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दिवाली की मिठाई से छठ के फल तक, मीडिल क्लास को कितना महंगा पड़ेगा त्योहार?

Festive Season Inflation India: दशहरा, दुर्गापूजा, दिवाली और छठ से पहले रसोई से लेकर यात्रा तक खर्च बढ़ने का दबाव है. सितंबर 2025 और सितंबर 2026 के सरकारी आंकड़ों से समझिए चावल, दाल, खाद्य तेल, दूध, घी, चीनी, प्याज, सब्जियों, पेट्रोल, डीजल और ट्रेन किराए में कितना बदलाव आया है और त्योहार के दौरान फ्लाइट टिकट क्यों महंगे हो रहे हैं.

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त्योहार से पहले जेब पर कितना बढ़ा बोझ? (फोटो- AI)

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  • सितंबर 2026 में त्योहारों के दौरान खाद्य तेल, चीनी, दाल, प्याज और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके कारण त्योहार खर्च बढ़ेगा।
  • खाद्य तेलों की महंगाई का मुख्य कारण देश की आयात पर निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय कीमतों का प्रभाव, कमजोर मानसून और कमजोर जलाशयों के कारण घरेलू उत्पादन पर दबाव है।
  • सरकार ने प्याज के लिए बफर स्टॉक का उपयोग और रेल किराए में वृद्धि कर महंगाई के प्रबंधन के उपाय किए हैं, जबकि हवाई किरायों में सीट कम होने से यात्रा का खर्च भी बढ़ने की संभावना है।

सितंबर खत्म होने वाला है और इसके साथ ही देश में त्योहारों की लंबी कतार शुरू हो जाएगी. दुर्गापूजा, दशहरा, दिवाली और फिर छठ. घर की सफाई से लेकर नए कपड़े, मिठाई, पूजा का सामान, फल, सब्जियां और घर से बाहर रहने वालों के लिए ट्रेन या फ्लाइट का टिकट. यानी अगले डेढ़ से दो महीने में परिवारों का खर्च वैसे ही बढ़ने वाला है.

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लेकिन इस बार मामला सिर्फ त्योहारों की खरीदारी तक सीमित नहीं है. रोजमर्रा की रसोई के कई सामान पिछले साल के मुकाबले महंगे हैं. सबसे ज्यादा दबाव खाद्य तेल, चीनी, दाल, प्याज और कुछ मसालों पर दिखाई दे रहा है. दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी सितंबर 2025 के मुकाबले ऊपर हैं. रेल किराए में 2025 के दौरान दो बार बदलाव हो चुका है और त्योहार के दिनों में हवाई किराए ने अलग कहानी शुरू कर दी है.

फिर भी तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी देखना जरूरी है. गेहूं लगभग स्थिर है, आलू पिछले साल से सस्ता है और टमाटर में भी सालाना आधार पर गिरावट है. यानी महंगाई की मार हर थाली पर एक जैसी नहीं है.

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सबसे पहले रसोई का हिसाब देखिए

उपभोक्ता मामलों के विभाग के रोजाना मूल्य निगरानी आंकड़ों में 17 सितंबर 2026 की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत की तुलना 17 सितंबर 2025 से करें तो चावल करीब 7.8 प्रतिशत महंगा दिखता है. अरहर दाल करीब 7 प्रतिशत, उड़द दाल 7.5 प्रतिशत और दूध 3.3 प्रतिशत महंगा है.

सबसे ज्यादा ध्यान खाद्य तेलों पर जाता है. इसी सरकारी आंकड़े में सरसों तेल की औसत कीमत करीब 7.4 प्रतिशत, सोया तेल 13.5 प्रतिशत, सूरजमुखी तेल 19 प्रतिशत और पाम तेल करीब 15.2 प्रतिशत ऊपर है. देसी घी की कीमत भी करीब 4.6 प्रतिशत बढ़ी है.

चीनी की कहानी और दिलचस्प है. 17 सितंबर 2025 के 46.50 रुपये प्रति किलो के मुकाबले 17 सितंबर 2026 को अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 58.66 रुपये थी. यानी करीब 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी.

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यानी त्योहार में बनने वाली मिठाई, पकवान और नमकीन के लिए जिन चीजों की मांग अचानक बढ़ती है, उनमें से कई पहले ही महंगी हो चुकी हैं.

