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नौकरी जाने का डर है, इमरजेंसी फंड के लिए अभी से जुट जाएं, तरीके जान लीजिए

कभी एआई तो कभी कॉस्ट कटिंग के नाम पर कंपनियों की तरफ से आए दिन छंटनी की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी -मार्च) में दुनिया की 97 आईटी कंपनियों ने करीब 80 हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया है.

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इमरजेंसी फंड बनाने का सबसे आसान तरीका ये है कि आप अपने खर्चों में कटौती करें (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)

कभी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) तो कभी दूसरी वजहों से कॉस्ट कटिंग के नाम पर कंपनियां आए दिन छंटनी करती नजर आ रही हैं. मिंट की एक खबर में बताया गया है कि साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी -मार्च) में दुनिया की 97 आईटी कंपनियों ने करीब 80 हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया है.

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अगर अचानक किसी की नौकरी चली जाए तो अपनी फाइनेंशियल स्थिति को संभालना जरूरी होता है. इसी मौके पर काम आता है इमरजेंसी फंड. ये आपको ऐसे समय में बिना कर्ज लिए घर का खर्च चलाने का मौका देता है. इमरजेंसी फंड क्या है? क्यों जरूरी है? कितने महीने की सैलरी के बराबर इमरजेंसी फंड रखना जरूरी है? इमरजेंसी फंड कैसे तैयार करें? इन सवालों के जबाव आगे तलाशेंगे.

इमरजेंसी फंड क्या है?

जैसा कि नाम से पता चल रहा, इमरजेंसी फंड, आपातकालीन स्थिति में जरूरत पड़ने वाली रकम है. जैसे अचानक बीमार पड़ जाना या घर या गाड़ी की तुरंत मरम्मत करानी पड़े. कई बार जरूरत पड़ने पर लोग अपना फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वा देते हैं. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी रोक देते हैं. ऐसे समय में अगर आपने इमरजेंसी फंड तैयार कर रखा है तो आपको अपना जरूरी निवेश असमय बंद करने की नौबत नहीं आती है. इसके अलावा इमरजेंसी फंड आपको किसी बैंक से ऊंची ब्याज दरों पर लोन लिए बिना अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की सुविधा देता है.

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कितने महीने की सैलरी के बराबर Emergency Fund जरूरी?

इमरजेंसी फंड का मकसद ऐसे अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करना है जो आपकी रोजाना की जरूरतों या वित्तीय लक्ष्यों पर असर न डालें. इन्वेस्टमेंट एडवाइजर विनोद रावल का कहना है कि ज्यादातर लोग 3 से 6 महीने के लिए जरूरी खर्चों के लिए पैसा अलग रखने का लक्ष्य रखते हैं. उनका कहना है कि अगर आप फ्रीलांसर हैं. अक्सर बीमार पड़ जाते हैं या आपकी कमाई फिक्स नहीं है तो आपको कम से कम 6-12 महीने के खर्चों को कवर करने लायक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए. 

विनोद रावल के मुताबिक इमरजेंसी फंड बनाने का फार्मूला ये है कि आप अपने हर महीने के जरूरी (जिन्हें रोका नहीं जा सकता) खर्चों की लिस्ट बनाएं. इसमें आप अपनी होम लोन या कार लोन की ईएमआई, बिजली का बिल, ग्रॉसरी खर्च, इंटरनेट बिल, बीमा प्रीमियम, बच्चों की स्कूल फीस, एसआईपी वगैरा को शामिल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, मान लीजिए यदि आपका मंथली खर्च 30 हजार रुपये है, इस हिसाब से 6 महीने के जरूरी खर्चों को पूरा करने के लिए आपको 1.80 लाख इमरजेंसी फंड जरूरी होगा.

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इमरजेंसी फंड कैसे तैयार करें ? 

इमरजेंसी फंड बनाने के लिए वित्तीय समझदारी बेहद जरूरी है. हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजीत सिंह का कहना है कि एक बार तय कर लें कि आपको कितने फंड की जरूरत है. रकम तय करने के बाद अपने लक्ष्य को छोटी-छोटी मासिक किस्तों में बांट लें. इस पैसे को लिक्विड म्यूचुअल फंड्स के नाम से जाने जाने वाले शार्ट डेट फंडों में निवेश करें.

लिक्विड म्यूचुअल फंड बैंक एफडी की तुलना में थोड़े बेहतर होते हैं. निवेश करना भी आसान है. इमरजेंसी फंड जुटाने का दूसरा तरीका ये है कि जिस तरह आप घर खरीदने या रिटायमेंट के लिए पैसा एकत्र करते हैं उसी तरह हर महीने सैलरी मिलने पर थोड़ी-थोड़ी रकम अलग रख दें.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के माता सुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ राठौर के मुताबिक इमरजेंसी फंड बनाने का सबसे आसान तरीका ये है कि आप अपने खर्चों में कटौती करें. उनका कहना है कि आपको एकदम से खर्च बंद करने की जरूरत नहीं है. बस अपने गैर जरूरी खर्चों, जैसे हर हफ्ते रेस्तरां जाकर खाने के बजाय इसे घटाकर महीने में एक या दो बार कर दें. सिनेमा ह़ॉल की जगह घर पर फिल्में देखें. गैर-जरूरी शॉपिंग को भी सीमित कर आप अपने भविष्य की जरूरतों के लिए फंड जुटा सकते हैं.

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