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पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी में भारत, क्यों लिया सरकार ने यह फैसला?

भारत रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मामले में दुनिया के सबसे बड़े एक्सपोर्ट्स में से एक है. खबर है कि ये एक्सपोर्ट और बढ़ने वाला है क्योंकि सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) दिसंबर 2026 तक अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी बढ़ाने जा रही है.

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भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी में है. (इंडिया टुडे)

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  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) दिसंबर 2026 तक अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी को 80.75 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 98.05 मिलियन मीट्रिक टन करने जा रही है।
  • भारत की करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात की जाती है, लेकिन देश रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स में है क्योंकि घरेलू रिफाइनिंग कैपेसिटी अधिक है।
  • रिफाइनिंग कैपेसिटी वृद्धि से IOCL के एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो कंपनी की कुल आय पर असर डालेगी।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि इससे बनने वाले रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मामले में दुनिया के सबसे बड़े एक्सपोर्टर्स में से एक है. पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत के पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट 44.4 अरब डॉलर (लगभग 4 लाख 23 हजार करोड़) था. ये आने वाले कुछ सालों में एक चौथाई तक बढ़ सकता है.

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रिफाइनिंग कैपेसिटी बढ़ाएगा इंडियन ऑयल

इसकी वजह ये है कि सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) दिसंबर 2026 तक अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी बढ़ाने जा रही है. यह कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा एक्सटेंशन प्रोग्राम है. 75 हजार करोड़ के इस एक्सटेंशन प्रोजेक्ट में अब तक 53 हजार 500 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, IOCL की सालाना रिफाइनिंग कैपेसिटी फिलहाल 80.75 मिलियन मीट्रिक टन है. कैपेसिटी बढ़ाने के बाद इसकी सालाना कैपिसिटी 98.05 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगी. कंपनी के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि घरेलू जरूरतें पूरी करने के बाद जो भी एक्स्ट्रा कैपेसिटी बचेगी, उसको एक्सपोर्ट किया जाएगा. इससे कंपनी के कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी 5 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी तक हो सकती है.

नवंबर-दिसंबर 2026 तक चालू होंगे नए प्रोजेक्ट

IOCL के अधिकारी ने बताया कि कंपनी किसी तय एक्सपोर्ट टारगेट के साथ काम नहीं करती है. उसकी प्राथमिकता हमेशा घरेलू बाजार ही रहती है. इस एक्सटेंशन में पानीपत, वड़ोदरा और बरौनी की रिफाइनरियां शामिल हैं. पानीपत की रिफाइनरी की कैपेसिटी 15 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 25 मिलियन मीट्रिक टन, वड़ोदरा की 13.7 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 18 मिलियन मीट्रिक टन और बरौनी की कैपेसिटी 6 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़ाकर 9 मिलियन मीट्रिक टन की जा रही है. ये तीनों प्रोजेक्ट नवंबर-दिसंबर 2026 तक चालू हो जाएंगे.

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फिलहाल भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी लगभग 258.1 मिलियन मीट्रिक टन है, जबकि देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की खपत लगभग 239 मिलियन मीट्रिक टन है. रिफाइनरीज आमतौर पर अपनी कैपेसिटी के 105-115 % पर काम करती हैं. इससे सालाना प्रोडक्शन लगभग 300 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच जाता है. इस तरह करीब 61.5 मीट्रिक टन का सरप्लस प्रोडक्शन एक्सपोर्ट कर दिया जाता है. 

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