पिछले कुछ महीनों से दुनियाभर में क्रिप्टो मार्केट में तबाही देखने को मिल रही है. जिन लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी, जैसे बिटकॉइन, ईथर वगैरा में पैसा लगाया है, उनमें से कई माथा पीट रहे हैं. कारण ये है कि क्रिप्टो मार्केट भारी गिरावट के दौर से गुजर रहा है. इसके चलते निवेशकों की अरबों-खरबों की संपत्ति कुछ ही महीनों में घट गई है.
Bitcoin वालों का भारत की आधी GDP के बराबर पैसा डूब गया!
क्रिप्टो मार्केट में जारी गिरावट के चलते पिछले साल अक्टूबर से लेकर अब तक दुनियाभर के निवेशकों के 2 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 180 लाख करोड़ रुपये डूब गए.
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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक क्रिप्टो मार्केट में जारी गिरावट के चलते पिछले साल अक्टूबर से लेकर अब तक दुनियाभर के निवेशकों के 2 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 180 लाख करोड़ रुपये डूब गए. ये भारत की अर्थव्यवस्था के आधे के बराबर है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने अनुमान जताया था कि 2025 में भारत की नॉमिनल GDP (सकल घरेलू उत्पाद) बढ़कर 4.187 ट्रिलियन डॉलर (करीब 378 लाख करोड़ रुपये) हो जाएगी.
बिटकॉइन के दाम आधेTOI के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी की दिग्गज कंपनी बिटकॉइन को साल 2026 की शुरुआत से ही भारी नुकसान हो रहा है. इस साल की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन के दाम 28 परसेंट गिर चुके हैं. अक्टूबर 2025 की रिकॉर्ड ऊंचाई से बिटकॉइन का दाम करीब आधा रह गया है.
बिटकॉइन दुनिया की सबसे महंगी क्रिप्टोकरेंसी है. लेकिन 5 फरवरी 2026 को बिटकॉइन में 13% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. यह नवंबर 2022 के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है.
पिछले साल अक्टूबर के महीने में बिटकॉइन का दाम 1 लाख 24 हजार डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था. आज की तारीख यानी 6 फरवरी को भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1 करोड़ 12 लाख रुपये के आसपास बनती है. लेकिन 6 फरवरी के दिन बिटकॉइन का भाव लुढ़ककर 60 हजार डॉलर (करीब 54 लाख रुपये) के नीचे आ गया था.
बिटकॉइन को अक्सर "डिजिटल सोना" कहा जाता है. एक और प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी ईथर में भी इस दौरान लगभग 38% की गिरावट दर्ज की गई है.
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क्रिप्टो मार्केट में भारी गिरावट के कुछ बड़े कारण क्या हैं?टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि बड़े निवेशक क्रिप्टो से पैसा निकाल रहे हैं. इसके चलते क्रिप्टो मार्केट में बिकवाली बढ़ी और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ. कई ट्रेडर्स ने उधार लेकर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पैसा लगाया था. लेकिन जैसे ही गिरावट शुरू हुई तो देखा-देखी में बड़ी तादाद में निवेशक क्रिप्टोकरेंसी बाजार से पैसा निकालने लगे.
एक बड़ी वजह अमेरिका में संभावित सख्त ब्याज दर नीति को भी माना जा रहा है. वॉलस्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में चुनने का फैसला किया है. वॉर्श को कड़े रुख वाला नीति-निर्माता माना जाता है. इसलिए निवेशकों को डर है कि आगे चलकर मौद्रिक नीति सख्त रह सकती है. इससे जोखिम भरे एसेट्स, जैसे क्रिप्टो पर दबाव बढ़ सकता है.
इसके अलावा, बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली और बिटकॉइन ETF से लगातार पैसे की निकासी ने भी बाजार की कमजोरी को बढ़ाया है.
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निवेशकों को क्या सलाह है?दुबई के एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. एक-दो दिन क्रिप्टो की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है.
धर्मेश ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में बातचीत शुरू हुई है. इन दोनों देशों के बीच काफी समय से तनाव बना हुआ है. अगर इस बैठक में झगड़ा खत्म करने को लेकर सहमति बन जाती है तो शेयर बाजार में तेजी आ सकती है. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो कमोडिटी बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसे में क्रिप्टो के दाम और गिर सकते हैं.
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वहीं, सेबी रजिस्टर्ड इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित सुरेश जैन ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा है कि बिटकॉइन में निवेश करने वालों को अभी इंतजार करना चाहिए. आने वाले समय में बिटकॉइन की कीमत 55,600 डॉलर तक आ सकती है. ये स्तर टूटा तो बिटकॉइन का दाम 40 हजार डॉलर तक भी गिर सकता है.
हालांकि जैन का ये भी कहना है कि अगर बिटकॉइन दोबारा 71,300 डॉलर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल होता है, तो इन लेवल्स पर एक बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. इस हालत में भाव 83 हजार डॉलर तक भी जा सकता है.
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