रसोई का सालाना हिसाब

सामानसितंबर 2025सितंबर 2026
 
बदलाव
चावल43.14 रुपये/किलो46.50 रुपये/किलो+7.8%
गेहूं31.78 रुपये/किलो31.87 रुपये/किलो+0.3%
आटा37.10 रुपये/किलो37.48 रुपये/किलो+1.0%
अरहर दाल116.14 रुपये/किलो124.24 रुपये/किलो+7.0%
उड़द दाल114.10 रुपये/किलो122.64 रुपये/किलो+7.5%
दूध59.28 रुपये/लीटर61.24 रुपये/लीटर+3.3%
देसी घी669.77 रुपये/किलो700.47 रुपये/किलो+4.6%
चीनी46.50 रुपये/किलो58.66 रुपये/किलो+26.2%

स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग, मूल्य निगरानी प्रभाग.

तेल की कीमत में अभी और झटका आ सकता है

मामला सिर्फ पिछले एक साल में हुई बढ़ोतरी तक नहीं है. सितंबर 2026 में खाद्य तेल कंपनियों की तरफ से आगे भी कीमत बढ़ाने का दबाव सामने आया है. रिपोर्टों के मुताबिक दशहरा और दिवाली से पहले खाद्य तेल की कीमतों में 7 से 8 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है.

इसकी एक बड़ी वजह भारत की आयात पर निर्भरता है. देश अपनी खाद्य तेल जरूरत का आधे से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम, सोया और सूरजमुखी तेल की कीमत, माल ढुलाई, बीमा और रुपये की विनिमय दर, सब मिलकर घरेलू कीमत को प्रभावित करते हैं.

अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने भी कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो की स्थिति को लेकर खाद्य महंगाई के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया है. उनके मुताबिक,

कमजोर जलाशय स्तर और बारिश के असमान वितरण से खरीफ के साथ अगली फसल पर भी दबाव पड़ सकता है. इसका असर खास तौर पर जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं पर पड़ सकता है.

प्याज ने रसोई में सबसे बड़ा पलटा मारा

अब आते हैं सब्जियों पर. यहां तस्वीर थोड़ी उलटी है. 17 सितंबर 2025 को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 27.48 रुपये प्रति किलो थी. 17 सितंबर 2026 को ये 53.78 रुपये हो गई. यानी करीब 96 प्रतिशत की बढ़ोतरी.

लेकिन उसी आंकड़े में आलू 25.35 रुपये से घटकर 22.72 रुपये और टमाटर 39.75 रुपये से घटकर 38.77 रुपये हुआ. यानी आलू करीब 10 प्रतिशत और टमाटर करीब 2.5 प्रतिशत सस्ता हुआ.

यही वजह है कि सिर्फ एक दो सामान देखकर पूरी महंगाई की तस्वीर समझना मुश्किल है.

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त्योहारों से पहले आपकी जेब पर कितना बढ़ा खर्च? (Courtesy: @India Today)

सब्जियों का सालाना हिसाब

सब्जीसितंबर 2025सितंबर 2026बदलाव
आलू25.35 रुपये/किलो22.72 रुपये/किलो-10.4%
प्याज27.48 रुपये/किलो53.78 रुपये/किलो+95.7%
टमाटर39.75 रुपये/किलो38.77 रुपये/किलो-2.5%
बैंगन42.17 रुपये/किलो43.32 रुपये/किलो+2.7%
धनिया37.22 रुपये/किलो43.77 रुपये/किलो+17.6%

स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग, 17 सितंबर 2025 और 17 सितंबर 2026 के दैनिक औसत खुदरा मूल्य.

सरकार भी प्याज की कीमत को लेकर सक्रिय है. अगस्त से बफर स्टॉक का इस्तेमाल शुरू किया गया और प्याज को 35 रुपये प्रति किलो के आसपास खुदरा हस्तक्षेप के जरिए बेचने की व्यवस्था की गई. सितंबर के आखिर में पश्चिम बंगाल के लिए नासिक से "कांदा एक्सप्रेस" भेजी गई. सरकार का कहना है कि इसका मकसद त्योहार से पहले उपलब्धता बढ़ाना और कीमत पर दबाव कम करना है.

फल और पूजा सामग्री का खेल अलग है

फल और फूलों की कीमतों का कोई एक राष्ट्रीय खुदरा आंकड़ा नहीं होता. इनकी कीमत शहर, मंडी, मौसम और त्योहार के दिन की मांग के हिसाब से तेजी से बदलती है.

24 सितंबर 2026 को गुरुग्राम के स्थानीय बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में नियमित केले की खुदरा कीमत करीब 53 से 60 रुपये किलो और शिमला सेब करीब 138 से 156 रुपये किलो के दायरे में दिख रहा था. अनार करीब 127 से 143 रुपये किलो के दायरे में था.

फूलों में भी तस्वीर बदल सकती है. दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में 23 सितंबर को गेंदा की एक किस्म का मंडी भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि पिछले कुछ दिनों में इसी बाजार में 4,000 से 14,000 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव दर्ज हुए. मतलब नवरात्र और दुर्गापूजा के करीब आते ही सिर्फ औसत कीमत नहीं, बल्कि दिन और मंडी का चुनाव भी जेब पर असर डाल सकता है.

