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जापान में खाली पड़े 'भूतिया घरों' पर टूटे खरीदा, वजह है हैरान करने वाली!

Japan's Haunted Houses: जापान में 'जिको बुकेन' यानी कथित 'भूतिया घरों' की मांग क्यों बढ़ रही है? महंगे रियल एस्टेट बाजार से तंग आकर जापान के युवा अब अंधविश्वास छोड़कर 50 फीसदी तक सस्ती प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं.

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जापान में 'हॉन्टेड घरों' का बढ़ता क्रेज (फोटो- AI)

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  • जापान में जिको बुकेन नामक उन घरों की खरीददारी बढ़ रही है जहां पूर्व में मृत्यु या दर्दनाक घटनाएं हुई हों, और ये घर अन्य सामान्य घरों की तुलना में 20 से 50 फीसदी सस्ते मिल रहे हैं।
  • महंगी रियल एस्टेट मार्केट, बढ़ती महंगाई तथा उच्च मॉर्गेज दरों ने जापान के युवा और निवेशकों को पुराने डर और अंधविश्वासों से हटाकर सस्ते और बेहतर लोकेशन वाले जिको बुकेन घरों की तरफ आकर्षित किया है।
  • जिको बुकेन से जुड़ी डर-छवि कम करने के लिए जापान में 'घोस्ट इन्वेस्टिगेशन' सेवाएं शुरू हुई हैं, जिससे घरों के मालिक अपनी प्रॉपर्टी को बेचने या किराए पर देने में सक्षम हो रहे हैं और खाली घरों की समस्या को अवसर में बदला जा रहा है।

सोचिए, एक ऐसा घर जहां कभी किसी की मौत हुई हो, जहां हत्या, आत्महत्या या अकेलेपन में हुई दर्दनाक मौत की कहानी जुड़ी हो... आमतौर पर ऐसे घरों से लोग दूरी बनाते हैं. लेकिन जापान में अब कहानी बदल रही है. यहां के युवा और प्रॉपर्टी निवेशक उन घरों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें कभी अशुभ और बदकिस्मत माना जाता था.

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जापान में इन घरों को 'जिको बुकेन' (Jiko Bukken) कहा जाता है. यानी ऐसी प्रॉपर्टी जिनके अतीत पर किसी दुखद घटना का साया रहा हो. महंगी होती रियल एस्टेट मार्केट, छोटे होते बजट और आसमान छूती घरों की कीमतों ने जापान के लोगों की सोच बदलनी शुरू कर दी है. ‘इंटरनेशनल रियल इस्टेट’ की रिपोर्ट के मुताबिक कभी जिन घरों को किराएदार भी नहीं मिलते थे, आज वही प्रॉपर्टी कम कीमत, बेहतर लोकेशन और निवेश के नए मौके की वजह से खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं.

भारी डिस्काउंट ने बदली सोच, 50 फीसदी तक सस्ते मिल रहे 'जिको बुकेन' घर

जापान में कभी जिन घरों को लोग अशुभ मानकर छोड़ देते थे, आज वही प्रॉपर्टी बजट में घर खरीदने वालों के लिए बड़ा मौका बन रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है इनकी कीमत. ‘ब्लूमबर्ग’ की ‘जापान प्रॉपर्टी रिपोर्ट’ के मुताबिक जिको बुकेन यानी कथित भूतिया या कलंकित प्रॉपर्टी सामान्य घरों के मुकाबले 20 फीसदी से 50 फीसदी तक सस्ती मिल सकती हैं.

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टोक्यो जैसे शहरों में जहां सामान्य घर खरीदना आम लोगों की पहुंच से लगातार बाहर होता जा रहा है, वहां कम कीमत वाली ये प्रॉपर्टी खासकर युवाओं और पहली बार घर खरीदने वालों को आकर्षित कर रही हैं. महंगाई और महंगी रियल एस्टेट मार्केट के दौर में कई जापानी खरीदार अब अतीत की कहानी से ज्यादा घर की लोकेशन, कीमत और भविष्य के निवेश को महत्व दे रहे हैं. यही वजह है कि कभी डर की पहचान बने ये घर अब जापान के प्रॉपर्टी मार्केट में एक नए अवसर के तौर पर देखे जाने लगे हैं.

