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सरकार ने बैंकों से गोल्ड लोन की जानकारी मांगी, सोने पर अब और क्या होने वाला है?

कुछ दिन पहले सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर दिया था. बाद में चांदी के आयात के लिए लाइसेंस जरूरी कर दिया. अब Gold Metal Loan और Gold Loan से जुड़ी सारी जानकारी मांगी है.

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जानकारों का कहना है कि सरकार गोल्ड को लेकर कुछ बड़ा फैसला ले सकती है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

वित्त मंत्रालय ने बुलियन बैंकों से कहा है कि वे साल 2023 से अब तक 'गोल्ड मेटल लोन' (Gold Metal Loan) और 'गोल्ड लोन' (Gold Loan) से जुड़ी सभी जानकारी साझा करें. इसके चलते यह अटकलें तेज हो गई हैं कि गोल्ड को लेकर कुछ नए फैसले लिए जा सकते हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

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कई बैंक जैसे कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक वगैरह बैंकिंग सेवाओं के अलावा गोल्ड इंपोर्ट करते हैं. इसके अलावा गोल्ड लोन देते हैं. जो बैंक इस तरह के काम कर रहे हैं उन्हें बुलियन बैंक भी कहते हैं. बुलियन बैंक का लाइसेंस आरबीआई देता है. 

भारत में करीब एक दर्जन बैंक गोल्ड इंपोर्ट करते हैं. ये बैंक अंतरराष्ट्रीय बैंकों से सोना उधार लेकर ज्वेलर्स को उधार देते हैं या कंसाइनमेंट के हिसाब से गोल्ड इंपोर्ट करते हैं. कंसाइनमेंट में सर्राफा कारोबारी बैंक को बताता है कि उसे कितना सोना चाहिए? उसी हिसाब से बैंक किसी इंटरनेशनल बैंक से उतना सोना मंगवाता है.  गोल्ड मेटल लोन को साल 1998 में निर्यातकों के लिए शुरू किया गया था और बाद में घरेलू ज्वैलर्स को भी यह सुविधा दी गई.

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क्या है गोल्ड लोन और गोल्ड मेटल लोन?

जब कोई व्यक्ति सोने के गहने रखकर कर्ज लेता है तो उसे गोल्ड लोन कहते हैं. वहीं, आईसीआईसीआई बैंक की बेवसाइट में मौजूद जानकारी के मुताबिक गोल्ड मेटल लोन (GML) में सर्राफा कारोबारियों को कैश की जगह गोल्ड उधार दिया जाता है. ज्वेलर इस गोल्ड को गहने वगैरह बनाकर देश-विदेश में बेचते हैं और इस सोने की कीमत ब्याज सहित बैंकों को लौटाते हैं. 

बैंक के मुताबिक गोल्ड मेटल लोन निश्चित समय के लिए मिलता है. भारत में ज्वेलरी बनाकर बेचने वाले सर्राफा कारोबारियों को 180 दिन के लिए ये लोन मिलता है जबकि जो कारोबारी अपनी ज्वेलरी विदेशों में बेचते हैं उन्हें 270 दिन के लिए गोल्ड मेटल लोन मिलता है.

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वित्त मंत्रालय ने क्या डिटेल्स मांगी हैं?

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 5 जून की शाम को वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने जानकारी मांगी है कि सोने के बदले कितनी कीमत और कितनी मात्रा में 'गोल्ड मेटल लोन' दिया गया. कितने कस्टमर्स को दिया गया. इंटरनेशनल गोल्ड सप्लायर कौन हैं? इसी तरह से सोना गिरवी रखकर कर्ज लिए गए लोन यानी गोल्ड लोन का पोर्टफोलियो का साइज कितना है? बैंकों में गिरवी रखा गया सोना कितना है और कितने लोगों ने अपना सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया है. ये सब जानकारी मांगी गई है.  

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सरकार अब क्या करने वाली है?

एक वरिष्ठ बैंकर ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि बैंकों को ये सब जानकारी सोमवार 8 जून तक देने को बोला गया था. उन्होंने आगे कहा कि कुछ दिन पहले सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर दिया था. बाद में चांदी के आयात के लिए लाइसेंस जरूरी कर दिया. अब ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में सरकार कुछ और कदम उठा सकती है.

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