फल और फूल, त्योहार के पहले बाजार का हाल

गौतम बुद्ध नगर में 24 सितंबर 2026 को फलों की कीमतें और पिछले 10 दिनों के दौरान हुई मूल्य वृद्धि कुछ इस तरह है,

  • केला: 53 से 60 रुपये/किलो
  • शिमला सेब: 138 से 156 रुपये/किलो
  • अनार: 127 से 143 रुपये/किलो
  • अमरूद: 75 से 85 रुपये/किलो

इसी तरह गाजीपुर फूल मंडी में गेंदा का फूल 8,000 रुपये/क्विंटल बिक रहा था. पिछले 10 दिनों में 4,000 से 14,000 रुपये/क्विंटल के बीच फूलों की बिक्री हो रही है. आगे बढ़ने से पहले बता दें कि फल और फूल के खुदरा भाव लोकेशन के हिसाब से बदल सकते हैं.

अब सफर का हिसाब भी जोड़िए

त्योहार का खर्च सिर्फ बाजार की थैली तक नहीं रुकता. घर से दूर रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा खर्च आने जाने का टिकट होता है.

रेलवे ने 2025 में पांच साल के अंतराल के बाद यात्री किराए में दो बार युक्तिसंगत बदलाव किया. 1 जुलाई 2025 से सामान्य गैर वातानुकूलित यात्रा में कुछ दूरी के बाद किराया बढ़ा. इसके बाद 26 दिसंबर 2025 से दूसरा बदलाव लागू हुआ. दूसरे बदलाव में 215 किलोमीटर तक दूसरी श्रेणी सामान्य यात्रा के किराए में बढ़ोतरी नहीं की गई, लेकिन 216 से 750 किलोमीटर की यात्रा पर 5 रुपये और लंबी दूरी पर 10, 15 और 20 रुपये तक की बढ़ोतरी दूरी के हिसाब से की गई. मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में कई श्रेणियों के लिए प्रति किलोमीटर 1 से 2 पैसे तक की बढ़ोतरी हुई..

यानी किसी परिवार की चार टिकटों वाली लंबी दूरी की यात्रा में अंतर बहुत बड़ा न भी हो, तो भी त्योहार के दौरान टिकटों की संख्या और आने जाने दोनों को जोड़ने पर कुल रकम बढ़ती है. इस ग्राफिक्स के रेलवे किराये में होने वाली बढ़ोत्तरी पर नजर डालते हैं,

  • 1 जुलाई 2025: पहला किराया संशोधन
  • 26 दिसंबर 2025: दूसरा किराया संशोधन
  • 215 किलोमीटर तक दूसरी श्रेणी सामान्य: कोई बढ़ोतरी नहीं
  • 216 से 750 किलोमीटर: 5 रुपये तक बढ़ोतरी
  • 751 से 1,250 किलोमीटर: 10 रुपये तक
  • 1,251 से 1,750 किलोमीटर: 15 रुपये तक
  • 1,751 से 2,250 किलोमीटर: 20 रुपये तक
  • मेल/एक्सप्रेस: कई श्रेणियों में 2 पैसे प्रति किलोमीटर तक

स्रोत: रेल मंत्रालय.

पेट्रोल और डीजल का असर सिर्फ कार वालों पर नहीं

24 सितंबर 2025 से 24 सितंबर 2026 की तुलना करें तो प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊपर हैं. दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गया. डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये हुआ.

मुंबई में पेट्रोल करीब 103.50 रुपये से 111.21 रुपये और डीजल करीब 90.03 रुपये से 97.83 रुपये हुआ. कोलकाता में पेट्रोल करीब 104.95 रुपये से 113.51 रुपये और डीजल 91.76 रुपये से 99.82 रुपये पहुंचा.

यानी प्रमुख शहरों में सालाना बढ़ोतरी मोटे तौर पर पेट्रोल में 7 से 9 प्रतिशत और डीजल में 8 से 10 प्रतिशत के आसपास बैठती है.

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एक साल में कितने बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम (Courtesy: @India Today)

पेट्रोल और डीजल, सितंबर 2025 बनाम सितंबर 2026

शहरपेट्रोल 2025 (रुपये/लीटर)पेट्रोल 2026 (रुपये/लीटर)डीजल 2025 (रुपये/लीटर)डीजल 2026 (रुपये/लीटर)
दिल्ली94.77102.1287.6795.20
मुंबई103.50111.2190.0397.83
कोलकाता104.95113.5191.7699.82
चेन्नई100.75107.7692.3499.55
बेंगलुरु102.92111.6890.9999.56
हैदराबाद107.46116.1595.70104.23

स्रोत: पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ और 24 सितंबर 2025 तथा 24 सितंबर 2026 के शहरवार ईंधन मूल्य.