अंधविश्वास हारा, महंगाई जीती: जापान में डर से ज्यादा कीमत मायने रखने लगी

कभी जिन घरों का नाम सुनते ही लोग पीछे हट जाते थे, आज वही प्रॉपर्टी जापान की नई पीढ़ी के लिए एक स्मार्ट फाइनेंशियल फैसला बनती जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह है बढ़ती महंगाई और आसमान छूती घरों की कीमतें. द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान के युवा अब पुराने डर और अंधविश्वासों के बजाय कम कीमत, बेहतर लोकेशन और आर्थिक फायदे को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.

जापान की बदलती जीवनशैली ने जिको बुकेन (Jiko Bukken) यानी कलंकित या कथित भूतिया घरों को लेकर सोच बदल दी है. नई पीढ़ी के कई खरीदारों का मानना है कि अगर किसी घर का अतीत दुखद रहा भी है, लेकिन वह सुरक्षित, सुविधाजनक और बजट में है तो उसे सिर्फ डर की वजह से छोड़ना समझदारी नहीं है.

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निवेशकों की नजर में 'भूतिया घर' नहीं, सस्ता एसेट

जिको बुकेन अब सिर्फ सस्ते घर नहीं, बल्कि रियल एस्टेट निवेश का एक अलग मॉडल भी बन चुके हैं. जापान के नियमों के मुताबिक, किसी प्रॉपर्टी में हुई घटना की जानकारी देने से जुड़े नियम समय के साथ बदल जाते हैं. कई मामलों में तय अवधि बीतने के बाद मकान मालिकों पर पुरानी घटना बताने की बाध्यता नहीं रहती.

यही वजह है कि कुछ निवेशक ऐसी प्रॉपर्टी को भारी डिस्काउंट पर खरीदते हैं, उसे रेनोवेट करते हैं और बाद में बेहतर कीमत पर किराए या बिक्री के लिए इस्तेमाल करते हैं. यानी जिस घर को कभी लोग बदकिस्मती की निशानी मानते थे, वही अब कुछ लोगों के लिए कम लागत वाला निवेश अवसर बन गया है.

भूतों की तलाश भी बनी कमाई का जरिया, जापान में शुरू हुआ 'घोस्ट इन्वेस्टिगेशन' बिजनेस

जापान में जिको बुकेन यानी कथित भूतिया घरों का ट्रेंड सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहा. अब इन घरों से जुड़ा एक नया और हैरान करने वाला बिजनेस भी खड़ा हो गया है. कुछ कंपनियां ऐसे मकानों की जांच के लिए 'घोस्ट इन्वेस्टिगेशन सर्विस' उपलब्ध करा रही हैं, ताकि मालिक अपने घर से जुड़ी डर की छवि को खत्म कर सकें और उसे आसानी से बेच या किराए पर दे सकें.

रियल एस्टेट कंपनियों के लिए यह एक नई तरह की सर्विस है. जापान की कुछ एजेंसियां प्रोफेशनल 'हॉन्टेड हाउस सिटर' या घोस्ट इन्वेस्टिगेटर को ऐसे घरों में भेजती हैं. ये लोग पूरी रात अकेले उस प्रॉपर्टी में रहते हैं और थर्मल कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस और दूसरे विशेष उपकरणों की मदद से किसी भी असामान्य गतिविधि की जांच करते हैं.

एक रात के लिए 50 हजार रुपये से ज्यादा, लेकिन मकसद डर खत्म करना

इस अनोखे काम के लिए इन जांचकर्ताओं को अच्छी खासी रकम मिलती है. ‘निक्की एशिया’ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक रात की जांच के लिए उन्हें करीब 88,000 जापानी येन यानी 50 हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जाता है. अगर पूरी रात की जांच में कोई असामान्य घटना सामने नहीं आती, तो कंपनी की ओर से एक सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है.

यह सर्टिफिकेट सिर्फ एक कागज नहीं, बल्कि खरीदारों के मन में बैठे डर को कम करने का जरिया बनता है. इससे मकान मालिकों को अपनी प्रॉपर्टी बेचने या किराए पर देने में आसानी होती है और एक समय पर बेकार समझे जाने वाले घर दोबारा बाजार का हिस्सा बन जाते हैं.

