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1500 रुपये में बिक रहा LPG सिलेंडर, क्या भारत में घरेलू गैस की कमी हो गई?

ईरान में चल रहे युद्ध के बीच दिल्ली एनसीआर समेत देशभर के कई शहरों और कस्बों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी लंबी कतारे देखने को मिल रही हैं.

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देशभर के कई शहरों और कस्बों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी लंबी कतारे देखने को मिल रही हैं (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

ईरान में चल रहे युद्ध के बीच दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के कई शहरों और कस्बों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी लंबी कतारे देखने को मिल रही हैं. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया कि सोमवार 9 मार्च को नोएडा के सेक्टर-22 में भारत गैस एजेंसी के बाहर खाली एलपीजी सिलेंडर लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गईं. दिल्ली एनसीआर ही नहीं देश के अलग-अलग इलाकों से इस तरह की वीडियो सामने आ रहे हैं. 

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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के बर्डपुर गांव से एक वायरल वीडियो सामने आया है जिसमें कम से कम 100 लोग गैस एजेंसी के बाहर अपने खाली एलपीजी सिलेंडरों पर बैठे नजर आ रहे हैं. यह वीडियो 7 मार्च को वायरल हुआ था. हालांकि, इंडिया टुडे डिजिटल से बात करने वाले कई लोगों ने बताया कि एलपीजी की सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं है. केंद्र सरकार ने भी एलपीजी संकट जैसी किसी भी खबरों को खारिज कर दिया है लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में रहने वाली महिला ने दावा किया कि उसे 1500 रुपये में घरेलू एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा. 

दक्षिण दिल्ली में ग्राहकों को सिलेंडर पहुंचाने वाले इंडेन गैस के एक डिलीवरी पार्टनर ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि उन्होंने पिछले 4-5 दिनों से लोग हड़बड़ी में सिलेंडर खरीदते नजर आ रहे हैं जबकि गैस सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं हैं लेकिन फिर भी एजेंसी के बाहर भीड़ जमा हो जाती है.

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एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग की समय सीमा बढ़ाकर 21 दिन हुई

अमेरिका और इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से गैस की सप्लाई में कमी की आशंका पैदा हुई है. सरकार ने पिछले सप्ताह एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया है. भारत अपनी एलपीजी की लगभग दो-तिहाई मांग विदेशों से खरीदकर पूरी करता है. भारत अपनी जरूरत की गैस का बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से खरीदता है. ये गैस होर्मुज जलडमरूमध्य  (Straits of Hormuz) से होकर भेजे जाते हैं. 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. भारत के एलपीजी आयात का लगभग 80% हिस्सा फारस की खाड़ी स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. टाइम्स ऑफ इंडिया ने 7 मार्च को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों, खासतौर से कोलकाता और आसपास के जिलों में पिछले 5-6 छह दिनों में एलपीजी की बुकिंग में लगभग 15%-20% का इजाफा हुआ है. 

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बुकिंग में अचानक हुई बढ़ोतरी को देखते हुए तेल और गैस कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियम में बदलाव किया है. अब एक सिलेंडर बुक करने के बाद अगली बुकिंग के लिए इंतजार करने का समय 15 दिन की जगह 21 दिन होगा. जो ग्राहक दो सिलेंडर बुक करते हैं तो उनके लिए दो बुकिंग के बीच का समय 30 दिन होगा. इस बीच, अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भारत में गैस की कमी नहीं है. सरकारी और उद्योग जगत के सूत्रों का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त एलपीजी भंडार हैं.

शहरों और कस्बों से मिली जमीनी रिपोर्टों से एलपीजी बुकिंग में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. सरकारी आश्वासनों के बावजूद, कई राज्यों में लोग घबराकर खरीदारी करने लगे हैं. कुछ दिन पहले जो लंबी कतारें लगी थीं, वे सोमवार को भी जारी रहीं. 9 मार्च की सुबह नोएडा में भारत गैस एजेंसी के बाहर दर्जनों लोग खड़े दिखे. इस भीड़ में से एक नोएडा सेक्टर 22 के निवासी नरेंद्र कुमार ने कहा, “गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ गई है. ईरान में युद्ध चल रहा है. मैंने पांच दिन पहले एलपीजी रिफिल बुक किया था, लेकिन अभी तक घर नहीं पहुंचा है.” 

उन्होंने आगे बताया कि वे बुकिंग के बारे में पता लगाने के लिए एजेंसी आए थे. शायद भीड़ इसलिए भी थी क्योंकि एजेंसी रविवार को बंद थी. अब वो सब एजेंसी के खुलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि मामला क्या है."

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उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और एलपीजी के लिए लंबी कतारें 

समाचार एजेंसी पीटीआई ने 6 मार्च को बताया कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खेरी जिले में, ईंधन राशनिंग की संभावना की अफवाहें फैलने के बाद, निघासन, पल्लिया और भीरा जैसे कस्बों में पेट्रोल पंपों और एलपीजी एजेंसियों पर लंबी कतारें लग गईं. हैदराबाद, रांची, कोलकाता और गोवा के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह की लंबी कतारें देखी गईं, जहां बुकिंग प्रतिबंध लागू होने से पहले एलपीजी की बुकिंग में भारी उछाल आया था. 

श्मशान घाटों पर गैस से अंतिम संस्कार पर रोक लगी

महाराष्ट्र के सबसे बड़े श्मशान घाट पुणे स्थित वैकुंठ धाम में एलपीजी की भारी कमी के कारण गैस आधारित सभी अंतिम संस्कार अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं. अधिकारियों ने इंडिया टुडे को यह जानकारी दी. यह कदम सरकार द्वारा घरेलू एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता देने के कारण भी उठाया गया है.

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क्या वाकई गैस की कमी हो गई है?

एलपीजी एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारों के नजारों के बावजूद सरकारी अधिकारियों ने यह दावा किया है कि भारत में एलपीजी की कोई कमी नहीं है. सरकारी सूत्रों ने 3 मार्च को द हिंदू अखबार को बताया कि भारत के पास 25 से 30 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त एलपीजी स्टॉक और भंडार हैं. रिफाइनरियां भी उत्पादन बढ़ा रही हैं. एनर्जी एक्सपर्ट चेतन भूटानी ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि जरूरत पड़ने पर रणनीतिक भंडार लगभग 15 से 20 दिनों तक एलपीजी की मांग को पूरा कर सकते हैं. वहीं, देश में कच्चे तेल का 40-45 दिन का स्टॉक है. 

एक सूत्र ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि जनवरी से अमेरिका से एलपीजी भारत में आनी शुरू हो गई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिका से लगभग 2.2 मीट्रिक टन हर साल एलपीजी आयात करने के लिए एक साल का अनुबंध किया था. इसलिए, ये लंबी कतारें सप्लाई में भारी कमी के बजाय घबराहट में की गई बुकिंग का नतीजा हैं.

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