युद्ध और तेल संकट के बीच 'गोल्ड' खूब चमका, इन वजहों से 2026 में निवेश का बना भरोसेमंद विकल्प
साल 2026 में निवेश की दुनिया तेजी से बदलती दिख रही है. ईरान युद्ध, वैश्विक तनाव, तेल महंगा होने से दुनिया में बढ़ती महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं ने लोगों के निवेश के तरीकों पर बड़ा असर डाला है.

साल 2026 में निवेश के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है. ईरान युद्ध, वैश्विक तनाव, तेल महंगा होने से दुनिया में बढ़ती महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं ने लोगों के निवेश के तरीकों पर बड़ा असर डाला है. पिछले कुछ सालों में बेहतर रिटर्न के लिए शेयर बाजार में निवेश तेजी से बढ़ा था, लेकिन इस साल गोल्ड सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला एसेट क्लास बनकर उभरा है.
सुरक्षित निवेश का जरिया बना सोनायुद्ध और बढ़ते तनाव के बीच गोल्ड ने खुद को फिर से ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश विकल्प साबित किया है. जब भी दुनिया में युद्ध, आर्थिक संकट या करेंसी में उतार-चढ़ाव होता है तो निवेशक सोने की तरफ रुख करते हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 में गोल्ड की चमक लगातार बरकरार है. वैश्विक अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव और दुनियाभर में आर्थिक विकास को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक तेज रिटर्न की बजाय अपने पैसे को सुरक्षित रखने को तरजीह दे रहे हैं.
मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि गोल्ड ईटीएफ (Gold Exchange Traded Funds) और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों ने निवेशकों के लिए सोने में निवेश को और आसान बनाया है. खासकर वे निवेशक जो बाजार की अस्थिरता से बचना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनता जा रहा है.
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Gold सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला एसेट क्लास बनकर उभराइस साल सोना सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले एसेट क्लास के रूप में उभरा है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2026 की शुरुआत से अब तक गोल्ड ने अस्थिर वैश्विक माहौल, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के दौरान खुद को सबसे भरोसेमंद एसेट क्लास साबित किया है.
इकोनॉमिक टाइम्स में छपे एक चार्ट के मुताबिक, गोल्ड लगभग 11.7% रिटर्न के साथ टॉप एसेट क्लास बना हुआ है. सबसे खास बात ये है कि जब इक्विटी या रियल एस्टेट में उतार-चढ़ाव बढ़ा, तब गोल्ड ने निवेशकों को पूंजी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न दोनों दिए. यही वजह है कि 2026 में भी गोल्ड को सुरक्षित निवेश साधन माना जा रहा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, गोल्ड ने इक्विटी, बॉन्ड और कई अन्य एसेट्स से बेहतर प्रदर्शन किया.
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गोल्ड में आगे तेजी या मंदी?ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज ने सीएनबीसी टीवी 18 से बातचीत में कहा कि बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन (खासतौर से पश्चिम एशिया) से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. कच्चा तेल महंगा होने की वजह से महंगाई भी बढ़ी है. इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व समेत दुनियाभर के केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती नहीं करेंगे. अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो सोने की सुरक्षित निवेश मांग (safe haven demand) बढ़ सकती है. इससे सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिलेगी. इसके अलावा सोने की निवेश मांग बढ़ने से आने वाले समय में सोने के दाम और चढ़ने का भी अनुमान है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, विशेषज्ञों ने साल 2026 के लिए सोने की कीमत का अनुमान बढ़ा दिया है. उनका मानना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बढ़ने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के दबाव के बावजूद सोने को सहारा देती रहेगी. 31 विश्लेषकों के इस सर्वे में 2026 के लिए गोल्ड का औसत अनुमान बढ़कर 4,916 डॉलर प्रति औंस हो गया. पिछला अनुमान 4,746.50 डॉलर प्रति औंस था.
आसान भाषा में कहें तो तनाव कम होने के बाद भी विशेषज्ञों को लगता है कि सोने में आगे फिर मजबूती दिख सकती है. वहीं, कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि 2-3 महीने की अवधि में एमसीएक्स पर सोने के दाम 1.7 से 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकते हैं.
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रियल एस्टेट भी पीछे नहींरियल एस्टेट में 2026 में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है. जहां गोल्ड वैश्विक तनाव के कारण सेफ हेवन बनकर उभरा है, वहीं रियल एस्टेट अब भी लंबी अवधि में संपत्ति बढ़ाने (wealth creation), रेंटल इनकम के लिए मजबूत विकल्प माना जा रहा है.
इकोनॉमिक टाइम्स की सहयोगी बेवसाइट रियल्टी डॉट काम के मुताबिक साल 2026 की पहली तिमाही ( 1 जनवरी से 31 मार्च 2026) के बीच भारत के प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 14 परसेंट का इजाफा हुआ है. सीबीआरई दक्षिण एशिया (CBRE South Asia) के आंकड़ों हवाले से बताया गया है कि साल 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में 5.1 अरब डॉलर (करीब 48 हजार करोड़ रुपये) तक रिकॉर्ड निवेश आया. यह पिछले साल की तुलना में 72% ज्यादा है.
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