18 फरवरी से हिंद महासागर में अब तक का सबसे बड़ा नेवल अभ्यास होने जा रहा है. विशाखापत्तनम के तट से शुरू होने वाले इस अभ्यास का दायरा बंगाल की खाड़ी से लेकर हिंद महासागर तक फैला हुआ है. 19 फरवरी से इस अभ्यास का पहला फेज शुरू होगा. शुरुआती दो दिनों तक हार्बर फेज में अभ्यास होगा. यानी इस दौरान सभी नेवल जहाज बंदरगाह में अभ्यास करेंगे. इस दौरान ये जहाज किसी संभावित युद्ध में आने वाली परिस्थितियों का रियल टाइम अभ्यास करेंगे. इसके बाद 25 फरवरी तक 'सी-फेज' यानी समुद्र में अभ्यास होगा. लेकिन इस बार के ‘मिलन एक्सरसाइज’ में एक चीज काफी दिलचस्प है. वो है दो दुश्मनों अमेरिका और ईरान का एक टीम में होना.
'मिलन एक्सरसाइज' में साथ आए अमेरिका-ईरान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं- 'इंडिया में सब दोस्त हैं'
Milan 2026 Naval Exercise भारत की नेवल डिप्लोमेसी को भी दिखाता है कि कैसे भारतीय नौसेना के बुलावे पर दुनिया की बड़ी नौसेनाएं, बावजूद आपसी मतभेद के, एक मंच पर आसानी से जुट जाती हैं.


जैसा कि भारत की तीनों सेनाओं की कमांडर-इन-चीफ और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'मिलन 2026 एक्सरसाइज' से पहले कहा कि भारत मित्रता और सहयोग पर विश्वास रखता है और इसलिए भारत में आने के बाद धुर विरोधी भी एक पाले में आ जाते हैं. हर साल ये देखने को मिलता है. जैसे साल 2025 में बेंगलुरु के येलहंका एयरबेस पर एयरो इंडिया के दौरान अमेरिका और रूस के फाइटर जेट्स आमने-सामने खड़े थे. अमेरिका का F-35 और रूस का Su-57, एक ही हवाई पट्टी पर एक-दूसरे के सामने थे. तब भी ये कहा गया था कि ऐसा या तो जंग में संभव है, या इंडिया में.

और अब 'मिलन 2026' नेवल एक्सरसाइज में भी दो विरोधी भारत में एक साथ खड़े हैं. ये दो देश अमेरिका और ईरान हैं. अमेरिका ने इस नेवल एक्सरसाइज में भाग लेने के लिए अपना गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Pinckney भेजा है. वहीं ईरान ने अपने फ्रिगेट IRIS Dena को मिलन एक्सरसाइज के लिए भेजा है. दिलचस्प बात ये है कि जब ये एक्सरसाइज चल रही है, ठीक ठीक उसी समय अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln ईरान की घेराबंदी कर रहा है.

खबरें ये भी हैं कि अमेरिका ने अपने एक और एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R Ford को भी मिडिल ईस्ट की ओर भेज दिया है. लेकिन भारत की मेजबानी में ये दोनों देश एक साथ, एक साझा लक्ष्य और साझा दुश्मन से लड़ने का अभ्यास करेंगे. खास बात ये है कि दोनों में से किसी देश ने इस पर आपत्ति नहीं जताई है. ये न सिर्फ भारत के महत्व को दिखाता है, बल्कि ये भारत की एक सफल नेवल डिप्लोमेसी का भी प्रतीक है.

इसके अलावा जो देश इस एक्सरसाइज में अपने जहाज लेकर नहीं आए हैं, उन्होंने उसकी जगह अपने डेलिगेशन को भेजा है. मिलन 2026 के लिए इस बार विदेश से 19 जंगी जहाज आये हैं. करीब 70 देशों वाले इस 'मिलन' अभ्यास में सारे क्वाड देशों (भारत-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया-जापान) के नौसेना की मौजूदगी भी है.
इस अभ्यास के पीछे का मकसद समान सोच वाली नौसेनाएं को एक साथ लेकर आना है. एक्सरसाइज का लक्ष्य ये होता है कि मित्र देशों की सेनाएं आपस में मिलकर एक-दूसरे की रणनीति सीखें, जिससे अगर कोई समुद्री ऑपेरशन करने का मौका आये तो आपस में किसी तरह के तालमेल की कमी न हो.
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