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रूस से सस्ता तेल खरीदते-खरीदते भारत ने अपना बड़ा नुकसान करवा लिया!

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूस से लगातार कच्चा तेल खरीद रहा है.

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रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है. (फोटो- इंडिया टुडे)

रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) शुरू होने के बाद से भारत लगातार रूस से सस्ता कच्चा तेल (Crude Oil) खरीद रहा है. लेकिन अब ये सस्ता तेल मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बनता नजर आ रहा है. आखिर ये क्यों हो रहा है? भारत रूस से हर दिन कितना कच्चा तेल खरीदता है. इसके अलावा ये भी जानेंगे कि रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा कितना बढ़ गया है. रुपये में विदेशी व्यापार करने के मोदी सरकार की योजना पर क्या असर पड़ सकता है?

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सस्ते के चक्कर में भारत रूस से जमकर कच्चा तेल खरीद रहा है, लेकिन अब ये फायदे का सौदा मोदी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बनता नजर आ रहा है. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के बीच आयात और निर्यात की खाई बढ़ती जा रही है. इससे रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है. साथ ही रुपये में व्यापार करने की हसरतों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है. ब्लूमबर्ग की इस खबर में कहा गया है कि रूस अब रुपये में पेमेंट नहीं ले रहा है क्योंकि रूस के बैंकों के पास काफी मात्रा में रुपये जमा हैं और अब वहां के बैंक अब रुपये में भुगतान के कन्नी काट रहे हैं. अब समझते हैं कि भारत ने रूस के साथ रुपये में ट्रेड लेकर क्या प्लान बनाया था और ये खटाई में पड़ता क्यों दिख रहा है.

अकाउंट तो खुल गए, लेकिन…

दरअसल, पिछले साल जुलाई में RBI ने विदेशी व्यापार करने में ज्यादा से ज्यादा पेमेंट रुपये में करने की योजना का ऐलान किया था. इसका मकसद था कि रुपये में गिरावट को थामा जा सके और डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके. लेकिन करीब सात महीने बीतने के बाद भी विदेशी व्यापार के मामले में रुपये में पेमेंट काफी सीमित है. सिर्फ विदेश से खरीदे गए हथियारों को छोड़कर किसी और अन्य सामान के लिए रुपये में भुगतान अब भी पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है. वहीं अगर रूस की बात करें तो यूक्रेन युद्ध के बाद से जब अमेरिका ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया, तो भारत ने इस मौके को ताड़ते हुए रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदने के लिए भी रुपये में व्यापार का विचार रूस के साथ साझा किया था. जिसे रूस ने स्वीकार भी कर लिया. इसी के तहत पिछले साल RBI ने रूसी बैंकों को भारत में वोस्ट्रो अकाउंट खोलने की अनुमति भी दे दी थी.

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15 नवंबर को न्यूज एजेंसी PTI ने कॉमर्स सेक्रेटरी सुनील बर्थवाल के हवाले से लिखा था कि नौ वोस्ट्रो अकाउंट खोले गए हैं. एक यूको बैंक में, एक स्बर में, एक वीटीबी में और छह इंडसइंड बैंक में. ’स्बर रूस का सबसे बड़ा बैंक हैं, जबकि वीटीबी रूस का सरकारी बैंक है. वोस्ट्रो अकाउंट खुलने से भारत के साथ व्यापार करने वाले देशों को आयात या निर्यात करने पर डॉलर की जगह रुपये में भुगतान करने की सुविधा मिलती है. लेकिन रूसी बैंकों की तरफ से भारत में वोस्ट्रो अकाउंट खुलने के कई महीने बीतने के बाद भी अब तक रूस के साथ रुपये में ज्यादा लेनदेन नहीं हो पा रहा है क्योंकि रूस के बैंक अपने यहां रुपये का ढेर जमा करने के पक्ष में नहीं हैं. वहीं सस्ते के चक्कर में भारत ने रूस से जमकर तेल की खरीदारी बढ़ाई है.

ट्रेड मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जनवरी से लेकर नवंबर तक यानी 8 महीने में भारत ने रूस से 16 गुना ज्यादा कच्चा तेल खरीदा है. इसके चलते रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा काफी बढ़ गया है. हालांकि, इसका समाधान निकालने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों ने पिछले महीने मुलाकात की थी ताकि रुपये में व्यापार करने की योजना को वापस पटरी पर लाया जा सके. इस बैठक में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में रूस के साथ निर्यात बढ़ाने के तरीकों पर काफी चर्चा की थी.

एक मुश्किल और है

इस बारे में हमने फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली से बात की है. शरद ने कहा कि भारत की एक मुश्किल और है. मान लो भारत अगर रूबल यानी रूस की मुद्रा में भुगतान करे तो भी एक बड़ी चुनौती ये है कि वहां की करेंसी बहुत हिचकोले खाती है. इस वजह से रूबल के लिए कोई निश्चित विनिमय दर नहीं है.  Bloomberg के मुताबिक, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के एक बड़े अफसर ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि रिफाइनर को जोड़ने से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की करेंसी दिरहम में पेमेंट करना होगा जो कि डॉलर में आंका जाता है. बाजार मूल्य के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और BPCL उन भारतीय रिफाइनरी में शामिल हैं, जो रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए दिरहम में भुगतान करती हैं.

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हालांकि, भारत के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालयों के प्रवक्ताओं ने इस मामले पर ब्लूमबर्ग को फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है. आपको बता दें कि रूस अब इराक और सऊदी अरब को पछाड़कर भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर है. रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले तक भारत रूस से जहां 1% से भी कम कच्चे तेल का आयात करता था. वहीं पिछले साल दिसंबर में, भारत ने रूस से हर दिन 12 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है. यह आंकड़ा एक साल पहले की तुलना में 33 गुना ज्यादा है. 

इस तरह से देखा जाये तो रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार में कच्चे तेल दबदबा बना हुआ है. इसके अलावा पिछले कुछ महीनों से भारत रूस से सूरजमुखी तेल और फर्टिलाइजर भी खूब खरीद रहा है. नतीजतन, रूस से भारत का आयात पिछले साल जनवरी से लेकर नवंबर के बीच 400 फीसदी से अधिक बढ़ गया है. निर्यात की बात करें तो रूस के साथ भारत का निर्यात 14 फीसदी घट गया है. वहीं, रूस के साथ रुपये में व्यापार न हो पाने के चलते पहले से ही दबाव में चल रहा भारतीय रुपया और कमजोर पड़ सकता है.

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