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चावल की कीमतों में 30 फीसदी तक की उछाल की वजह क्या है?

प्रमुख उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कम बारिश की वजह से किसानों ने धान की बुआई कम की है. इस वजह से धान का रकबा घटा है.

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चावल (सांकेतिक तस्वीर)

प्रमुख उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में कम बारिश की वजह से किसानों ने धान की बुआई कम की है. इस वजह से धान का रकबा घटा है. इसके अलावा बांग्लादेश, ईरान, इराक और सऊदी अरब जैसे देशों की तरफ से मांग बढ़ने से भी कीमतों में जोरदार इजाफा देखने को मिला है.

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पिछले साल के मुकाबले धान की रक़बा 13 फीसदी कम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ओडिशा और छत्तीसगढ़ में धान की बुवाई में भी कमी देखने को मिली है. 29 जुलाई तक मिले आंकड़ों के मुताबिक चालू खरीफ सीजन में धान का रकबा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 13.3 फीसदी कम था. पिछले साल 29 जुलाई की समान अवधि की तुलना में ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे उत्तरी और पूर्वी राज्यों में धान की खेती का रकबा 37 लाख  हेक्टेयर कम है.

विदेशों से मांग बढ़ने से भी कीमतों पर असर 

चावल के उत्पादन में कमी की वजह से ही नहीं, बल्कि निर्यात मांग में इजाफा होने से से भी चावल की कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिली है. इस बारे में राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, 

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'बांग्लादेश ने भारत से चावल का आयात करना शुरू कर दिया है, जिससे सोना मसूरी जैसे चावल की मांग बढ़ी है. इसी वजह से इसकी कीमत में 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.'

पिछले साल से उत्पादन कम रहने का अनुमान 

कोलकाता की कंपनी तिरुपति एग्री ट्रेड के सीईओ सूरज अग्रवाल ने कहा है कि चावल की सभी किस्मों की कीमत में 30 परसेंट की वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया, 

‘चावल की रत्न किस्म का भाव 26 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 33 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. बासमती चावल की कीमत में भी लगभग 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह 62 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.’

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सूरज अग्रवाल का कहना है कि इस वैराइटी के चावल की ईरान, इराक और सऊदी अरब से मांग काफी ज्यादा है. वित्त वर्ष 2022 में देश में चावल का कुल उत्पादन 13 करोड़ टन था और निर्यात 2 करोड़ 10 लाख टन था. चालू मौजूदा खरीफ सीजन में देश में 11.2 करोड़ टन चावल के उत्पादन का लक्ष्य है.

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