The Lallantop

'BJP जीत रही, भारत की अर्थव्यवस्था हार रही', मोदी सरकार में शामिल रहे अर्थशास्त्री ने बहुत कुछ सुना दिया

सुरजीत भल्ला ने कहा कि बंगाल की जीत ने बीजेपी को उसके राजनीतिक शिखर पर पहुंचा दिया लेकिन देश की इकॉनमी संभालने के मामले में उसका प्रदर्शन सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है.

Advertisement
post-main-image
अर्थशास्त्री ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाया है. (फोटो- India Today)

‘बीजेपी चुनाव जीत रही है लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था हार रही है.’ ये बात किसी विपक्षी नेता ने नहीं कही है. ये कहना है अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रह चुके हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

IMF में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके सुरजीत भल्ला इस बार देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गहरी चिंता के साथ सामने आए हैं. इसके लिए उन्होंने बीजेपी की ‘मजबूत सरकार’ की ‘कमजोर आर्थिक नीतियों’ को जिम्मेदार बताया है.

'बीजेपी जीत रही, अर्थव्यवस्था गिर रही'

सुरजीत भल्ला ने इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने एक लेख में कहा कि बीजेपी की लगातार चुनावी जीत ने उसे ‘लापरवाह’ बना दिया है. बंगाल की जीत ने बीजेपी को उसके राजनीतिक शिखर पर तो पहुंचा दिया, लेकिन देश की इकॉनमी संभालने के मामले में उसका प्रदर्शन सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है. 

Advertisement

उन्होंने साफ कहा, “सत्ताधारी पार्टी लगातार चुनाव जीत रही है. विपक्ष बेहद कमजोर है. इस वजह से बीजेपी सरकार आर्थिक नीतियां बनाने में ढीली हो गई है. निजी निवेश और विदेशी पूंजी निवेश में चेतावनी वाले संकेत दिख रहे हैं लेकिन सरकार को कठिन आर्थिक सुधारों की जरूरत कम महसूस हो रही है.”

पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था के जिम्मेदार

सुरजीत भल्ला ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने के लिए 4 पक्ष जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा, “इनमें पहला और सबसे महत्वपूर्ण पक्ष खुद मोदी सरकार है. ये सरकार समस्या को पहचानती तो है, लेकिन संकट के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराकर संतुष्ट हो जाती है.” 

भल्ला ने दूसरा जिम्मेदार इंडस्ट्रियल कंपनियों को बताया है. इसके बाद विपक्ष का नंबर लगाया और कहा कि कांग्रेस पार्टी एक कमजोर विपक्ष के रूप में सामने आई है, जिसने भी अर्थव्यवस्था में गिरावट को लगातार सपोर्ट ही किया. भल्ला को चौथी बड़ी वजह ‘डीप स्टेट’ लगती है, जो बाकी के तीन कारकों पर ठीक-ठाक असर डालने वाली ताकत है.

Advertisement

भल्ला का कहना है कि बीजेपी लगभग हर चुनाव जीत रही है. लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी है. हो सकता है कि इस वजह से सरकार एक आराम वाले दायरे में चली गई हो. उसे लगने लगा हो कि इकॉनमी के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है. वोट तो मिल ही रहे हैं. लोगों के पास उसके अलावा दूसरा विकल्प भी क्या है? भल्ला ने इसके लिए कठोर शब्दों का प्रयोग किया और कहा कि ‘बीजेपी चुनाव तो जीत रही है लेकिन देश की अर्थव्यवस्था हार रही है.’ 

अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता?

सुरजीत भल्ला का यह लेख ऐसे समय में आया है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई तरह के दबाव हैं. कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. वेस्ट एशिया में जंग छिड़ी है और इस वजह से खाद और पेट्रोलियम की सप्लाई बाधित है. रुपये की हालत तो सबसे ज्यादा खराब है. हाल ही में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.36 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया. रुपये को 2025 में एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल किया गया है. राजनीतिक स्थिरता के माहौल में सैद्धांतिक रूप से भारतीय मुद्रा को मजबूत होना चाहिए था, लेकिन इसका उल्टा हो रहा है. 

तेजी से बढ़ती अर्थव्यस्था हैं या नहीं?

मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था होने का प्रचार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन भल्ला ने इस पर भी सवाल उठा दिया. उन्होंने कहा कि ये दावा पूरी तरह से सही नहीं है और इसका ‘डंका पीटने’ का कोई खास फायदा भी नहीं है. उन्होंने बताया कि अगर प्रति व्यक्ति जीडीपी (Per Capita GDP) को अमेरिकी डॉलर में मापा जाए तो भारत की ग्रोथ रेट बांग्लादेश और इथियोपिया जैसे देशों से भी पीछे है. 

भल्ला के मुताबिक, इसके पीछे निजी निवेश में आई गिरावट बड़ी वजह है, जो 2014 के बाद लगातार गिर रही है. सरकारी निवेश तो काफी बढ़ा है क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है. सरकारी निवेश में जहां 5 से 6 फीसदी की बढ़त हुई है, वहीं निजी निवेश उतना ही घट गया है. 

विदेशी निवेश में गिरावट

भारत में विदेशी निवेश भी लगातार गिर रहा है. भल्ला इसके लिए 2015 में भारत की द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) व्यवस्था में किए गए बदलावों को जिम्मेदार मानते हैं. उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने विदेशी इन्वेस्टर्स के लिए भारत को वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से भी कम आकर्षक देश बना दिया. 

2015 के बदले हुए BIT नियमों के मुताबिक, किसी विदेशी निवेशक को भारत से बाहर निकलने से पहले 5 साल तक इंतजार करना होगा. कोई भी विवाद होने पर उन्हें भारतीय अदालतों का सहारा लेना होगा. भल्ला कहते हैं कि जब भारतीय नागरिक खुद यहां की कोर्ट में जाने से हिचकते हैं तो विदेशी Investors पर ऐसी शर्तें क्यों लगाई जाएं?

'मोदी सरकार इलाज नहीं कर रही'

इंडियन एक्सप्रेस के अपने लेख में भल्ला ने कहा कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था का असली इलाज करने के बजाय सिर्फ ‘अस्थायी उपाय’ किए हैं. जैसे लोगों से भारत में ज्यादा निवेश करने की अपील करना, लेकिन इन्वेस्टर्स भावनाओं से नहीं बल्कि आर्थिक फायदे देखकर फैसले लेते हैं. फिलहाल, निवेशकों के लिए भारत छोड़ना या यहां न आना ज्यादा आकर्षक विकल्प लग रहा है. 

वीडियो: राजस्थान में सूख रहे पेट्रोल पंप, सरकार का इनकार, मामला कोर्ट तक पहुंचा?

Advertisement