कुछ समय पहले तक भारत में तेल और गैस का संकट था. अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आ गई थी. इसके चलते देश के कई इलाकों में लोग पेट्रोल पंपों पर लंबी कतार में खड़े नजर आए. इतना ही नहीं, एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और यहां तक कि कालाबाजारी की खबरें भी सामने आने लगीं. सरकार लोगों को आश्वस्त करती रही कि ईंधन की बचत करें.
नायरा के बाद सरकारी कंपनियां भी घटाएंगी पेट्रोल-डीजल के रेट? कब तक हो सकता है फैसला?
तीन हफ्ते पहले तक देश में तेल और गैस को लेकर काफी चिंता जताई जा रही थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदले नजर आ रहे हैं. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 183 रुपये कम हो गई है. नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कमी की है.


इसी के तहत 11 जून को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए गए. प्रति ग्राहक रोजाना डीजल की खरीद को 200 लीटर तक सीमित कर दिया. बड़ी मात्रा में तेल खरीदाने वाले लोगों और कंपनियों को पेट्रोल पंपों से डीजल की खरीद पर रोक लगा दी गई. राज्य सरकारों को यह भी निर्देश दिया गया कि वे तेल और गैस की जमाखोरी, कालाबाजारी और अनधिकृत खरीद पर नकेल कसें.
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तीन हफ्ते पहले तक देश में तेल और गैस को लेकर काफी चिंता जताई जा रही थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदले नजर आ रहे हैं. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 183 रुपये कम हो गई है. निजी तेल रिफाइनिंग कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की कमी की है.
केंद्र सरकार ने डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को कम किया है. घरेलू एयरलाइंस को भी राहत मिली है, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है.
इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज से तेल के टैंकर धीरे-धीरे फिर से आने शुरू हो चुके हैं. इसके चलते कच्चे तेल के दाम गिरे हैं. 1 जुलाई को सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 73.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड लगभग 69.75 डॉलर पर था.
वहीं, न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर में कच्चे तेल के बाजार को समझने वाले लोगों ने कहा कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम नीचे आएंगे. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग फिर से शुरू होने के बाद विश्लेषकों ने साल 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड के अपने औसत पूर्वानुमान को पिछले महीने अनुमानित 90.44 डॉलर प्रति बैरल से घटाकर 84.50 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है. मौजूदा हालतों से संकेत मिलता है कि मई और जून में जिस तरह से भारत तेल और गैस संकट से जूझ रहा था वह दौर जल्द ही खत्म होने वाला है.
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क्या ऊर्जा संकट पूरी तरह से खत्म हो गया?शायद अभी नहीं. पश्चिमी एशिया में जिस तरह से राजनीतिक हालत पल-पल बदल रहे हैं, उससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित होती रहेंगी. साथ ही होर्मुज में किसी भी प्रकार की बाधा कीमतों को एक बार फिर बढ़ा सकती है. लेकिन ये बात बिल्कुल ठीक है कि पिछले कुछ ही हफ्तों पहले की तुलना में स्थिति में काफी सुधार हुआ है. कच्चे तेल के दाम घटने, एलपीजी की सप्लाई फिर से शुरू होने, कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कमी ये सभी एक ही दिशा की ओर इशारा करते हैं. संकट भले ही खत्म न हुआ हो, लेकिन ऐसा लगता है कि भारत ऊर्जा संकट से निकलकर सामान्य स्थिति में लौट रहा है.
क्या पेट्रोल और डीजल के दाम जल्द घटेंगे?इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि शायद हाल फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम न घटें. लेकिन हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि तेल और गैस का संकट खत्म हो चुका है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि संकट के समाप्त होने की घोषणा करना अभी भी बहुत जल्दबाजी होगी.
इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेंगी. उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ठीक-ठाक कटौती हाल फिलहाल तब तक संभव नहीं है, जब तक कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट न आए. अगर ईरान और होर्मुज के आसपास तनाव नहीं घटता तो भारत की सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में कटौती नहीं करेंगी.
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली ड्यूटी पूरी तरह खत्म की थी, इससे केन्द्र सरकार की कमाई घटी है. इससे आगे टैक्स छूट मिलने की संभावना सीमित हो गई.
मनोरंजन शर्मा ने आगे कहा कि नायरा एनर्जी की तरफ से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी करने के फैसले को अकेले इस बात के सबूत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि भारत की अर्थव्यवस्था रिकवरी के चरण में प्रवेश कर चुकी है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन जीडीपी ग्रोथ, महंगाई, रोजगार, राजकोषीय स्थिरता और बाहरी कारकों से किया जाता है.
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