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सोने-चांदी पर अतिरिक्त मार्जिन हटा, पता है अब कीमतों का क्या हाल होने वाला है?

देश के सबसे बड़े कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज एमसीएक्स और सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई ने सोने और चांदी के फ्यूचर कांट्रैक्ट्स पर लगने वाले अतिरिक्त मार्जिन को हटा दिया है. इसका कीमतों पर बड़ा असर पड़ेगा.

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अतिरिक्त मार्जिन घटने से सोने-चांदी के दाम चढ़ गए हैं (फोटो क्रेडिट: Business Today)

देश के सबसे बड़े कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज एमसीएक्स यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) ने सोने और चांदी के फ्यूचर कांट्रैक्ट्स पर लगने वाले अतिरिक्त मार्जिन को हटा दिया है.

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हिंदू बिजनेस लाइन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि एमसीएक्स ने एक बयान में कहा कि गोल्ड फ्यूचर्स (सभी प्रकार के अनुबंध) पर लगाया गया 3 परसेंट का अतिरिक्त मार्जिन और सिल्वर फ्यूचर्स (सभी प्रकार के अनुबंध) पर लगाया गया 7 परसेंट का अतिरिक्त मार्जिन 19 फरवरी से खत्म कर दिया गया है. इसी तरह एनएसई ने भी कहा कि सोने के वायदा अनुबंधों पर लगाया गया अतिरिक्त मार्जिन 19 फरवरी से वापस ले लिया जाएगा. 

सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेजी के बीच 5 फरवरी को एक्सचेंजों ने सोने-चांदी के फ्यूचर कांट्रैक्ट्स पर अतिरिक्त मार्जिन लगा दिया था. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी की शुरुआत से सोने के हाजिर भाव में 10 परसेंट की गिरावट आई है और चांदी के हाजिर भाव में 33 परसेंट की गिरावट.

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सोने-चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

19 फरवरी को दोपहर एक बजे के आसपास एमसीएक्स पर सोने का फरवरी वायदा करीब 1200 रुपये या एक परसेंट की तेजी के साथ 1,56,955 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसी तरह चांदी का मार्च वायदा करीब 3500 रुपये उछलकर 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई.  

कमोडिटी समाचार सिक्योरिटीज के को-फाउंडर एवं डायरेक्टर अंकित कपूर ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा,

“सोने और चांदी पर मार्जिन घटने का मतलब है कि अब ट्रेडर्स कम पूंजी लगाकर बड़ी पोजीशन ले सकेंगे. जब आप किसी कमोडिटी को खरीदते या बेचते हैं और सौदा खुला रहता है, तो उसे पोजीशन कहते हैं. जब एक्सचेंज मार्जिन घटाते हैं तो बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ती है. छोटे और रिटेल निवेशकों के लिए एंट्री आसान हो जाती है. इसका असर यह होता है कि ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी बढ़ती है.”  

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वॉल्यूम का मतलब ये है कि किसी दिन या तय समय में कितने कॉन्ट्रैक्ट खरीदे-बेचे गए. वहीं, अगर खरीदने-बेचने वाले बहुत हैं, तो आपको तुरंत सही कीमत पर खरीदार या विक्रेता मिल जाएगा. इसे अच्छी लिक्विडिटी कहते हैं. अगर खरीदार-विक्रेता कम हों, तो सौदा करने में दिक्कत और कीमत में ज्यादा फर्क हो सकता है. इसे कम लिक्विडिटी कहते हैं. कपूर का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है ऐसे में सोने की सुरक्षित निवेश मांग बनी रहने का अनुमान है. ऐसे में सोने-चांदी में तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है. 

 डिजिटल गोल्ड और बुलियन कंपनी ऑगमोंट-गोल्ड फॉर ऑल में रिसर्च हेड डॉक्टर रेनिशा चेनानी ने लल्लनटॉप से कहा,

‘सोने-चांदी पर मार्जिन अब भी बहुत ज्यादा है. फिलहाल गोल्ड पर कुल मार्जिन 20%-40% और सिल्वर 50%-60% के बीच है. इस वजह से बुलियन मार्केट से सटोरिये अभी दूरी बनाए रखेंगे.’

उनका कहना है कि हाल फिलहाल सोने-चांदी की कीमतों पर बहुत ज्यादा तेजी या मंदी की संभावना नहीं है. हालांकि चेनानी का कहना है कि जो रिटेल निवेशक सोने में निवेश करना चाहते हैं वे निवेश कर सकते हैं. बशर्ते एक मुश्त नहीं बल्कि धीरे-धीरे. उदाहरण के लिए अगर आपका लक्ष्य सोने में 1 लाख निवेश करने का है तो अभी सिर्फ 50 हजार रुपये लगाएं और बाकी 50 हजार रुपये तब लगाएं जब सोने के दाम मौजूदा स्तर से 4-5 परसेंट और गिरें तब निवेश करें. 

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