पंकज वर्मा (बदला नाम) एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं. उन्हें कंपनी में 5 साल पूरे होने पर गिफ्ट का एक कैटलॉग दिया गया. उन्होंने इस कैटलॉग की मदद से एक ब्रांडेड लैपटॉप बैग चुना. 5 साल बाद, जब उन्होंने वहां दस साल पूरे कर लिए, तो उन्हें एक और कैटलॉग दिया गया और उन्होंने एक महंगा परफ्यूम चुना. अपनी पसंद से गिफ्ट चुनने की आजादी से पंकज काफी खुश हैं. उनका कहना है कि इससे मुझे ऐसा लगा कि कंपनी को मेरी कद्र है. उनका यह अनुभव है कि कंपनियों में धीरे-धीरे हो रहे गिफ्ट देने के तरीकों में बदलाव को दिखाता है.
कॉरपोरेट गिफ्टिंग का बदल गया तरीका, स्टाफ को दिवाली नहीं इन मौकों का रहता इंतजार!
पिछले कुछ सालों तक कंपनियों की तरफ से दिवाली के मौके पर गिफ्ट और बोनस देने का ट्रेंड था. हालांकि, कॉरपोरेट गिफ्टिंग का तरीका अब बदल रहा है. अब कर्मचारियों को बर्थडे, वर्क एनिवर्सरी जैसे मौकों पर गिफ्ट मिलते हैं. कुछ कंपनियां बोनस भी देती हैं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक कंपनियों की तरफ से दिवाली, सालाना बोनस और त्योहारों पर गिफ्ट मिलते थे. लेकिन अब कंपनियों में ट्रेंड बदल रहा है. अब कंपनियां कर्मचारियों के जन्मदिन, वर्क एनिवर्सरी और प्रमोशन पर गिफ्ट दे रही हैं.
प्रोफेशनल्स के लिए गिफ्ट होता है यादगारपीआर कंसल्टेंट अस्मिता राज यादव के लिए उनके सबसे यादगार वर्कप्लेस गिफ्ट में से एक उनके जन्मदिन पर आया. पिछली कंपनी में उनकी टीम ने उन्हें एक ब्यूटी बॉक्स सेट और एक वाउचर देकर सरप्राइज दिया.
वह कहती हैं, "गिफ्टिंग के इस तरीके ने मुझे इमोशनल भी कर दिया. मुझे ऐसा लगा कि काम में तारीफ सिर्फ प्रोफेशनल कामयाबी से कहीं ज्यादा होती है." लेकिन, दिवाली का अपना ही मजा है. अस्मिता राज यादव को याद है कि उन्हें मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के साथ मिक्सर और एयर फ्रायर जैसे गिफ्ट मिले थे.
दिल्ली-एनसीआर के एक स्कूल में टीचर नीलम गुप्ता के लिए वर्कप्लेस पर सबसे यादगार सेलिब्रेशन किसी एक को गिफ्ट देने के बारे में बिल्कुल नहीं था. टीचर्स डे पर उनके स्कूल ने लंच की व्यवस्था की और टीचर्स के लिए खासतौर पर एक पूरा सिनेमा थिएटर बुक किया. नीलम गुप्ता कहती हैं, “पूरा थिएटर स्क्रीन सिर्फ हमारे लिए बुक किया गया था. हमें उस दिन वाकई लगा कि हमारे काम का सम्मान किया जा रहा है.”
इसी तरह लेक्चरर निधि शर्मा बताती है कि जहां वह पढ़ाती हैं वहां किसी साथी के जन्मदिन पर एक पौधा और एक साड़ी गिफ्ट देने का रिवाज है. साथ में डीन और दूसरे स्टाफ मेंबर्स की तरफ से पर्सनल साइन किया हुआ एक कार्ड भी होता है. निधि शर्मा के लिए, हाथ से लिखे मैसेज बहुत कीमती हैं.
ऊपर बताए गए इन कुछ उदाहरणों से पता चलता है कि वर्कप्लेस पर दिए गए गिफ्ट कैसे कर्मचारियों के लिए यादगार बन सकते हैं.
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कई कंपनियां बर्थडे और एनिवर्सरी पर देती हैं गिफ्टइन उदाहरणों से पता चलता है कि कंपनियां गिफ्ट देने के तरीके में एक बड़ा बदलाव कर रही हैं. पहले सिर्फ दिवाली पर गिफ्ट देने का चलन था. लेकिन अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को जन्मदिन, नौकरी ज्वाइन करने, वर्क एनिवर्सरी, प्रमोशन और प्रोफेशनल अचीवमेंट पर गिफ्ट दे रही हैं.
अब कंपनियां पहले की तरह मिठाइयों और हैंपर्स के साथ-साथ वाउचर, गिफ्ट कार्ड, लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स, वेलनेस आइटम्स भी बांट रही हैं. कंपनियों का मकसद कुछ ऐसा देना है जिसे कर्मचारी इस्तेमाल कर सकें या एन्जॉय कर सकें.
इंडियन गिफ्टिंग मार्केट 2021 में दिए गए अनुमानों के मुताबिक, भारत का कुल गिफ्टिंग मार्केट लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का है. इसमें कॉर्पोरेट गिफ्टिंग का हिस्सा 12,000 करोड़ रुपये है.
गिफ्टिंग कंपनियों की भी मौज?कंपनियों में गिफ्टिंग के तरीके में आ रहे बदलाव से गिफ्ट बनाने वाली कंपनियों को अच्छा खासा फायदा हो रहा है. उन्हें खूब आर्डर मिल रहे हैं. आईजीपी के फाउंडर और सीईओ तरुण जोशी का कहना है कि गिफ्ट देना कंपनियों के लिए साल भर कर्मचारियों को पहचानने, इनाम देने और उनसे जुड़ने का एक तरीका बनता जा रहा है. वे कहते हैं, “गिफ्ट देना अब सिर्फ़ त्योहारों तक ही सीमित नहीं रहा.” तरुण जोशी के मुताबिक आईजीपी के लगभग 35% कॉर्पोरेट ऑर्डर दिवाली के आसपास आते हैं, जबकि बाकी 65% ऑर्डर साल भर के मौकों से आते हैं.
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