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ईरान-US में तनाव घटने से मार्केट में बनने लगे मौके, ये शेयर कराएंगे दमदार कमाई?

पिछले कुछ दिनों से जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव में नरमी आई, बाजार में स्थिरता लौटने लगी है. जानिए अब किस तरह से करें निवेश.

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शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं (फोटो क्रेडिट: Business Today)

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में कुछ स्थिरता लौटती दिख रही है. इस हफ्ते की शुरुआत में यानी 27 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली. सोमवार को सेंसेक्स करीब 640 अंक चढ़कर 77335 अंक पर बंद हुआ . निफ्टी भी करीब 195 अंक उछलकर 24,100 अंक के स्तर के ऊपर बंद हुआ. हालांकि मंगलवार 28 अप्रैल को बाजार में कुछ मुनाफा वसूली देखने को मिली और दोपहर एक बजे के आसपास सेंसेक्स करीब 200 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. लेकिन पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है. जैसा कि हमने पिछले कुछ दिनों से देखा कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन जैसे ही भू-राजनीतिक तनाव में नरमी आई, बाजार में स्थिरता लौटने लगी है.

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बाजार स्थिरता की तरफ क्यों बढ़ रहा है?

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि लार्ज-कैप शेयरों की कम वैल्यूशन (वैल्यूएशन मतलब किसी शेयर की सही कीमत का आकलन) निवेशकों को लुभा रही है. इस वजह से लोग शेयर बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी तेजी दिखा रहे हैं. इससे पता चलता है कि निवेशक सभी सूचकांकों में भागीदारी बढ़ा रहे हैं. वहीं, दुनियाभर के शेयर बाजारों खासकर अमेरिका में, एआई से जुड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में तेजी से भारत के शेयर बाजारों को समर्थन मिला है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट डॉक्टर वीके विजयकुमार ने इंडिया टुडे से कहा, "दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे एआई क्षेत्र के अग्रणी देश भारत जैसे उभरते बाजारों की कीमत पर भारी मात्रा में विदेशी निवेश (एफपीआई) आकर्षित कर रहे हैं."

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निवेशकों को क्या करना चाहिए?

दुबई के एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि अगर आपने डर में बाजार से पैसा निकाल लिया था, तो दोबारा निवेश करते समय एकमुश्त रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीका  (staggered approach) अपनाना चाहिए. इसके लिए बाजार के निवेशक सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता अच्छा चुन सकते हैं.  साथ ही उन कंपनियों और सेक्टर्स पर ध्यान देना जरूरी है जिनकी बुनियाद मजबूत है, कर्ज कम है और जिनकी वैल्यूएशन आकर्षक है.

पीएचडी कैपिटल के फाउंडर और सीईओ प्रदीप हल्दर ने लल्लनटॉप से कहा कि निफ्टी में 23,650 सपोर्ट है. हमें लगता है कि 24,250 के ऊपर जाने पर इसमें तेजी दिख सकती है. उनका कहना है कि निवेशकों को धीरे -धीरे निवेश शुरू करना चाहिए. प्रदीप हल्दर का कहना है कि निफ्टी फॉर्मा बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है.  फॉर्मा में दो कंपनियां अच्छी नजर आती हैं. 

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निवेशकों को ल्यूपिन (Lupin) में निवेश की सलाह है. उनका कहना है कि अगले 3-4 तिमाहियों (9-12 महीने) में ल्यूपिन का शेयर 2950 रुपये तक पहुंच सकता है. 28 अप्रैल को दोपहर 2 बजे के आसपास नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में ल्यूपिन का शेयर 2300 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. इसी तरह एक और फॉर्मा स्टॉक है एस्टर डीएम हेल्थकेयर (Aster DM Healthcare Ltd). इस शेयर को भी खरीदने की सलाह है. अभी कंपनी का शेयर 705 रुपये के आसपास चल रहा है. अगले 6-7 महीने में 850-900 रुपये का लक्ष्य के साथ खरीदारी कर सकते हैं.  

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कच्चे तेल से शेयर बाजार को खतरा

जानकारों का कहना है कि शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं. 28 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 110-111 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है. यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों में मामूली वृद्धि से निकट भविष्य में भारत के मैक्रो इकॉनॉमिक्स और बाजारों पर इसके नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है."

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