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डेबिट-क्रेडिट कार्ड के नियम आए, SIP, EMI, बीमा प्रीमियम भरने वालों को फायदा

अभी तक कई व्यवस्था के मुताबिक अगर आपका कोई भी ऑटो-पेमेंट कार्ड से लिंक है तो कार्ड बदलने पर सारा प्रोसेस फिर से दोहराना पड़ता था. RBI के नए नियमों (RBI new auto-debit rules 15000) के अनुसार ग्राहकों को सिर्फ पहली बार ई-मैंडेट रजिस्टर करते समय एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP की जरूरत होगी.

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आरबीआई का नया नियम.

क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम और ऐप्स के सब्सक्रिप्शन का पेमेंट अब और आसान होने वाला है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने ऑटोमैटिक पेमेंट नियमों (RBI new auto-debit rules 15000) में बदलाव किया है. नए नियम आने से अगर किसी ग्राहक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड बदलता है, तो उससे जुड़े ई-मैंडेट अपने आप नए कार्ड पर ट्रांसफर हो जाएंगे. नए नियमों का फायदा SIP सहित बिजली बिल और EMI के मैंडेट को भी मिलेगा. पैसा कटने से पहले वाली नोटिफिकेशन घंटी को लेकर भी नया नियम आया है.

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कार्ड बदलने पर दर्द नहीं होगा

अभी तक की व्यवस्था के मुताबिक अगर आपका कोई भी ऑटो-पेमेंट कार्ड से लिंक है तो कार्ड बदलने पर सारा प्रोसेस फिर से दोहराना पड़ता था. हर किस्म के भुगतान के लिए ई-मैंडेट फिर से करना पड़ता था. ई-मैंडेट वह व्यवस्था है, जिसमें ग्राहक बैंक, कार्ड या पेमेंट ऐप को पहले से अनुमति देता है कि तय तारीख पर SIP, बीमा प्रीमियम, EMI, यूटिलिटी बिल या OTT सब्सक्रिप्शन जैसी रकम अपने-आप काट लेना. 

RBI के नए नियमों के अनुसार ग्राहकों को सिर्फ पहली बार ई-मैंडेट रजिस्टर करते समय एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP की जरूरत होगी. इसके बाद कार्ड बदल जाने पर EMI अपने आप ही उस कार्ड पर ट्रांसफर हो जाएगी. बैंक ई-मैंडेट सुविधा के लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूलेंगे, ये भी नियम का हिस्सा है. कई बार इसके लिए बैंक पैसा चार्ज करते हैं.

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नोटिफिकेशन की घंटी बजेगी ही

पेमेंट सिस्टम को सेफ बनाने के लिए RBI ने प्री-डेबिट अलर्ट अनिवार्य कर दिया है. बोले तो बैंक को पैसा कटने से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक को SMS या ईमेल भेजना होगा. इसमें मर्चेंट का नाम, राशि और तारीख की जानकारी होगी. हालांकि ऐसा अभी भी होता है, मगर अब ये अनिवार्य है. ग्राहकों के पास अब अपने मैंडेट को कभी भी रोकने, बदलने या रद्द करने का ऑप्शन होगा. अभी तक इसके लिए बिलिंग साइकिल का इंतजार करना पड़ता था. जीरो लायबिलिटी पॉलिसी के तहत धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन की समय से रिपोर्ट करने पर ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. माने अगर कोई फ्रॉड बिना आपके पासवर्ड या OTP साझा किए हुआ तो बैंक की जिम्मेदारी.

इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान के लिए 1 लाख तक के ऑटो-डेबिट अब ऑटोमैटिक होंगे. माने कोई ओटीपी का झंझट नहीं.

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