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डकैत जगन गुर्जर की कहानी, जिसकी जेल में हुई हत्या ने हंगामा मचा दिया

चंबल की बीहड़ों से राजस्थान और मध्य प्रदेश के बॉर्डर इलाके में अपराध का साम्राज्य बनाने वाले जगन गुर्जर की हत्या हो गई है. अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में एक बात पर विवाद के चलते साथी कैदी ने जगन की हत्या कर दी. जगन के परिवारवालों ने जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए घटना की सीबीआई जांच की मांग की है.

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राजस्थान में जगन गुर्जर की हत्या के बाद से बवाल मचा हुआ है. (इंडिया टुडे)

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  • जगन गुर्जर की अजमेर जेल में हत्या कर दी गई, जिस घटना की जांच के लिए पुलिस और अधिकारियों ने मुआयना शुरू कर दिया है और एक कैदी को आरोपी बताया गया है।
  • जगन की हत्या के पीछे उनके और एक अन्य कैदी विष्णु जाट के बीच चल रहे विवाद और पूर्व में उनकी क्षेत्रीय आपराधिक गतिविधियों को कारण माना जा रहा है।
  • हत्या के बाद परिवार ने कई मांगें सरकार को दी हैं, जिनमें सीबीआई जांच, पुलिसकर्मियों का सस्पेंडेशन, और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल हैं, जांच प्रक्रिया जारी है।

चंबल के बीहड़ों में कभी खौफ का पर्याय रहे जगन डकैत की अजमेर जेल में एक कैदी ने हत्या कर दी. उसके परिवार वाले JLN अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. डकैत जगन गुर्जर के बेटे आसाराम ने 29 जून को अपने समुदाय के लोगों के साथ जाकर तहसीलदार ओम लखावत को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम का ज्ञापन सौंपा है. इसमें सरकार से 5 मांगें रखी गई हैं.

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क्या हैं जगन के परिवार की पांच डिमांड

# जगन गुर्जर को झूठे आर्म्स एक्ट में फंसाकर अजमेर जेल भिजवाने वाले SHO को सस्पेंड किया जाए और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.

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# जगन गुर्जर के पोस्टमार्टम से पहले उसके भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर जेल से धौलपुर जेल शिफ्ट किया जाए. जगन का भाई भी अजमेर जेल में ही बंद है.

# जगन गुर्जर के परिवारवालों को लगातार धमकियां मिल रही हैं इसलिए उनको तुरंत पुलिस प्रोटेक्शन दी जाए.

# पप्पू गुर्जर और जगन के दूसरे भाइयों को उसके दाह संस्कार में शामिल होने की परमिशन दी जाए.

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# जेल सुपरिटेंडेंट और दूसरे स्टाफ को तुरंत सस्पेंड किया जाए. उन पर हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज किया जाए. और पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी जाए.

बंद सीसीटीवी कैमरे पर उठाए सवाल

आसाराम समेत जगन गुर्जर के परिवारवालों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे मानी नहीं जातीं, तब तक वे पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे. जगन गुर्जर के रिश्तेदार प्रह्लाद खटाना ने जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सबसे सुरक्षित माने जाने वाली हाई सिक्योरिटी जेल में घटना के समय सीसीटीवी कैमरे बंद क्यों थे? उन्होंने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया, 

सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर बंद किए गए थे ताकि हत्यारों को बचाया जा सके. इस पूरे मामले में सीबीआई जांच जरूरी है.

इन आरोपों के बाद अजमेर रेंज के IG राजेंद्र सिंह और जेल IG विक्रम सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है.

जगन गुर्जर की हत्या किसने की?

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, जगन गुर्जर की हत्या उसी बैरक में बंद हार्डकोर क्रिमिनल विष्णु जाट (उर्फ बौना) ने की है. कथित तौर पर जगन गुर्जर ने उसकी बहन को लेकर कुछ आपत्तिजनक कॉमेंट किया था. इसको लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. 29 जून की सुबह दोनों को बैरक में बंद किया गया था. इसी दौरान विष्णु ने जगन की हत्या कर दी. दोपहर के 3 बजे सरकारी गार्ड जब बैरक में पहुंचा तो इस घटना का खुलासा हुआ. विष्णु पिछले 3 साल से इसी जेल में है, जबकि जगन को इसी साल मार्च में यहां शिफ्ट किया गया था.

डकैत जगन गुर्जर कौन था?

जगन गुर्जर नाम का कभी चंबल के बीहड़ों में खौफ हुआ करता था. साल 1994 में अपराध की दुनिया में एंट्री लेने वाले जगन पर डकैती, रंगदारी और हत्या समेत 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे. जगन ने तीन शादियां कीं. उनसमें से एक तो उसके अपराध में भी पार्टनर रही है. मध्य प्रदेश में पुलिस के साथ एक एनकाउंटर में वो घायल भी हुई थी.

डकैत बनने की कहानी फिल्मी

जगन के अपराध की दुनिया में एंट्री का किस्सा फिल्मी है. वो राजस्थान के धौलपुर का रहने वाला है. उसका गांव भावुतिपुरा मध्य प्रदेश और राजस्थान के बॉर्डर पर है. चंबल नदी के किनारे. उसके पिता शिवचरण गुर्जर मंदिर में पूजा-पाठ कराते थे. परिवार दूध का व्यापार करता था. जगन भी दूध बेचने में परिवार की मदद करता था. एक दिन मंदिर में प्रसाद बांटने को लेकर कुछ विवाद हुआ. मंदिर कमेटी और जगन के पिता के बीच कहासुनी हुई. जगन को पता चला तो उसने कमेटी के लोगों से मारपीट की. फिर पुलिस के पकड़े जाने के डर से चंबल बीहड़ों में भाग गया. यहां रहकर उसने अपना गैंग बनाया और डकैती करने लगा.

साल 2008 में वसुंधरा राजे को धमकी दी

साल 2008. राजस्थान में गुर्जर आंदोलन हुआ. उनकी मांग गुर्जर समुदाय को ओबीसी से निकालकर एसटी कैटेगरी में डालने की थी. इस दौरान जगन गुर्जर ने तब की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी दी थी. उसकी इस धमकी ने देश भर में सुर्खियां बटोरीं. इसके बाद उस पर 11 लाख का इनाम घोषित किया गया. पुलिस की बढ़ती दबिश के बाद साल 2009 में उसने कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने सरेंडर किया. वादा था कि अब अपराध छोड़ देगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इससे पहले भी साल  2001 में उसने IPS बीजू जॉर्ज जोसफ के सामने सरेंडर किया था.

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कई बार कर चुका था सरेंडर

तीसरी बार 19 अगस्त 2018 को गुर्जर ने तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने सरेंडर किया. इसके बाद उसको जमानत मिल गई. साल 2019 में उस पर दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके पीटने का आरोप लगा. पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया. फिर कुछ समय बाद वो जेल से छूट गया. आखिरी बार साल 2022 में उसको तत्कालीन कांग्रेस विधायक गिर्राज मलिंगा को जान से मारने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. तब से वो जेल में ही था. जान बचाने के लिए जेल को ढाल बनाने वाले जगन की कहानी जेल में ही खत्म हो गई.

वीडियो: तारीख: चंबल का खूंखार डाकू निर्भय गुर्जर कैसे मारा गया था?

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