय व्यापारियों की मौज हो गई

पिछले एक साल में रुपये में आई 10% से ज्यादा की भारी गिरावट से भारतीय निर्यातकों को मोटा फायदा हुआ है. मई के महीने में भारत का वस्तु (गुड्स) एक्सपोर्ट 18 परसेंट उछल गया है

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पश्चिम एशिया में एक्सपोर्ट बढ़ने से भारतीय कारोबारियों को फायदा हुआ है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • पिछले एक साल में रुपये की 10% से अधिक गिरावट के कारण मई 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 18% बढ़कर 4 लाख 27 हजार 600 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
  • रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में निर्यात बढ़ने के कारण, भारत का व्यापार घाटा मई 2026 में 28.21 अरब डॉलर तक बढ़ गया जबकि आयात में 20.62% की वृद्धि हुई।
  • भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में वृद्धि हुई है, जबकि चाय, तंबाकू, मसाले और वस्त्रों के निर्यात में कमी आई है।

अब तक आपने रुपये में आई कमजोरी के चलते होने वाले नुकसान के बारे में सुना होगा लेकिन रुपये में गिरावट से भारतीय निर्यातक मालामाल हो रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि पिछले एक साल में रुपये में आई 10% से ज्यादा की भारी गिरावट का बड़ा फायदा हुआ है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में एक्सपोर्ट बढ़ने से भारतीय कारोबारियों को फायदा हुआ है.

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मई में एक्सपोर्ट 6 महीने में सबसे ज्यादा 

आंकड़ों के मुताबिक मई के महीने में भारत का वस्तु (गुड्स) एक्सपोर्ट मई 2025 के मुकाबले 18 परसेंट उछल गया है. यह पिछले 6 महीनों में सबसे ज्यादा है. इस दौरान देश का व्यापार घाटा भी मई में बढ़कर 28.21 अरब डॉलर (करीब 2 लाख 66 हजार 900 करोड़ रुपये) हो गया. यह पिछले साल 22.56 अरब डॉलर यानी करीब 2 लाख 13 हजार 430 करोड़ रुपये था.

वस्तुओं का निर्यात 18% बढ़कर करीब 4 लाख 27 हजार 600 करोड़ पहुंच गया. मई 2025 में गुड्स एक्सपोर्ट लगभग 3 लाख 62 हजार 330 करोड़ रुपये था. इस दौरान आयात में भी 20.62% का इजाफा हुआ है और यह करीब 6 लाख 94 हजार 480 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

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ईरान और अमेरिका के बीच शांति से भारत को फायदा 

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कायम रहता है तो भारत की कई कारोबारी समस्याएं कम हो जाएंगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस इलाके में दिक्कत के बावजूद इस साल मई में पश्चिम एशिया को निर्यात लगभग पिछले साल मई के स्तर तक पहुंच गया है.

व्यापार के आंकड़ों से यह भी पता चला कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच भारत द्वारा तेल और गैस का आयात बढ़ाने से मई में अमेरिका से आयात में 54.43% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह 55 हजार 530 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि, भारत के सबसे बड़े बाजार को निर्यात में 1% से भी कम की वृद्धि हुई.

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इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स ने बाजा फोड़ दिया 

आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि निर्यात बढ़ाने में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल हैं. इस दौरान इलेक्ट्रानिक आइटम्स का निर्यात 11.62% बढ़कर करीब 48 हजार 145 करोड़ रुपये हुआ. इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों के एक्सपोर्ट में करीब 55 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान करीब 79 हजार 650 करोड़ रुपये कीमत के इलेक्ट्रॉनिक आइटम एक्सपोर्ट हुए. हालांकि, मई में चाय, तंबाकू, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, चमड़ा और वस्त्रों के निर्यात में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई.

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सोने का आयात 60% उछला 

इस वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में सोने का आयात 60% बढ़कर करीब 85 हजार 550 करोड़ रहा. मई में कच्चा तेल आयात 53.8% बढ़कर करीब 2 लाख 14 हजार 450 करोड़ पहुंच गया. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से आयात बढ़ा है. मई में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं.

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष किरित भंसाली ने कहा कि जड़े हुए सोने के आभूषणों का निर्यात अप्रैल-मई 2026 के दौरान पिछले वर्ष (अप्रैल-मई 2025) की इसी अवधि की तुलना में साल-दर-साल 6.71% बढ़कर करीब 9000 करोड़ रुपये रहा. 

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