खाली घरों की समस्या का जापानी समाधान

जापान की हाउसिंग मिनिट्री के मुताबिक इस समय देश में तेजी से बूढ़ी होती आबादी और लाखों खाली पड़े मकानों की समस्या से जूझ रहा है. ऐसे में जिको बुकेन को लेकर बदली सोच सिर्फ रियल एस्टेट का ट्रेंड नहीं, बल्कि खाली संपत्तियों को दोबारा इस्तेमाल में लाने की एक व्यावहारिक कोशिश भी है. डर से जुड़े इन घरों को अब जापान एक समस्या नहीं, बल्कि एक नए आर्थिक अवसर के रूप में देखना शुरू कर चुका है.

जापान में महंगे घरों का संकट, भारत में सस्ते लोन का बूम 

एक तरफ जापान है, जहां घर खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है और बढ़ती ब्याज दरें खरीदारों की चिंता बढ़ा रही हैं. दूसरी तरफ भारत है, जहां कम होती ब्याज दरों और मजबूत मांग ने रियल एस्टेट मार्केट को नई रफ्तार दी है. साल 2024 से 2026 के बीच दोनों देशों के हाउसिंग मार्केट में ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जहां एक ही समय में दो बिल्कुल अलग कहानियां चल रही हैं.

‘ग्लोबल प्रॉपर्टी गाइड’ के मुताबिक जहां जापान में महंगी प्रॉपर्टी और बढ़ती मॉर्गेज दरों ने लोगों को सस्ते विकल्प तलाशने पर मजबूर किया, वहीं भारत में आसान होम लोन और बढ़ती आय की उम्मीद ने घर खरीदने वालों का भरोसा मजबूत किया है.

जापान में घरों की कीमतों में तेज उछाल, खासकर टोक्यो में रिकॉर्ड तेजी

जापान में लंबे समय तक सुस्त रहने वाला रियल एस्टेट मार्केट अब तेजी दिखा रहा है. पिछले कुछ वर्षों में देशभर में घरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. खासतौर पर टोक्यो और आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया है.

टोक्यो में नए अपार्टमेंट्स की कीमतों में दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसकी बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, सीमित जमीन और राजधानी क्षेत्र में बढ़ती मांग है. नतीजा यह हुआ कि आम जापानी खरीदारों के लिए घर खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल होता गया.

भारत में भी बढ़ीं कीमतें, लेकिन मांग का इंजन तेज रहा

भारत का रियल एस्टेट मार्केट भी तेजी के दौर से गुजर रहा है, लेकिन यहां कहानी थोड़ी अलग है. देश के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. खासकर बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है.

हालांकि भारत में कीमतों के साथ-साथ खरीदारों का भरोसा भी मजबूत रहा है. बेहतर रोजगार अवसर, शहरीकरण और होम लोन की कम होती लागत ने घर खरीदने की मांग को बनाए रखा है.

जापान में महंगा हुआ होम लोन, भारत में राहत

रियल एस्टेट की इस कहानी का सबसे बड़ा अंतर होम लोन की ब्याज दरों में दिखाई देता है. जापान ने दशकों तक चली बेहद कम ब्याज दर वाली नीति को बदलते हुए दरें बढ़ानी शुरू कीं. बैंक ऑफ जापान की नीति में बदलाव के बाद वहां मॉर्गेज रेट धीरे-धीरे ऊपर जाने लगीं. जो वेरिएबल होम लोन कभी बेहद कम दरों पर मिलते थे, उनमें अब बढ़ोतरी ने घर खरीदने वालों के बजट पर दबाव बढ़ाया है.

इसके उलट भारत में रिजर्व बैंक की नीतियों ने होम लोन लेने वालों को राहत दी है. रेपो रेट में कटौती के बाद बैंकों ने लोन दरों में कमी की, जिससे 2026 में होम लोन की ब्याज दरें पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो गई हैं.

यही वजह है कि जहां जापान में महंगे घरों और बढ़ती ब्याज दरों ने लोगों को सस्ते विकल्प जैसे जिको बुकेन प्रॉपर्टी की तरफ देखने को मजबूर किया, वहीं भारत में कम ब्याज दरों ने नए घर खरीदने की इच्छा को और मजबूत किया है.

