पेट्रोल-डीजल की कीमत कब कम होगी? कब सरकारी तेल कंपनियां दाम में कटौती करेंगी? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद से ये सवाल कई लोगों के मन में हैं. अब 2 जुलाई को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इनका जवाब दिया है.
पेट्रोल-डीजल के दाम कब कम होंगे? हरदीप सिंह पुरी ने बता दिया
Hardeep Singh Puri fuel price: अमेरिका-ईरान जंग के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ गए थे. भारत पर भी इसका असर पड़ा. सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर कई बार प्राइस बढ़ाया. लेकिन अब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम कम हो रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि भारत में तेल की कीमत में कमी कब देखी जाएगी.


पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं, लेकिन भारत में कंपनियां अब भी उस क्रूड ऑयल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे उन्होंने जंग के बीच खरीदा था. उन्होंने बताया कि लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG बेचने के कारण तेल मार्केटिंग कंपनियों को 30 जून तक 74,781 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था.
28 फरवरी को शुरू हुई जंग ने कच्चे तेल की कीमतों पर काफी असर डाला था. ग्लोबल ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई थीं. अमेरिका और इजरायल के बीच समझौते के बाद अब वापस कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं.
इसीलिए सवाल उठा है भारत में तेल की कीमतों में कटौती कब दिखेगी. इस पर हरदीप पुरी ने कहा कि ये आगे ही पता लगेगा. उनके मुताबिक, “अगर ये गिरावट 2-3 महीने तक जारी रहती है, तो देश में भी इसका असर दिख सकता है.”
हरदीप पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित देशों में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 20% और भारत के पड़ोसी देशों में लगभग 35% थी. लेकिन भारत में संकट के दौरान पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ 5.58% रही.
केंद्रीय मंत्री ने प्राइवेट फ्यूल रिटेलर नायरा एनर्जी के पेट्रोल-डीजल की कीमतों के कम करने पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा,
"नायरा ने पेट्रोल की कीमत इसलिए कम की है क्योंकि उसने संकट के समय में इसे 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था. उन्होंने अब बस उस बढ़ी हुई कीमत को वापस लिया है. सिर्फ वही कीमत कम की है. जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने उस समय कीमतें नहीं बढ़ाई थीं."
नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने रिटेल नेटवर्क पर पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर दिया था. कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बाद से रिटेल फ्यूल की कीमतों में यह पहली बड़ी कटौती है.
ये भी पढ़ें: पड़ोसियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी कटौती कर दी, भारत में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?
ऑयल कंपनियां आम तौर पर कच्चा तेल कम से कम दो महीने पहले ही खरीद लेती हैं. इसलिए अब जिस कच्चे तेल को प्रोसेस किया जा रहा है, वह असल में अप्रैल या मई की शुरुआत में खरीदा गया था. जब अंतरराष्ट्रीय कीमत बहुत ज्यादा थी.
वीडियो: 12 हजार करोड़ के दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की ऐसी हालत, सियासत शुरू















