एक बीमारी और पूरी जिंदगी की कमाई खत्म, हेल्थ इंश्योरेंस चुनने का ये तरीका बचा लेगा!
सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के उलट कस्टमाइज्ड प्लान्स में 15-20 तक कवर (add-ons) शामिल हो सकते हैं. इन्हें ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार चुन सकता है. इन फीचर्स में मैटरनिटी कवर, कवर खत्म होने पर उसे दोबारा बहाल करने वाला रिस्टोरेशन बेनिफिट, कुछ खास बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड कम करने का विकल्प, ओपीडी खर्च और लॉयल्टी बोनस जैसे कई फायदे शामिल होते हैं.

नोएडा के 36 साल के प्राइवेट जॉब करने वाले वैभव पांडेय (बदला नाम) ने 5 लाख का हेल्थ कवर लेकर यह सोचा था कि उसने अपने परिवार को सुरक्षित कर लिया है. लेकिन एक दिन अचानक पत्नी की हार्ट सर्जरी की नौबत आई. अस्पताल का बिल बना 11 लाख रुपये. इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ 5 लाख. बाकी 6 लाख के लिए वैभव को अपनी बचत तोड़नी पड़ी. उधार लेना पड़ा. अब कई महीनों से इस लोन की किस्तें भरनी पड़ रही हैं. ये सिर्फ वैभव की कहानी नहीं हैं. कई लोग सही से हेल्थ बीमा प्लान न चुनने पर आर्थिक परेशानी में फंस जाते हैं.
अगर आप इस तरह की वित्तीय परेशानी से बचना चाहते हैं तो अब आपको अपने और अपने परिवार के लिए 'कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस' यानी जरूरत के हिसाब से कवर चुनना चाहिए.
कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस क्या है?कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस का मतलब है, ऐसी हेल्थ पॉलिसी जिसे आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खुद डिजाइन करते हैं. मतलब आपको अगर पत्नी के लिए मैटरनिटी लाभ चाहिए तो आप इसका अतिरिक्त प्रीमियम चुकाकर इसको अपनी हेल्थ बीमा पॉलिसी में शामिल करवा सकते हैं.
कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस क्यों लेना चाहिए?सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस में बीमा कंपनी तय करती है कि क्या बीमा कवर मिलेगा. आमतौर पर बीमा कंपनी इसमें गंभीर बीमारी, व्यक्तिगत दुर्घटना आदि को शामिल करती है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि सामान्य स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के उलट कस्टमाइज्ड प्लान्स में 15-20 तक कवर (add-ons) शामिल हो सकते हैं. इन्हें ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार चुन सकता है. इन फीचर्स में मैटरनिटी कवर, कवर खत्म होने पर उसे दोबारा बहाल करने वाला रिस्टोरेशन बेनिफिट, कुछ खास बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड कम करने का विकल्प, ओपीडी खर्च और लॉयल्टी बोनस जैसे कई फायदे शामिल होते हैं.
बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' प्रोडक्ट नहीं रह गया है. इसका मतलब ये कि जरूरी नहीं कि सभी के लिए एक जैसा हेल्थ बीमा काम आये. इंश्योरेंस एक्सपर्ट अमित भंडारी ने लल्लनटॉप ने बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य बीमा कभी भी एक जैसा वित्तीय उत्पाद नहीं बनाया गया था. हर व्यक्ति की उम्र, लाइफस्टाइल, मेडिकल हिस्ट्री और पारिवारिक जरूरतें अलग होती हैं. उनके जोखिम अलग होते हैं इसलिए उनकी पॉलिसी भी अलग होनी चाहिए.
ऐसे में कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लोगों को वही कवर चुनने की आजादी देती है जिसकी उन्हें वास्तव में जरूरत है, जिससे अनावश्यक खर्च भी बचता है. उनका कहना है कि ये सब देखते हुए कस्टमाइज्ड हेल्थ इंश्योरेंस सभी के लिए फायदेमंद है. हेल्थ इंश्योरेंस सलाहकार रमेश शर्मा के मुताबिक, कस्टमाइज्ड हेल्थ प्लान का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप सिर्फ वही कवर लेते हैं जिसकी आपको वास्तव में जरूरत है. इससे प्रीमियम भी कंट्रोल में रहता है और क्लेम के समय ‘आउट ऑफ पॉकेट’ खर्च कम हो जाता है. खासकर बढ़ते मेडिकल खर्च के दौर में यह तरीका परिवार को अचानक आने वाले बड़े खर्च से बचाने में काफी मददगार साबित होता है.
फैमिली के लिए कितना हेल्थ कवर जरूरी ?इंश्योरेंस एक्सपर्ट अमित भंडारी का कहना है कि जिस तरह से आज के समय में इलाज का खर्च तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए परिवार के लिए कम से कम 15-20 लाख का कवर लेना जरूरी है. बड़े शहरों में एक गंभीर बीमारी या सर्जरी का खर्च आसानी से 8-10 लाख रुपये या उससे ज्यादा पहुंच सकता है. ऐसे में कम कवर लेने पर बाकी रकम अपनी जेब से देनी पड़ती है, जो आपकी बचत और वित्तीय स्थिरता पर भारी दबाव डाल सकती है.
इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में इलाज का खर्च हर साल करीब 12–14% की दर से बढ़ रहा है. ऐसे में अगर आपका हेल्थ कवर पर्याप्त नहीं है, तो थोड़ी सी गंभीर बीमारी भी आपकी बचत पर बड़ा असर डाल सकती है.
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