भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार 23 दिसंबर को बताया कि वो देश के बैंकिंग सिस्टम में लगभग 32 अरब डॉलर (करीब 2 लाख 90 हजार 630 करोड़ रुपये) की लिक्विडिटी (पैसा) डालेगा. केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि यह पैसा अगले एक महीने में ओपन मार्केट बॉन्ड खरीद (open market bond purchases) और डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप के जरिये डाला जाएगा.
बैंकों के लिए RBI का करीब 3 लाख करोड़ का ये फैसला आपके बहुत काम आ सकता है
RBI का कहना है कि वह 29 दिसंबर से 22 जनवरी के बीच 2 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा. यह खरीद 4 किस्तों में होगी. हर किस्त 50 हजार करोड़ रुपये की होगी.
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RBI का कहना है कि वह 29 दिसंबर से 22 जनवरी के बीच 2 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा. यह खरीद 4 किस्तों में होगी. हर किस्त 50 हजार करोड़ रुपये की होगी.
ओपन मार्केट बॉन्ड खरीद में RBI खुले बाजार (बैंकों या वित्तीय संस्थानों) से सरकारी बॉन्ड खरीदता है तो इन बॉन्ड के बदले उन्हें रुपये में भुगतान करता है. इससे बैंकिंग सिस्टम में पैसा बढ़ता है. इस तरीके से आरबीआई बैकों के पास पैसों की कमी को दूर करता है. इस तरह से बिना ब्याज दरें घटाए आरबीआई बैंकों के पास पैसों की कमी नहीं होने देता है. इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम को सुचारू रूप से चलाना है.
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इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बताया है कि वह 13 जनवरी 2026 को 10 अरब डॉलर-रुपये बॉय/सेल भी करेगा. डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप के जरिये आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में रुपये की तरलता बढ़ाता है. इसके तहत RBI बाजार से डॉलर खरीदता है और उसके बदले बैंकों को रुपये देता है. इससे बैंकिंग सिस्टम में तुरंत रुपये की नकदी बढ़ जाती है. बाद में तय अवधि पूरी होने पर RBI वही डॉलर वापस बेच देता है और बैंक RBI को रुपये लौटा देते हैं. ये कुछ वैसा ही है जैसे कोई आपका दोस्त कहे कि मुझे विदेश घूमने जाना है अभी मुझे डॉलर दे दो, बदले में रुपये ले लो. कुछ समय बाद मैं डॉलर लौटा दूंगा और तुम मुझे रुपये वापस कर देना.
RBI ने इस महीने की शुरुआत (3-5 दिसंबर 2025) में आरबीआई ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती का ऐलान किया था. इसके साथ आरबीआई ने बैंकों में नगदी बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड को ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए खरीदने की घोषणा की थी. वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि भारतीय रिजर्व बैंक फरवरी 2026 में होने वाली अपनी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकता है.
बैकिंग एक्सपर्ट अश्वनी राणा ने लल्लनटॉप को बताया कि रिजर्व बैंक जब बैंकिंग सिस्टम में पैसा डालता है तो इसका फायदा बैंकों के अलावा आम लोगों को भी मिलता है. बैकों के पास ज्यादा पैसा आने से पहले के मुकाबले ज्यादा कर्ज बांटते हैं. ऐसे में जो लोग होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन लेना चाहते हैं उनको लोन मिलना आसान हो जाता है. इस का मतलब हुआ कि बैंक पैसे की कमी के डर से लोन बांटना नहीं रोकते हैं.
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