अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल (2025) अपने परिवार के क्रिप्टोकरेंसी बिजनेस से 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 13,250 करोड़ रुपये) से ज्यादा की कमाई की है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में यूएस ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स (OGE) की तरफ से 30 जून को जारी दस्तावेजों से यह जानकारी मिली है. इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि अब उनकी ज्यादातर कमाई डिजिटल एसेट्स से आती है, जिन्हें उनकी पॉलिसीज से फायदा पहुंचा है.
ट्रंप ने क्रिप्टो को बढ़ावा देने वाले फैसले लेकर खुद 13 हजार करोड़ रुपये कमाए, अब खुला खेल
अमेरिका का दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को बढ़ावा देने वाले कई कदम उठाए. माना जा रहा है कि इससे ट्रंप को खूब फायदा हुआ.


1978 के एक कानून के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को अपनी कमाई और संपत्ति दोनों की घोषणा करना अनिवार्य है. ट्रंप के हालिया दस्तावेजों में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है कि उनकी कंपनियों को वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल से लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 7570 करोड़ रुपये) मिले. वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल एक क्रिप्टो वेंचर है. इस वेंचर की स्थापना ट्रंप और उनके बेटों ने की है.
इस राशि में क्रिप्टो टोकन की बिक्री से करीब 5000 करोड़ रुपये और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल में स्वामित्व हिस्सेदारी की बिक्री से 2400 करोड़ रुपये मिले. इसमें ट्रंप परिवार के सदस्य भी उस आय में हिस्सेदारी के हकदार हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि अपने ट्रंप मीम कॉइन की बिक्री से करीब 6000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की. इन कॉइन्स को जनवरी 2025 में उनके शपथ ग्रहण से कुछ ही घंटे पहले लॉन्च किया गया था.
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ट्रंप ने क्रिप्टो को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाएकमाई से जुड़े खुलासे से यह पता चलता है कि क्रिप्टो ने अमेरिकी राष्ट्रपति की कमाई को किस प्रकार बदल दिया है. उदाहरण के लिए पिछले जून में किए गए खुलासे से पता चला कि उन्होंने वर्ल्ड लिबर्टी में टोकन बिक्री से अपनी कमाई करीब 542 करोड़ रुपये बताई थी, जो इस साल बढ़कर करीब 5000 करोड़ रुपये पर पहुंच गई.
अमेरिका का दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को बढ़ावा देने वाले फैसले किए. जैसे कि ट्रंप सरकार ने स्टेबल कॉइन के लिए नए नियम लागू किए. अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने क्रिप्टो कंपनियों पर पहले जैसी सख्ती कम कर दी.
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