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10 साल में पहली बार जनवरी में ही निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये 'स्वाहा', लेकिन क्यों?

पिछले 10 साल में साल की शुरुआत में शेयर बाजार इतना कभी नहीं गिरा है. इस साल अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 2% टूट चुके हैं.

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पिछले 10 साल में साल की शुरुआत में शेयर बाजार इतना कभी नहीं गिरा है. (फोटो क्रेडिट: PTI)

नया साल शुरू हुए अभी महीना भी नहीं बीता और शेयर बाजार निवेशकों को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ गया. जनवरी में अब तक 10 दिन स्टॉक मार्केट खुला है. इकोनॉमिक टाइम्स के पत्रकार निखिल अग्रवाल की एक खबर के मुताबिक पिछले 10 साल में साल की शुरुआत में शेयर बाजार इतना कभी नहीं गिरा है. इस साल अब तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 2% टूट चुके हैं. बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 2026 में अब तक लगभग 7.6 लाख करोड़ रुपये घटकर 468 लाख करोड़ रुपये रह गया है. 

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मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी के सभी शेयरों की कुल वैल्यू को कहते हैं. वहीं, शेयर बाजार में निवेशक पैसा लगाते हैं. ऐसे में मार्केट कैप घटने का मतलब ये है कि निवेशकों की इतनी पूंजी घट गई है. हालांकि, शेयर बाजार में होने वाला नुकसान अक्सर 'नोशनल लॉस' होता है. नोशनल नुकसान का मतलब है ऐसा घाटा जो अभी वास्तव में जेब से नहीं गया है. जब तक आपने शेयर बेचा नहीं है, तब तक बाजार में दिख रहा नुकसान नोशनल होता है.

क्यों गिर रहा शेयर बाजार ?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह दुनियाभर के निवेशकों का भारत के शेयर बाजार से पैसा निकालना है. विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अब तक 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपये) भारतीय बाजार से निकाल चुके हैं. इस समय इंडेक्स फ्यूचर्स में 92% शॉर्ट पोजिशन में हैं. शेयर बाजार में शॉर्ट पोजिशन का मतलब होता है गिरावट पर दांव लगाना यानी निवेशक या ट्रेडर को लगता है कि किसी शेयर या इंडेक्स की कीमत आगे घटेगी, इसलिए पहले अपने शेयर बेचता है और बाद में सस्ते में खरीदने के लिए इंतजार करता है.

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रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील में देरी के चलते निवेशकों में चिंता है. इस वजह से ये लोग शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बातचीत के इस हफ्ते दोबारा शुरू होने की उम्मीद है. लेकिन इसका खास फायदा बाजार को मिलता नहीं दिख रहा है.

इसके अलावा निवेशकों की चिंता फरवरी में आने वाले आम बजट को लेकर भी है. निवेशकों की नजर इस बात पर है कि सरकार आगामी बजट में कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) बढ़ाएगी कि नहीं. पिछले दो बार के बजट में सरकार ने इस मद में बहुत ज्यादा धनराशि आवंटित नहीं की है. 

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आगे कैसा रहेगा शेयर बाजार?

दुबई के एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर (वेल्थ मैनेजमेंट) डॉक्टर धर्मेश भाटिया ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि साल 2025 में बंबई शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स यानी सेसेंक्स ने 86,159 के स्तर का ऑलटाइम स्तर को छुआ. पिछले साल सेंसेक्स करीब 20 पर्सेंट उछला. लेकिन 2026 की शुरुआत बाजार के लिए कठिन रही है. उनका कहना है कि ऐसे माहौल में शेयर बाजार में बड़ी और एकतरफा तेजी की उम्मीद कम ही दिखती है.

शुरुआती महीनों में इंडेक्स के रेंज-बाउंड रहने की आशंका ज्यादा है और जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेगा, बाजार की दिशा काफी हद तक बजट के फैसलों और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगी. अगर सरकार बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाती है और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर दबाव कम होता है, तो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट सकता है. इस स्थिति में लार्जकैप शेयरों में स्थिरता और चुनिंदा सेक्टर्स में रिकवरी देखने को मिल सकती है.

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इसके अलावा कई दूसरे कारण भी बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे. जैसे कि अगर भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहती है और कंपनियों के नतीजे उम्मीद के मुताबिक आते हैं, तो बाजार फिर से ऊपर की ओर ट्रेंड पकड़ सकता है. हालांकि, मिड और स्मॉलकैप सेगमेंट में ऊंचे वैल्यूएशन के चलते सतर्कता जरूरी रहेगी. 

एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है, “शॉर्ट टर्म में सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है और आगे भी गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. 25,600 के स्तर से नीचे फिसलने पर गिरावट और बढ़ सकती है. ऊपर की तरफ 25,835 पर मजबूत रेजिस्टेंस है.” 

जानकारों का कहना है कि कंपनियों के वित्तीय नतीजों का सीजन अभी दो हफ्ते दूर है. ऐसे में ट्रेडर्स का मानना है कि बाजार ज्यादातर समय साइडवेज ही रह सकता है.

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