दो देशों की दो तस्वीरें: जापान में महंगे होते घर, भारत में सस्ते होते होम लोन का असर

रियल एस्टेट की दुनिया में जापान और भारत इस समय बिल्कुल अलग दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. एक तरफ जापान में बढ़ती कीमतों और ब्याज दरों ने खरीदारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, तो दूसरी तरफ भारत में कम होती लोन दरों और मजबूत मांग ने हाउसिंग मार्केट को नई गति दी है.

आंकड़ों में देखें तो दोनों देशों की प्रॉपर्टी कहानी में कई समानताएं हैं, लेकिन ब्याज दरों और खरीदारों की क्षमता के मामले में बड़ा अंतर नजर आता है.

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जापान के कथित ‘हॉन्टेड घरों’ का बाजार (ग्राफिक्स-AI)

सोर्स: Financial Times Global Markets  

मुंबई बनाम टोक्यो: तेज रिटर्न बनाम फिक्स इनकम

दुनिया के दो बड़े महानगर मुंबई और टोक्यो सिर्फ अपने देशों की आर्थिक राजधानी नहीं हैं, बल्कि रियल एस्टेट निवेश के सबसे चर्चित बाजारों में भी शामिल हैं. दोनों शहरों में जमीन सीमित है, मांग लगातार बनी रहती है और प्रॉपर्टी की कीमतें आम लोगों के लिए चुनौती बन चुकी हैं. लेकिन निवेशकों के नजरिए से दोनों की कहानी काफी अलग है.

नाइट फ्रैंक ग्लोबल रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई को जहां हाई ग्रोथ और ज्यादा कैपिटल गेन वाले बाजार के तौर पर देखा जाता है, वहीं टोक्यो को स्थिरता, सुरक्षित निवेश और नियमित किराये की आय के लिए पसंद किया जाता है.

किराये से कमाई: टोक्यो आगे, मुंबई पीछे

रियल एस्टेट निवेश में सिर्फ कीमत बढ़ना ही मायने नहीं रखता, बल्कि हर महीने मिलने वाला किराया भी बड़ी भूमिका निभाता है. इस मामले में टोक्यो निवेशकों को ज्यादा भरोसा देता है.

टोक्यो ब्यूरो ऑफ हाउसिंग के आंकड़ों के मुताबिक, टोक्यो में औसत ग्रॉस रेंटल यील्ड करीब 3.3 फीसदी से 4.5 फीसदी के बीच रहती है. शहर के कुछ बाहरी इलाकों में यह 5 फीसदी से 6 फीसदी तक पहुंच जाती है. साथ ही टोक्यो में करीब 96 फीसदी की ऊंची ऑक्यूपेंसी दर निवेशकों को लगातार किराये की आय का भरोसा देती है.

इसके उलट मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें भले तेजी से बढ़ती हैं, लेकिन किराये से मिलने वाला रिटर्न अपेक्षाकृत कम है. लायसेस फोरास रियल एस्टेट रिसर्च के अनुसार, मुंबई में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की रेंटल यील्ड आमतौर पर 2 फीसदी से 3 फीसदी के बीच रहती है. यानी मुंबई में निवेश का बड़ा फायदा किराये से नहीं, बल्कि भविष्य में कीमत बढ़ने से जुड़ा होता है.

कीमतों की रफ्तार: मुंबई की छलांग, टोक्यो की नियंत्रित तेजी

2024 से 2026 के बीच मुंबई के रियल एस्टेट बाजार ने जबरदस्त तेजी दिखाई है. क्रेडाई महाराष्ट्र रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ प्रमुख इलाकों में प्रॉपर्टी कीमतों में सालाना बढ़ोतरी 14 फीसदी तक दर्ज की गई. मुंबई कोस्टल रोड, नए मेट्रो नेटवर्क और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने कई इलाकों की कीमतों को नई ऊंचाई दी है.

