गोल्ड लोन बांटने वाली नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के लिए बुरी खबर है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के हवाले से कहा गया है कि गोल्ड लोन बांटने वाली NBFC का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी NPA बढ़ सकता है. इक्रा के एनालिस्ट्स का कहना है कि एनबीएफसी एक साथ कर्ज का पेमेंट लेने की जगह गोल्ड लोन चुकाने के लिए ईएमआई (किस्तों में) की सुविधा दे रहे हैं.
गोल्ड लोन ने NBFC को फंसा दिया, क्या पैसा डूबेगा?
अगले दो साल में गोल्ड लोन मार्केट में 30 परसेंट ज्यादा का इजाफा होने का अनुमान है. इसके साथ ही गोल्ड लोन का बाजार मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, इन एनालिस्ट्स का कहना है कि एनपीए बढ़ने से एनबीएफसी का पैसा नहीं डूबेगा.

अगले दो साल में गोल्ड लोन मार्केट में 30 परसेंट ज्यादा का इजाफा होने का अनुमान है. इसके साथ ही गोल्ड लोन का बाजार मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. हालांकि, इन एनालिस्ट्स का कहना है कि एनपीए बढ़ने से एनबीएफसी का पैसा नहीं डूबेगा. इन कर्जों की वसूली नान बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के पास गिरवी रखे गोल्ड को नीलाम करके पूरी की जा सकेगी.
हालांकि, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने संभावित एनपीए एवेरज का कोई आंकड़ा नहीं दिया. मार्च के अंत में यह 3 परसेंट था. वहीं कमर्शियल बैंकों के लिए कुल गोल्ड लोन एनपीए लगभग 0.5 परसेंट था.
ICRA के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट एएम कार्तिक ने कहा, "एकमुश्त पेमेंट वाले गोल्ड लोन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील होते हैं. मार्च तक, एनबीएफसी द्वारा दिए गए लगभग 90% गोल्ड लोन एकमुश्त पेमेंट से जुड़े थे." चूंकि लोन की अवधि के दौरान बकाया मूलधन कम नहीं होता है, इसलिए कीमतों में गिरावट आने पर एकमुश्त पेमेंट वाले लोन में गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य कम हो जाता है.
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तेजी से बढ़ रहा गोल्ड लोन का बाजाररेटिंग एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि बैंकों और एनबीएफसी का संगठित गोल्ड लोन वित्त वर्ष 2026-27 से 2027-28 के दौरान 30% से ज्यादा सालाना की दर से बढ़ेगा. मार्च 2026 में गोल्ड लोन का मार्केट लगभग 18 लाख करोड़ था. यह बढ़कर मार्च 2028 तक 30 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. रेटिंग कंपनी ने कहा कि एनबीएफसी की बाजार हिस्सेदारी 2027-28 तक बढ़कर 23% होने का अनुमान है.
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