The Lallantop

गलवान झड़प के बाद भारत ने पहली बार चीन को बड़ी छूट दी, उपकरणों की खरीद पर लगे बैन में ढील

भारत सरकार ने सरकारी बिजली और कोयला कंपनियों को चीनी उपकरणों के आयात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है. साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से चीनी कंपनियां भारत में किसी भी सरकारी ठेके में सीधे बोली नहीं लगा सकती थीं.

Advertisement
post-main-image
सरकारी बिजली और कोयला कंपनियां काफी समय से उपकरणों की कमी से जूझ रही हैं (फोटो क्रेडिट: India Today)

भारत ने चीन के उपकरणों की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया है. केन्द्र सरकार ने सरकारी बिजली और कोयला कंपनियों को, चीन से उनकी जरूरत के कुछ उपकरणों का सीमित आयात शुरू करने की मंजूरी दे दी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में चीनी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत सरकार ने सरकारी कंपनियों को बिना अलग से सरकारी अनुमति के चीन से पावर-ट्रांसमिशन का एक महत्वपूर्ण घटक खरीदने की अनुमति दे दी है. इसी तरह से कोयला कंपनियों के काम आने वाले प्रमुख उपकरणों के लिए भी सीमित छूट देने पर विचार किया जा रहा है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
अब तक क्या अड़चन थी?

यह पिछले 5 साल में पहला मौका है जब सरकार ने इस तरह की ढील दी है. जनवरी 2026 में रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया था कि सीमा तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारत सरकारी ठेकों में चीनी बोलीदाताओं के लिए बड़े पैमाने पर छूट देने की संभावना पर विचार कर रहा है. साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक  झड़प के बाद भारत सरकार ने यह नियम बनाया था कि किसी भी सरकारी ठेके में भाग लेने से पहले चीनी कंपनियों को सरकारी पैनल में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसके अलावा भारत सरकार से सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी. इस कदम के बाद चीनी कंपनियां भारत में किसी भी सरकारी ठेके में सीधे बोली नहीं लगा सकती थीं. एक अनुमान के मुताबिक भारत सरकार हर साल 700 से 750 अरब डॉलर (60-70 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के ठेकों के लिए बोली मंगाती है.

इसे भी पढ़ें: सुकन्या समृद्धि योजना या इक्विटी म्यूचुअल फंड, बेटी के भविष्य के लिए कौन सा निवेश सबसे बढ़िया?

Advertisement
अब सरकार ने क्यों दी मंजूरी?

सरकारी बिजली और कोयला कंपनियां काफी समय से उपकरणों की कमी से जूझ रही हैं. इसकी वजह से कई परियोजनाओं को पूरा होने में लगने वाला समय बढ़ रहा है. भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता जोड़ने का है. सरकारी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अगले तीन सालों में पावर ट्रांसमिशन परियोजनाओं में ट्रांसफॉर्मर और रिएक्टर की लगभग 40% कमी का अनुमान है.

करीब आ रहे भारत-चीन

पिछले साल सितंबर महीने में चीन ने शंघाई सहयोग संगठन समिट की मेजबानी की थी. तब प्रधानमंत्री मोदी ने 7 साल में पहली बार चीन का दौरा किया था. यह दौरा ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, और पाकिस्तान से रिश्तों में गर्मजोशी दिखाई थी. बाद में भारत और चीन ने व्यापारिक रिश्तों को गहरा करने पर सहमति जताई. पीएम के दौरे के बाद दोनों देशों ने सीधी फ्लाइट्स फिर से शुरू कीं. कुछ महीनों पहले भारत ने चीनी प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस वीजा मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया है.

वीडियो: युवराज मेहता एक्सीडेंट केस में SIT रिपोर्ट क्यों नहीं आई?

Advertisement

Advertisement