भारत में अप्रैल महीने में सोने का आयात लगभग 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सर्राफा उद्योग और सरकारी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में सोने का आयात करीब 15 टन रह सकता है.
अप्रैल में 30 साल बाद सबसे कम सोना भारत आया, आप पर क्या असर पड़ेगा?
भारत के ज़्यादातर रिफाइंड गोल्ड का आयात करने वाले बैंकों ने शिपमेंट रोक दी है, क्योंकि भारतीय कस्टम विभाग अब इस धातु पर 3% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) की मांग कर रहा है


इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि भारत के रिफाइंड गोल्ड का आयात करने वाले ज्यादातर बैंकों ने शिपमेंट रोक दी है, क्योंकि भारतीय कस्टम विभाग अब इस धातु पर 3% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) की मांग कर रहा है. साल 2017 में, जब भारत ने IGST को अपनाया, तो सोने का आयात करने वाले बैंकों को 3% शुल्क का भुगतान करने से छूट दी गई थी.
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रॉयटर्स से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "इस महीने बैंकों ने कस्टम से कोई भी सोना क्लियर नहीं कराया. केवल थोड़ी मात्रा में सोना इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) के जरिए क्लियर हुआ." बैंकों द्वारा सोने के आयात पर अब मांगे जा रहे IGST को लेकर भारत के टैक्स अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कंज्यूमरभारत, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का कंज्यूमर है. देश ने अप्रैल 2025 में 35 टन सोने का आयात किया था. वित्त वर्ष 2025-26 में औसतन हर महीने लगभग 60 टन सोना विदेशों से खरीदा. सूत्रों के अनुसार, अप्रैल 2026 में केवल 15 टन गोल्ड का इंपोर्ट किया गया है. ये लगभग तीन दशकों में इस महीने सोना आयात का सबसे कम आंकड़ा है. इसमें 2020 का साल शामिल नहीं है, जब कोविड-19 महामारी की वजह से भारत में ज्वेलरी शॉप्स बंद हो गई थीं.
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सूरत के सर्राफा कारोबार कुमार जैन ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि अगर बैंकों के जरिए सोने की सप्लाई घटने से आम खरीदारों पर असर पड़ सकता है. ज्वेलरी महंगी हो सकती है यानी शादी-ब्याह या त्योहारों में गोल्ड ज्वेलरी खरीदना और महंगा पड़ सकता है. हालांकि पुराना सोना बेचने वालों को फायदा हो सकता है. अगर कीमतें सप्लाई में कमी के चलते कीमतें ऊपर जाती हैं, तो पुराने गहने या गोल्ड एक्सचेंज कराने वालों को बेहतर रेट मिल सकता है.
वहीं, छोटे ज्वेलर्स के लिए स्टॉक जुटाना महंगा हो सकता है. इसके अलावा अगर आने वाले महीनों में टैक्स विवाद नहीं सुलझा, तो कई परिवार खरीद टाल सकते हैं या हल्के वजन के गहनों की तरफ जा सकते हैं.
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