दूसरी तरफ टोक्यो में भी प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज उछाल आया है. जापान रियल एस्टेट इंस्टीट्यूट (JREI) के अनुसार, टोक्यो के प्राइम इलाकों में कॉन्डोमिनियम की कीमतें पिछले कुछ वर्षों में 10 फीसदी से 14 फीसदी तक बढ़ी हैं. हालांकि इसकी बड़ी वजह कमजोर जापानी येन और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी रही है. घरेलू बाजार में लंबे समय तक जापान की प्रॉपर्टी ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी रही है.

होम लोन का गणित: मुंबई में पॉजिटिव लेवरेज, टोक्यो में घटता मार्जिन

प्रॉपर्टी खरीदने वाले निवेशकों के लिए ब्याज दरें सबसे बड़ा फैक्टर होती हैं. मुंबई में होम लोन की दरें घटकर करीब 7.10 फीसदी से 7.65 फीसदी के स्तर पर आ गई हैं. वहीं कुछ प्रीमियम इलाकों में प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ने से निवेशकों को 12 फीसदी से 14 फीसदी तक का सालाना रिटर्न मिलने की संभावना रहती है. इसे रियल एस्टेट की भाषा में पॉजिटिव लेवरेज कहा जाता है.

इसके विपरीत टोक्यो में मॉर्गेज रेट बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है. निक्केई रियल एस्टेट रिपोर्ट के अनुसार, फिक्स्ड मॉर्गेज दरें बढ़कर करीब 1.8 फीसदी से 2.3 फीसदी तक पहुंच चुकी हैं. जब किराये से मिलने वाली औसत आय करीब 3.3 फीसदी के आसपास हो, तो लोन लेकर निवेश करने वालों के लिए मुनाफे का अंतर काफी कम हो जाता है.

निवेश का आकार और बाजार की ताकत 

मुंबई के प्रीमियम इलाकों जैसे दक्षिण मुंबई और बांद्रा में प्रॉपर्टी की कीमतें देश की सबसे ऊंची दरों में शामिल हैं. महाराष्ट्र स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में मुंबई में संपत्तियों की खरीद-बिक्री गतिविधि मजबूत बनी हुई है.

वहीं टोक्यो विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक बाजार है क्योंकि जापान में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए विदेशी नागरिकों पर कई देशों की तुलना में कम प्रतिबंध हैं. हालांकि, टोक्यो के प्राइम इलाकों में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से नए निवेशकों के लिए वैल्यूएशन का सवाल भी खड़ा हो रहा है.

कुल मिलाकर देखें तो मुंबई उन निवेशकों के लिए आकर्षक है जो तेज कैपिटल ग्रोथ चाहते हैं, जबकि टोक्यो उन लोगों को पसंद आता है जो स्थिर किराये और सुरक्षित लॉन्ग टर्म निवेश को प्राथमिकता देते हैं.

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निवेशक को चुनना होगा अपना लक्ष्य

रियल एस्टेट निवेश में कोई एक शहर हर किसी के लिए सबसे बेहतर नहीं होता. चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक क्या चाहता है. अगर लक्ष्य है तेज कैपिटल ग्रोथ, बढ़ती प्रॉपर्टी वैल्यू और अगले 5 से 7 साल में बड़ा रिटर्न हासिल करना, तो मुंबई जैसे हाई-ग्रोथ मार्केट ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. हालांकि इसके लिए कम शुरुआती रेंटल इनकम और ज्यादा कीमतों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा.

वहीं, अगर कोई निवेशक ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाना चाहता है और उसे स्थिर किराये की आय, कम जोखिम और लंबे समय की सुरक्षा चाहिए, तो टोक्यो एक मजबूत विकल्प बन सकता है. ग्लोबल वेल्थ मैनेजमेंट रिव्यू के अनुसार, विकसित देशों के स्थिर रियल एस्टेट बाजार अक्सर उन निवेशकों को आकर्षित करते हैं जो नियमित आय और पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं.

यानी एक तरफ मुंबई है, जहां सपनों के शहर की तरह तेजी और संभावनाओं की दौड़ है, तो दूसरी तरफ टोक्यो है, जहां स्थिरता और भरोसे की ताकत है. अंत में सही निवेश वही है जो आपकी आर्थिक क्षमता, जोखिम लेने की इच्छा और भविष्य के लक्ष्य से मेल खाता हो. 

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