आज सुबह हमारे एक साथी दिग्विजय सिंह ने हमसे एक बात पूछी. बोले 3 साल पुरानी बीएमडबल्यू 15 हजार किलोमीटर चली हुई 15 लाख में मिल रही है, खरीद लूं? हमने कहा एकदम खरीद लीजिए. लेकिन पहले कुछ जरूरी बातों का ख्याल रख लीजिए. पुरानी कार या सेकंड हैंड कार लेना वाकई अच्छा सौदा है. स्पेशली ऐसी पुरानी कार जो महज कुछ साल चली हो. एक ही बंदे ने चलाई हो और सेल करने वाला सोर्स भरोसे वाला हो. इसके साथ कुछ और सावधानियां बरतने की सलाह भी अपन ने दे डाली. अब उनको बताया और आपको नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है.
सेकंड हैंड कार में ये 5 चीजें ठीक हैं तो तुरंत खरीद लीजिए
नई कार खरीदने से ज्यादा पुरानी कार को खरीदना हमेशा मुनाफे का सौदा माना जाता है क्योंकि इसमें आप कम बजट में भी अपनी मनपसंद कार के मालिक बन सकते हैं. अगर आप भी ऐसा कुछ प्लान कर रहे हैं तो इन 5 बातों का ध्यान रखें जिससे आप नुकसान या धोखे से बच सकें.

# सर्विस रिकॉर्ड: पुरानी गाड़ी खरीदने का सोच रहे हैं तो सोचने से पहले ही उस गाड़ी का सर्विस रिकॉर्ड मांगकर देख लीजिए. सर्विस रिकॉर्ड माने गाड़ी की पूरी कुंडली. अब तक गाड़ी में क्या रिपेयर हुआ, कोई एक्सीडेंट तो नहीं या फिर कोई बड़ा खर्च तो नहीं, जैसे इंजन रिपेयर. अगर सर्विस रिकॉर्ड में कोई झोल है, जैसे एक सर्विस एजेंसी से और एक लोकल तो ऐसी गाड़ी से दूर रहिए. RC, इंश्योरेंस के साथ अगर गाड़ी पर लोन रहा है तो एनओसी भी पहले ही चेक कर लो.
# कागज-पत्री बरोबर हैं तो अब गाड़ी को चेक करने की बारी है. स्टार्ट करके देखिए कि आवाज में कोई बदलाव तो नहीं. चाबी एक बार घुमाने या पुश स्टार्ट बटन एक बार दबाने पर गड्डी स्टार्ट हो रही या नहीं. बोनट उठाकर देखें कि इंजन में कोई तेल या फ्लूइड लीक तो नहीं हो रहा है. इंजन ऑयल का कलर और उसके लेवल की जांच करना न भूलें. अगर ऑयल बहुत काला और गाढ़ा है तो कार की सर्विसिंग समय पर नहीं हुई है.

# कार का मालिक या एजेंसी आपसे कुछ भी कहे लेकिन आपको खुद से कम से कम 25 किलोमीटर कार चलाकर देखनी है, भले इसके लिए फ्यूल का पैसा आपकी जेब से क्यों ना लगे. चेक कीजिए कि गियर बदलते वक्त कोई गुड़गुड़ की आवाज तो नहीं आ रही. मामला एकदम मक्खन होना चाहिए. 25 किलोमीटर में सपाट रास्तों के अलावा थोड़े उबड़-खाबड़ वाले रास्तों पर चलाकर सस्पेंशन की आवाज और स्टेबिलिटी की जांच करें. साथ ही, ब्रेक लगाकर देखें कि गाड़ी एक तरफ तो नहीं खिंच रही.
# कार में बैठे हों तो इंटीरियर भी अच्छे से चेक करो. सारी लाइटें जुगजुगा रहीं या नहीं. म्यूजिक सिस्टम में गाने बजते भी हैं या सिर्फ घर्र-घर्र की आवाज आती है. गूगल मैप चलता है या नहीं. विंडो के कांच सही से ऊपर नीचे होते हैं या नहीं.
# इतना सब करने के बाद आपको सबसे जरूरी काम करना है. गाड़ी का PDI करवाना है. आप कितनी भी टेस्टिंग कर लो, कई खामियां पता नहीं चलतीं. लेकिन PDI यानी Pre-Delivery Inspection में पूरा कच्चा-चिट्ठा बाहर आ जाता है. जैसे गाड़ी पर बाहर से पेंट हुआ है या नहीं. टायर की उम्र कितनी बची है. आजकल कई कंपनियां ये काम करती हैं. उनके पास इसके लिए गजेट्स भी होते हैं. 1500 से 2000 में PDI जो जाता है. अगर गाड़ी मालिक या एजेंसी इसके लिए मना करे तो आपने उस गाड़ी को लेकर ‘बे-कार’ में परेशान नहीं होना है.
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