पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई अब भारत की अर्थव्यवस्था के लिए दिक्कत पैदा कर सकती है. रेटिंग एजेंसी मूडीज ने ये बात कही है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में मूडीज के एनालिस्ट्स के हवाले से कहा गया है कि ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1% अंक की गिरावट आ सकती है.
ईरान युद्ध से भारत का क्या ही बिगड़ेगा? मूडीज के जानकारों ने बता दिया
मूडीज के विशेषज्ञो ने कहा है कि ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध के चलते भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1% अंक की गिरावट आ सकती है. इसके अलावा भारत में कर्ज भी महंगा हो सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है.
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एजेंसी का अनुमान है कि अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में जीडीपी 6.4% रह सकती है. इसके अलावा भारत में कर्ज भी महंगा हो सकता है. मूडीज का ये भी कहना है कि इससे देश में महंगाई बढ़ सकती है. इसमें 1.5 से 2% अंक का इजाफा हो सकता है. मूडीज का कहना है कि इस युद्ध के प्रभावों के चलते भारत की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ सकती है और मांग पर असर पड़ेगा.
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक इस इलाके में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध का बैंकिंग सेक्टर समेत समूची अर्थव्यवस्था (macro economy) पर असर पड़ेगा. मूडीज के वित्तीय संस्थान समूह के सीनियर एनालिस्ट अमित पांडे ने कहा,
“युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा. लेकिन यह तभी होगा जब लड़ाई लंबे समय तक जारी रहेगी.”
अमित पांडे ने आगे कहा,
“अगर यह युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो गया और उदाहरण के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 89 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाता है, तो इसका ज्यादा असर नहीं होगा. लेकिन अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो इसका असर न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि पूरी इकोनॉमी पर इसका असर दिखेगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था की तरक्की की रफ्तार धीमी हो जाएगी और मांग में कमी आएगी. इसका असर बैंकों पर भी पड़ेगा.”
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रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल महंगा होने से विदेशों से कच्चा तेल खरीदने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इस वजह से रुपया और कमजोर होगा. महंगाई भड़ेगी और भारत का चालू खाता घाटा गड़बड़ाएगा. अगर इस आर्थिक झटके को कम करने के लिए सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ी तो कर्ज महंगा होगा और सरकार का कमाई और खर्च का अंतर बढ़ेगा.
इससे सरकार को अपना राजकोषीय प्रबंधन करना मुश्किल हो जाएगा. मूडीज ने आगे कहा कि भारत, जापान और कोरिया सहित उन तीन देशों में शामिल है जिन पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने का भारी असर होगा.
भारत हर साल विदेशों से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता है. वो अपनी कुल जीडीपी के कुल साइज के मुकाबले करीब 3.6% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है.
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