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इंडिगो की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, मुनाफे में भारी गिरावट, शेयर धड़ाम

इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने दिसंबर तिमाही में अपने कंसॉलिडेटेड मुनाफे में साल-दर-साल आधार पर 77.55% की बड़ी गिरावट दर्ज की.

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इंटरग्लोब एविएशन के मुनाफे में भारी गिरावट आई है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

इंडिगो की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. कंपनी को सालाना आधार पर अब भयंकर घाटा हुआ है. इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन प्राइवेट लिमिटेड  ने अपने तीसरी तिमाही (एक अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 ) के नतीजे घोषित किये हैं. इंटरग्लोब एविएशन ने दिसंबर तिमाही में अपने कंसॉलिडेटेड मुनाफे में साल-दर-साल आधार पर 77.55% की भारी गिरावट दर्ज की. कंपनी ने तीसरी तिमाही में 549.8 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ बताया.

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इंडिगो के शेयरों में भारी गिरावट 

मुनाफे में भारी गिरावट की खबर सामने आने के बाद  इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में शुक्रवार, 23 जनवरी को भारी गिरावट देखने को मिली. बीएसई यानी बांबे स्टॉक एक्सचेंज पर इंडिगो का शेयर पिछले बंद भाव 4,913.80 रुपये के मुकाबले गिरकर 4,840.10 रुपये पर खुला. शुरुआती कारोबार में यह करीब 4% टूटकर 4,723.60 के इंट्राडे लो तक चला गया. बाद में इसमें कुछ रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन 23 जनवरी को कंपनी का शेयर लाल निशान में ही कारोबार कर रहा था.

इंडिगो का मुनाफा क्यों गिरा?

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडिगो को घाटे का मुख्य कारण नए लेबर कानूनों के लागू होने से कंपनी को एक साथ काफी पैसा खर्च करना पड़ा है. नए श्रम कानूनों के लागू होने के बाद कंपनियों को कर्मचारियों से जुड़े कई पुराने बकाया भुगतानों का निपटान एक साथ करना पड़ा. इसमें वे सुविधाएं और भुगतान शामिल थे जो पहले पूरी तरह लागू नहीं थे या आंशिक रूप से दिए जाते थे जैसे ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े फायदे. इससे कंपनियों पर एकमुश्त बड़ा खर्च आया.

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इसके साथ ही PF, पेंशन और ESIC के मद में होने वाला खर्च भी बढ़ा है. इसके अलावा कंपनी को सैलरी स्ट्रक्चर में भी बदलाव करना पड़ा. नए कानूनों के अनुसार बेसिक सैलरी का रेशियो बढ़ाना जरूरी हो गया. बेसिक सैलरी बढ़ने से PF, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना भी ज्यादा रकम पर होने लगी. इसका सीधा असर कंपनी के खर्च पर पड़ा और कुल वेतन लागत में इजाफा हो गया. इन वजहों से कंपनी को करीब 969.3 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े हैं. हालांकि, मुनाफा घटने के बावजूद इंडिगो की आय में बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा, रुपये की कमजोरी और ईंधन के दाम बढ़ने की आशंका से निवेशकों ने इंडिगो के शेयरों में बिकवाली की है. जानकारों को लग रहा है कि कंपनी भविष्य में विमानों की कमी का सामना कर सकती है और किराये पर लिये गए विमानों की लागत में इजाफा हो सकता है.

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

ब्रोकरेज फर्म  एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इंडिगो को शेयर को लेकर अपनी खरीदारी की रणनीति बरकरार रखी है. कंपनी ने इसका टारगेट प्राइस 6,300 रुपये  तय किया है. ब्रोकरेज को उम्मीद है कि समय के साथ इंडिगो के परिचालन और ग्रोथ में धीरे-धीरे सुधार आएगा. एमके का मानना है कि वित्त वर्ष 2027-28  तक टैक्स लॉस का फायदा कंपनी को मिलता रहेगा. ब्रोकरेज फर्म ने रुपया कमजोर होने, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव, आर्थिक सुस्ती और कामकाज से जुड़ी दिक्कतों को लेकर आगाह भी किया है.
 

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