अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में शुरुआती नतीजों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी पिछड़ गई है. ऐसे में शेयर बाजार निवेशक US मिडटर्म इलेक्शन पर करीब से नजर रख रहे हैं. इन नतीजों का असर अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है. मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखना तय है.
US मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की करारी हार से कितना बदलेगा भारत के शेयर बाजार का ट्रेंड?
अमेरिका में आए मिडटर्म चुनाव के नतीजों का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. भारत के शेयर बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ना तय है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन चुनावों में मिली हार की वजह से डॉनल्ड ट्रंप की मनमानी पर लगाम लग सकता है.

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजे भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या मायने रखते हैं. इसे डिटेल में समझते हैं. पहले भारतीय शेयर बाजार के मौजूदा स्थिति के बारे में जान लेते हैं. कई दिनों की गिरावट के बाद 2 नवंबर से भारतीय शेयर बाजार में तेजी की शुरुआत हुई. इसके बाद 3 और 4 नवंबर को भी बाजार में तेजी जारी रही. 4 नवंबर तक भारतीय शेयर बाजार लगातार तीन कारोबारी सत्रों से चढ़ रहा था. बुधवार 4 नवंबर को सेंसेक्स 384 अंक बढ़कर 77,301 अंक पर बंद हुआ. इसी तरह निफ्टी 150 अंकों की तेजी के साथ 23,960.60 अंक पर पहुंच गया.
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेमोक्रेट्स की मजबूत जीत इंडियन स्टॉक मार्केट के लिए शॉर्ट-टर्म में अच्छी होगी. हालांकि, लॉन्ग-टर्म में क्रूड ऑयल की कीमतें और कंपनियों की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे वगैरा बाजार की दिशा तय करेंगे.
वीके वेल्थवाइज के रिसर्च एनालिस्ट सीए वत्सल खेमका ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा है कि ट्रंप को अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में शिकस्त मिली है. उनकी नीतियों की आक्रामकता पर अंकुश लग सकता है. उनका कहना है कि बाजार में कम उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता कम हो सकती है. इससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में स्थिरता बढ़ने की संभावना है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि मिडटर्म इलेक्शन का भारतीय शेयर बाजार पर कोई खास असर नहीं होगा. चाहे नतीजा कुछ भी हो, लेकिन यह बहुत ज्यादा इंपैक्ट नहीं डाल सकता है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा संभावना इस बात की है कि डेमोक्रेट्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लें. इससे ट्रंप की शक्तियां कम हो जाएंगी, खासकर टैरिफ जैसे मुद्दों पर.
विजयकुमार का कहना है कि अगर डेमोक्रेट्स हाउस और सीनेट दोनों में जीतते हैं, तो इसका असर US मार्केट, खासकर टेक स्टॉक्स पर पड़ सकता है. यह भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
मिराए एसेट शेयरखान के रिटेल रिसर्च हेड सोमिल मेहता का भी मानना है कि US मिडटर्म चुनाव भारतीय शेयर बाजारों में कुछ शॉर्ट-टर्म वोलैटिलिटी पैदा कर सकते हैं. लेकिन, इसके नतीजे से अकेले लॉन्ग-टर्म बाज़ार की दिशा बदलने की उम्मीद कम है.
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट माधवी अरोड़ा ने कहा कि डेमोक्रेट्स के कंट्रोल वाली कांग्रेस ट्रंप के फैसलों पर अंकुश लगा सकती है. हालांकि, टैरिफ, इमिग्रेशन और विदेश नीति पर उनका काफी अधिकार बना रहेगा. उन्होंने कहा, "किसी भी नतीजे में फिस्कल पॉलिसी के बढ़ने की संभावना है, जिससे US बॉन्ड यील्ड में कमी आएगी." माधवी अरोड़ा ने यह भी चेतावनी दी कि मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान विवाद फिर से बढ़ सकता है.
एमके ग्लोबल के अनुसार, भारत पर इसका असर सीधे शेयर मार्केट के बजाय जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम से पड़ने की उम्मीद है. एमके ग्लोबल ने यह भी चेतावनी दी है कि मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान विवाद के फिर से बढ़ने से भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स, फॉरेन एक्सचेंज मार्केट और भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
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कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार पर होगा असरजियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि भारतीय बाजार का ट्रेंड कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा. विदेशी निवेशकों के निवेश से भी बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित होता है.
पुराने ट्रेंड बताते हैं कि US मिडटर्म चुनावों के बाद एक महीने, तीन महीने और छह महीने के समय में निफ्टी ने सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की है. इकोनॉमिक टाइम्स की तरफ से साल 1998 से हुए सात मिडटर्म चुनावों का एनालिसिस करने से पता चलता है कि इन तीनों पीरियड में निफ्टी ने पांच बार बढ़त दर्ज की.
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