साल 1980. जनता पार्टी से अलग होने के बाद जनसंघ धड़े ने नई पार्टी बनाई. नाम रखा भारतीय जनता पार्टी. केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली से सटे हरियाणा में पार्टी के विस्तार के लिए डॉ. कमला वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, जोकि पेशे से डॉक्टर थीं. 43 साल बाद फिर से बीजेपी ने किसी महिला को हरियाणा की कमान दी है. संयोग से वे भी पेशे से डॉक्टर हैं. नाम है डॉ. अर्चना गुप्ता.
4 दशक बाद एक महिला के हाथ हरियाणा बीजेपी की कमान, कौन हैं डॉ. अर्चना गुप्ता?
डॉ. अर्चना के अलावा अंबाला से पूर्व मंत्री असीम गोयल के नाम पर भी चर्चा हुई. गोयल को सीएम नायब सैनी का करीबी माना जाता है. वहीं अर्चना गुप्ता को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संगठन के करीबी के तौर पर देखा जाता है.


डॉ. अर्चना गुप्ता को मोहन लाल बड़ौली की जगह प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है. पहले माना जा रहा था कि बड़ौली को दोबारा मौका मिल सकता है. वे हर मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ दिख भी जाते थे. लेकिन पार्टी हाईकमान ने उनकी जगह अर्चना गुप्ता के नाम पर मुहर लगाई.
डॉ. अर्चना के अलावा अंबाला से पूर्व मंत्री असीम गोयल के नाम पर भी चर्चा हुई. गोयल को सीएम नायब सैनी का करीबी माना जाता है. वहीं अर्चना गुप्ता को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और संगठन के करीबी के तौर पर देखा जाता है.
कौन हैं डॉ. अर्चना गुप्ता?
डॉ. अर्चना गुप्ता का जन्म 20 जनवरी 1968 को हुआ. पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं. PGI रोहतक से रेडियोलॉजी में एमडी की डिग्री हासिल की है. पति डॉ. अनिल गुप्ता भी डॉक्टर हैं. पानीपत के पास इनका एक हॉस्पिटल चलता है. अर्चना गुप्ता ने विश्व हिंदू परिषद से सार्वजनिक जीवन में एंट्री की.
साल 2010 से 2016 तक VHP की जिला संयोजक रहीं. उसके बाद बीजेपी महिला मोर्चा में जगह मिली. साल 2020 में पहले पानीपत बीजेपी की महिला विंग की अध्यक्ष बनीं. फिर पानीपत बीजेपी की अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद साल 2023 में बड़ी सियासी तरक्की हुई. प्रदेश महामंत्री का पद मिला. अक्टूबर 2024 में हुए हरियाणा चुनाव में पानीपत से टिकट की दावेदार थीं. टिकट तो नहीं मिला, लेकिन साल भर बाद प्रदेश अध्यक्ष पद मिल गया.
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अर्चना गुप्ता ने कहा,
हरियाणा में महिला को प्रदेश अध्यक्ष बनाना महिलाओं के सम्मान का बड़ा उदाहरण है. मैं संगठन को मजबूत करने और बीजेपी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करूंगी.
महामंत्री को अध्यक्ष बनाने की परिपाटी
डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे कई सियासी समीकरण है. इनमें से एक महामंत्री को अध्यक्ष बनाने की परंपरा भी है. मोहनलाल बड़ौली अध्यक्ष बनने से पहले महामंत्री थे. वहीं उनसे पहले सीएम नायब सिंह सैनी भी अध्यक्ष बनने से पहले महामंत्री के पद पर थे.
महिला वोट बैंक पर फोकस
हरियाणा में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी तेजी से बढ़ी है. पंचायत से लेकर नगर निकाय चुनाव तक उनकी मजबूत उपस्थिति दिखने लगी है. बीजेपी महिला सुरक्षा, उज्ज्वला, आयुष्मान और सेल्फ हेल्फ ग्रुप जैसी योजनाओं को महिला नेतृत्व से जोड़कर बड़ा नैरेटिव बनाना चाहती है.
गैर जाट समीकरण को और मजबूती देना
प्रदेश में बीजेपी पहले ही ओबीसी चेहरे के तौर पर नायब सिंह सैनी को आगे कर चुकी है. अब महिला वैश्य चेहरा देकर पार्टी वैश्य, पंजाबी और शहरी वोटर्स को साधने की कोशिश में हैं. शहरी इलाकों में यह वोट बैंक निर्णायक है.
मनोहर लाल खट्टर और संगठन की करीबी
अर्चना गुप्ता प्रदेश महामंत्री रही हैं. पार्टी संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है. वहीं उनको पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है. खट्टर केंद्र की राजनीति करते हुए भी हरियाणा की सियासत में अहम फैक्टर हैं. साथ ही बीजेपी ने राज्य में महिला रिजर्वेशन बिल के पक्ष में माहौल बनाने के लिए भी अर्चना गुप्ता को मोर्चे पर सबसे आगे रखा था. अब उनको अध्यक्ष बनाकर पार्टी संदेश देना चाहती है कि बीजेपी महिला नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ी है.
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