सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार, 10 जुलाई को एक पिटीशन पर सुनवाई चल रही थी. पिटीशनर अपनी बात कह रहा था. जस्टिस केवी विश्वनाथन और आलोक अराधे की बेंच उसे सुन रही थी. तभी अपनी बात रखते-रखते वह शख्स आपा खो बैठा. जजों के सामने ही कागज उछालकर ‘अपशब्द’ कहने लगा. इसके बाद कोर्ट के सुरक्षाकर्मी उसे बाहर ले जाते हैं. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने शख्स ने CJI को 'गाली' दी, पेपर्स फेंके, फिर...
Supreme court man throw papers: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक शख्स ने बेंच के सामने हंगामा किया. पेपर उछाल दिए. अपशब्द का इस्तेमाल किया. ये घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन और आलोक अराधे की बेंच के सामने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई.


घटना सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई. वायरल वीडियो में आरोपी शख्स अपनी पैरवी खुद करता दिख रहा है. इसमें वह बेंच को ‘मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहकर संबोधित करता है. साथ ही, बेंच को ‘आदेश देने’ जैसी बात भी कहता है, जिससे जज भी चौंक जाते हैं. अपनी बात शुरू करते हुए आरोपी ने कहा,
मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट. मैं आपको ACP लखनऊ के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए ऑर्डर देने का ऑर्डर देता हूं.
ये सुनकर जस्टिस विश्वनाथन हैरानी के साथ पूछते हैं,
आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं? आप हमें ऑर्डर दे रहे हैं?
आगे शख्स बेंच को कहता है कि,
मेरी तरफ से बस इतना ही. सब कुछ रिकॉर्ड पर है. यह मेरे पास पेपर्स हैं.
ये कहते हुए आरोपी हवा में सभी पेपर्स फेंक देता है. फिर माइक के पास आकर जज के सामने ‘सीजेआई’ का नाम लेकर अपशब्द तक बोल जाता है. इसके बाद सुरक्षाकर्मी उसे कोर्टरूम से बाहर ले जाते हैं.
शख्स पर कार्रवाई न करने का फैसलाहंगामे के बावजूद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आरोपी के खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ या कोई अन्य ‘दंडात्मक कार्रवाई’ नहीं करने का फैसला किया है. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, आदेश सुनाते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा,
हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते. जहां तक मामले के गुण-दोष की बात है, हमने रिकॉर्ड देख लिए हैं. हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला. स्पेशल लीव पिटिशन खारिज की जाती है.
जज ने टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि वह (शख्स) बहुत परेशान हैं. उनके मन में उसके प्रति सिर्फ सहानुभूति है.
क्यों कोर्ट गया था शिकायतकर्ताNDTV ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पिटीशनर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. वह स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम्स), लखनऊ के एक आदेश को चुनौती दे रहा था, जिसमें मजिस्ट्रेट ने निर्देश दिया था कि FIR दर्ज करने का ऑर्डर देने के बजाय उसकी एप्लीकेशन को प्राइवेट कंप्लेंट माना जाए.
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मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पिटीशनर के पास ट्रायल कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ एक असरदार वैकल्पिक तरीका था. इसलिए कोर्ट ने उसे सही फोरम के समक्ष जाने की की आजादी देते हुए रिट पिटिशन खारिज कर दी. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण न पाते हुए स्पेशल लीव पिटीशन पर आगे सुनवाई से मना कर दिया. इससे मामला खत्म हो गया.
2025 में भी हुआ था ऐसा मामला6 अक्टूबर, 2025 को भी ऐसी ही एक घटना हुई थी. उस समय सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील ने अपना जूता उतारकर पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई पर फेंकने की कोशिश की थी. सुरक्षाकर्मी बीच-बचाव करते हुए उन्हें कोर्ट से बाहर ले गए थे. बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने उनकी सदस्यता खत्म कर दी. बाद में CJI गवई ने जोर देकर कहा कि आरोपी वकील के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए.
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