बस किराए की कहानी थोड़ी अलग है. दिल्ली परिवहन निगम की मौजूदा जानकारी में सामान्य बस पास की दरों में कोई नया बदलाव नहीं बताया गया है. हरियाणा रोडवेज की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा मूल किराया संरचना अभी भी 15 मई 2020 से लागू दरों के रूप में प्रदर्शित है. इसलिए 2025 से 2026 के बीच दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बस किराए में एक समान प्रतिशत बढ़ोतरी बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा. अलग रूट, निजी बस और अंतरराज्यीय सेवा के किराए अलग हो सकते हैं.

असली झटका फ्लाइट से घर जाने वालों को

हवाई यात्रा में इस बार मामला ज्यादा तेज है. सितंबर 2026 में घरेलू विमान क्षमता पिछले साल के मुकाबले करीब 5.6 प्रतिशत कम बताई गई है. त्योहार के दिनों में मांग बढ़ रही है और उपलब्ध सीटें कम हैं.

नवंबर की दिवाली वाली तारीखों पर कुछ प्रमुख मार्गों के वापसी टिकट 13,000 से 18,000 रुपये के आसपास पहुंचने की रिपोर्ट आई है. दिल्ली से पटना जैसी कुछ क्षेत्रीय उड़ानों पर सामान्य दिनों के 3,500 से 4,500 रुपये के मुकाबले पीक तारीखों पर 12,500 रुपये से ज्यादा किराया रिपोर्ट किया गया.

दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता जाने वाली उड़ानों में भी कई मार्गों पर तेज उछाल दर्ज किया गया है.

नागरिक उड्डयन मंत्री के आर राममोहन नायडू ने कहा है कि सरकार त्योहार के लिए हवाई किराए की औपचारिक सीमा तय नहीं करेगी, लेकिन एयरलाइंस से उचित स्तर पर किराया रखने के लिए लगातार बात करेगी. उन्होंने विमान ईंधन की बढ़ी लागत को भी परिचालन खर्च बढ़ने की एक वजह बताया.

महंगाई अब राजनीतिक मुद्दा भी बन चुकी है

महंगाई पर सियासत भी तेज है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सितंबर में केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि खाने पीने की चीजों, दाल और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है. उन्होंने प्याज, मसालों और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देकर सरकार पर सवाल उठाए.

दूसरी तरफ सरकार का जोर इस बात पर है कि कई जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक और आयात जैसे उपाय किए जा रहे हैं. चीनी की कीमत बढ़ने के बाद सरकार ने त्योहारों से पहले पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने को कहा और कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी. प्याज के मामले में भी बफर स्टॉक से आपूर्ति बढ़ाई गई है.

यानी राजनीतिक दावे अपनी जगह हैं, लेकिन बाजार के आंकड़े एक मिली जुली तस्वीर दिखाते हैं. कुछ सामान महंगे हुए हैं, कुछ लगभग स्थिर हैं और कुछ सस्ते भी हुए हैं.

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तो इस बार त्योहार कितने महंगे होंगे?

इस सवाल का कोई एक प्रतिशत वाला जवाब नहीं है. अगर घर में मिठाई ज्यादा बनती है तो चीनी, दूध, घी और खाद्य तेल की कीमत असर डालेगी. अगर पूजा में बड़ी मात्रा में फल और फूल लगते हैं तो स्थानीय बाजार की मांग असर करेगी. अगर घर से बाहर रहने वाले लोग ट्रेन से आते जाते हैं तो किराए में हुए बदलाव जुड़ेंगे. और अगर फ्लाइट से घर जाना है तो टिकट कई परिवारों के पूरे त्योहार बजट को ही बदल सकता है.

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि महंगाई सिर्फ दुकान पर दिखाई देने वाली कीमत नहीं है. प्याज की कीमत बढ़ने से खाने का खर्च बढ़ता है, डीजल महंगा होने से माल ढुलाई पर दबाव आता है, खाद्य तेल महंगा होने से मिठाई और नमकीन की लागत बढ़ती है और त्योहार के दिनों में विमान की सीट कम होने से यात्रा का खर्च कई गुना तक बढ़ सकता है.

इसलिए इस बार त्योहार की खरीदारी का हिसाब सिर्फ "क्या खरीदना है" से नहीं बनेगा. सवाल ये भी होगा कि "कब खरीदना है, कहां से खरीदना है और कितना खरीदना है". क्योंकि इस साल त्योहारों की खुशी का हिसाब पूजा की थाली से लेकर यात्रा के टिकट तक, कई अलग अलग कीमतों से मिलकर बनने वाला है.

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